पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/८५०

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७२ वीजगणित होने लगे। इसके याद हो केप्लाफे या क्षेत्रके आवर्तित स्थाफे साथ तुलना कर देखनेसे वीजगणित अल्प समय- सम्पातमे घनक्षेत्रके उत्पादनतस्व, केवेलेरियस अयि में बहुत दूर तक पहुंच चुका है, यह यात मुक्तकण्ठसे . भाज्य विषयक ज्यामिति, वालिश गनन्तत्यशापकगणित, स्वीकार करनी पड़ती है। .. न्यूटनको सूक्ष्मराशिको गणनाप्रणाली और लिवनिटज प्राचीन धीजगणितके रचयितांसे ले कर लाख तक अति सूक्ष्मांश और अखण्डांशघटित गणिततत्त्व आधि सभाने एक स्वरसे स्वीकार किया है, कि.प्रत्येक संख्या- कृत हुए । इसी समय वारो, जेम्म, प्रेगरी, रेन, कोट्स, घटित समीकरणका ही एक मूल है अर्थात् प्रकृत ही हो टेलर, हेलो, डो, मयडार, मेक्लोरोन, टारला, रोधार भाल. या कल्पित ही हो जिस किसी सण्याघटित राशि द्वारा फामनेट, हायपेन्स, वानौलिसमय और पासकाल, समीकरणको अज्ञातराशि निर्देश की जायेगी और यह आदि वहुतेरे गणितज्ञ ध्यनियोने इसकी आलोचना! समीकरण संख्यासुचक हो उठेगा । लाप्रेक्ष, गौस आरम्भ कर परस्परको पुनः पुनः तत्त्वतरङ्गमें आलोभित और गाइभरोने गणितके सम्बन्ध में जो उपपत्तियां मावि- किया था। रकार को हैं, उन्हींको अवलम्बन फर गणितयिद कौयों काग्रेज। | Journal de I' Ecole Polytechnique और पोछे १८वीं शताब्दी के मध्यभागमें पोजगणितके सम्बन्ध- Coursd Analyse Ulgebriquc नामक पुस्तिकाद्वयमें में उल्लेखनीय कोई आविष्कार ही नहीं हुआ है। मये विशेष भावले आलोचना कर गये है। . . आविष्कारमे मनोयोगी न हो, सभी इस समय न्यूटन, लिवनीज और देकार्ट के आविष्कृत विषयोंको आलोचना . कोचीने जिन उपपत्तियोंकी मालोचना की, उससे , प्रवृत्त थे। इस शताब्दोके शेषांशमे लान नामक एक पहले मार्गाण्ड नामक एक गणितविद् अपने रचे गणितविद् विशेषभावसे गणितसर्चाम प्रवृत्त हुए । इन्होंने Gergonne's Aunalea des Mathematiques नामक iruite de le Resolution des Equations Nunneri- प्रस्थके पांचवें भागमै उसका आभास दे गये हैं। कोची. , ques अन्धमें जिस तत्त्वकी आलोचना की थी, उसीका का कहना है, कि जिस राशिका न्यके समतुल्य परि.. अनुसरण कर कुदान, फुरियार, टर्म और अन्याय अङ्कविद माणमें परियर्शित किया जा सकता है, यद दा उत्पादक- न्यूटन कृत युनिभर्शल एरिथमेटिकके आदर्श पर अपने । की गुणनफलसे उत्पन्न है, इस तरह दिखाया जा सकता अपने प्रन्य रच गपे हैं। लामेजने Theoric des lonc: | है। उक्त उत्पादकमे एक राशि निम्न संख्या परिणत हो tions analytiques और Calcul des fouctions नामक

नहीं सकता अर्थात् दूसरी बातमें कहा जा सकता है, जि.

अन्यद्वय में न्य रनके सूक्ष्मांशघटित गणितविद्याको चीज उक्त राशिमे जो निर्दिष्ट संख्या प्रदत्त है, उससे भी कम गणितका अशीभूत करनेको चेष्टा की थी और इसमे उन संख्या हो सकती है। मुतरां अङ्कको प्रणालों के अनुसार .. को सफलता भी मिली। इस समय गणितशास्त्रमें : उनको शून्यको तुल्य संख्या दो , जा सकती है । कोचीकी उपपत्ति विलकुल विशुद्ध न होने पर भी गन्यान्य , लब्धप्रतिष्ठ युलर नामक एक मनुष्य लाप्रेञ्जफे सहकारी | उपपत्तियोंस यह सनेकांशमै उत्कृष्ट है। रूपसे काम करते थे। गणितके सम्बन्धमें इन्होंने कई घड़े बड़े अन्ध लिखे हैं। इनके लिखे Novi Commen. सन् १८११ ई० मे हायनी दी रणस्को नामक एक tarii प्रन्धक १८चे भागमे वीजगणितके द्विपद उपपाद्य गणितविद्ने विभिन्न पर्यायको समीकरण उपपत्तिके के सम्बन्ध में कई नये तस्योंका परिचय मिलता है। सिवा संज्ञा द्वारा समाधान के लिये एक साधारण निगम १८वी शताब्दीके प्रारम्म तक घोजगणितको उन्नतिः आविष्कार कर उसे प्रकाशित किया। उन्होंने १८१७ . को सीमा यहां तक ही हद हो गई। यहां तक योजगणितने ईमें लिसवनको एकाडमी भाव सायन्समें एक घोषणा जितना उत्कर्ष प्राप्त किया, 'उससे ही सभी वीजगणित- प्रकाशित की, कि जो रणस्कोको निरूपित संज्ञाओं को की एक मोटी धारणा कर सकते हैं। वस्तुतः मूल अब ! उपपत्ति स्थिर कर सकेंगे, उनको पुरस्कार दिया जायेगा।