पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/८५३

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७४५ वीजगणित . . . रूजले यौको अपने मित्र राधेल मिलिटरी कालेजक। प्रनलनके बहुन गइले ब्रह्मगुप्तका जन्म हुआ था। अतएव ..' अध्यापक मि० सालयोके हाथ समर्पण किया। सालयोने। अरबोंके बहुत पहले हिन्दू लोग वोजणितके तत्वमे करीव १८००१०में रहे गणितोत्साही व्यक्तियों के निकट अवगन थे, इममें जरा भी संदेह नहीं। प्रकाशित किया। ____ ब्रह्मगुप्तका रचित ग्रंथ ही वीजगणितके सम्मे १८१३ १०मे संस्थत चीजगणित प्रथके पारमो ' हिन्दोका आदि पुस्तक है, ऐसा मो नहीं कह सकते। "अनुवादसे मि० पस्याई ट्रानीने 'योगणित' नामम्मे . विख्यात योनियो गोर गणितविद् तथा भास्करके यूरोपमें उसका मगरेजी में अनुवाद कर प्रकाशित किया। प्रधान भाष्यकार गणेशने आर्यभटके पुस्तकसे एकांश १८५६ ई०में घा० भान टेलरने मूलसंस्कृत भाषासे। उस न कर दिखाया है. कि बीजगणित पहले 'वी' नामसे 'लोलापती का अनुवाद कर बम्बई नगरमे उसे प्रकाश पुकारा जाता था। उनके प्रयौं प्रथम पर्यायको अनि. किया था। । हिंघ सम्पाद्य समाधानोपयोगो· कुट्टक नामक अति उक्त 'लोलायती पन्य गणित मार ज्यामितिविषयक प्राचीन प्रणालीका भी उल्लेख है। यह कुट्टक प्रणालो है। उसके तथा योजगणित नामक प्रन्धके मूल प्रन्य- मार्य हिन्दुओं को भति प्राचीन प्रणाली है। ' कार भारतफे सुपरिचित गणिविद भाकराचार्य हैं। सूर्य दाम नामक भास्करके दूमरे भाष्यकारने भो १८१७ महामति हेनरी रामस कोलघुकने "Algebrat, आमटको पुराकालोय चीजगणित लेन में अचा Arithmetic and lensuration, from thei धान दिया है। हिदूगण वर्गपूरण के नियमानुसार Sanskrit of Bralimagupte and Bhascare. वर्गीय समीकरण (Quadratic equations ) का नामक प्रग्य प्रकाशित किया। इस प्रन्धर्म संस्कृत समाधान कर सकते थे। मि. कोलघुकका कहना है कि कविता लिखित भास्करानार्थका बीजगणित और मायभट पुस्तक निर्दिष्ट पर्यायका वर्गीय समीकरण भी लीलापती सपा प्रमगुप्तका गणिताध्याय और फुटका• भनिदिए विभागका प्रथम है। यहां तक कि द्वितीय • ध्याय अनूदित हो कर विशेषभायमें मालोचित हुगा पर्यायके समीकरणका भी नियम रहना सम्भवपर ममझा है। उक्त प्रथम दो अन्य भास्कर रचित सिद्धान्तशिरो जाता है। मणि नामक उयोतिशास्त्र के प्रथमांश और अपशिष्टाद्ध आर्यभट किस समय वर्शमान थे, उसका निर्णय ग्रहासिद्धान्त नामक ज्योतिषविषयक एक दूसरे अन्धके ! करना कठिन है। मि० कोल र अनुमान करते हैं. वारहये और गठारहवें अध्यायसे सगृहोत हैं। कि फरीच ५यों सदी में पा उसके पूर्णवती ममयमें भाकरके लेखसे जाना जाता है, कि प्रायः १०७२) हिन्दुओं के ये मादि वीजगणितविद् वर्तमान थे । कोल. शक या १९५०६० भास्कराचार्य ने मिवान्तशिरोमणि वकके मतसे आभट प्रोक गणितविद् देवतासके प्र समाप्त किया था। भास्करने अपने वीजगणितके समसामयिक व्यतिथे । देवतसान सम्राट जुलियनके यन्तमें लिखा है कि उन्होंने अपने पूर्ववत्ती ब्रह्म शासनकाल में प्रायः ३६००को जन्मप्रहण किया था। श्रीधर और पानाम विरवित विस्तृत योजगणितसे मार्यभट देखो। अपना प्राय घहुन संक्षेपमै सङ्कलन किया है। सूर्य दास भारतीय बीजगणितविद आर्यभट और गीसके और रडना आदि सिद्धांतशिरोमणिके भाप्यकारोंने देवफतासके साथ तुलना कर मिल कोल कने सावित भार्यभर और चतुर्वेद पृथूदक म्वामी आदि प्राचीन किया है, कि समस्त पोजगणितशास्त्र के प्रत्कर्म विषयमे रीकाकारकों को भी अपने पूर्ववत्ती बताया है। मार्गमट ग्रोकपण्डित देवताससे कहा उशासन पानेके • ब्रहागुप्तने ५५० जौ ब्राह्मस्फुरतिद्धांतको रचना योग्य है। उन्होंने यह भी कहा है, कि हिन्दुओ'ने को। नाना प्रकारके प्रमाणादिका उल्लेख घर मि०, algorithun का थ्रेष्ठ और सहज उपाय आविष्कार कर । फोल प्रकने दिखलाया है. कि अरयों के मध्य गणितविधा प्रोकों पर भी प्रतिष्ठालाम किया है। इसके सिवा Vol xxi. 187