पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/८५४

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


वोजगणित निम्नोक्त नियमीको यदि अच्छी तरह आलोचना की जाय. साथ इस शास्त्र नैकट्य सम्बन्धके विषय में मालोचना । तो मालूम होगा, कि वोजगणित विषय में हिंदुओं का ही की जाय, तो हम निःसन्देह कह सकते हैं, कि कई सदी श्रेष्ठत्व है। पहलेसे ज्योतिषके साथ हो साथ इस विद्याका भी उद- . (१म ) एकाधिक अनातराणिविशिष्ट समीकरणका भव' हुआ था। Astrononie Indienne के प्रणेता ममाधान। वेलोके मतानुसरण कर अध्यापक प्लेफेयरने स्वकृत , (२५) उश पायके समीकरणका समाधान 1 इस } Memoir om the Astronomy of the Brahmins विषयमें हिंदूयोजगणितशगण यद्यपि सम्पूर्ण नियमका । प्रथमें लिखा है. कि हिन्दूज्योतिषशास्त्र अति प्राचीन- प्रतिपालन करने में मृतकार्य न हुए, तो भी उन्हों ने जो कालसे विद्यमान है। ईसा जम्मसे ३००० हजारसे भी इस विषयमें यथेष्ट चेष्टा और बुद्धिमत्ताका परिचय दिया बहुत पहले इस शास्त्रका लाविष्कार-काल माना जाता है, इसमें जरा भी सन्देह नहीं । वर्तमानकाल में प्रचलित | है। उक्त तत्वके सम्बन्ध संशय करके लाप्लेस, द्वियगीय समीकरण ( biquadratics ) के समाधान डिलाग्ने आदि यूरोपीय पण्डितोंने बहुत-सी बात कही मम्बन्ध मार्गहिन्दगण पाश्चात्य जगद्वासी प्राचीन है। अध्यापक लेसलीने अपने Philosophy of Arith. घोजगणितषिदोंके बहुत पहले जगत्में इस तस्वका metic अन्य लोलायतोके सम्बन्धमें लिखा है, कि उक्त आभास झलका गये हैं। ग्रन्थ कुछ अपरिस्फुट कविता लिखित नियमोका संमा. (३५) प्रथम और द्वितीय पर्यायका अनिर्दिष्ट वेशमात्र है। सम्पाद्य (Indeterminate probleins of the first पडिनवरा यूनिवर्सिटीके गणिताध्यक्ष मि० फिलिप anl second degrces) समाधान । इस विषयमें हिन्दुओं केलाण्ड और यूरोपीय किसी किसी पण्डितने लेमली. . ने देवफन्ताससे कहीं अधिक आविष्कार किया था | के मतानुसार लीलावतोको अस्पष्ट और अफिश्चित तथा आजकल चीजगणितमें प्रचलित तत्वसम्बन्ध समझा है सही, पर हम उसे मानने को तैयार नहीं । अपनी धारणाको उन्होंमे स्परभावमें प्रकाशित करनेकी । लीलायती जनसाधारणके लिये दुशय और दुर्योध्य है। चेष्टा की। मान लिया वह योजगणितविषयक प्रकृय ,मन्य नहीं है, (४र्थ ) ज्योतिषशास्त्र और ज्यामितिसम्वन्धोय तो भी उसमें जो वर्तमान बीजगणितके मौलिक गुरुत्व विषयादिमें वीजगणितका नियम प्रयोग। और वीजगणित-प्रक्रिया निष्पांध विभिन्न प्रकारके अभी इस विषय में बीजगणितके जो सय तत्त्व आवि. कितने विषय लिपिवद्ध हैं, उसे कदापि अस्वीकार नहीं 'कृत हुए हैं, हिन्दूवीजगणितज्ञ अति प्राचीनकालमें भी कर सकते। वर्तमान आलोचनामें वे सब गुप्ततत्त्व उन सब तत्वोंका मूल उद्घाटन कर गये हैं। उद्घाटित हुए हैं। ____ अरबोंने बडी विचक्षणतासे विज्ञानालोचनामें ख्याति । ____ गणित केलाएड, अध्यापक प्लेफेयरके मतानुवत्ती लाभ की है सही, परन्तु सच पूछिये तो उन लोगोंक हो हिन्दूयोजगणितके प्राचीनत्यको अस्वीकार नहीं कर द्वारा वीजगणित-सम्बन्ध में कुछ भी उन्नति न हुई।। सकते। अध्यापक प्लेफेयरने कई सदी तक हिन्द जिस अवस्थामे और जिस समय यह शास्त्र यूरोप में गणितकी अनुत्कषांवस्था हो वातोंका उल्लेख कर लाया गया उस समयसं वीजगणितको पूर्ण परिपुष्टि | निम्नोक्त मापा उसकी पूर्णाङ्गताका परिचय दिया है- होनेमें कई सदी योत गई थी, इसमें सन्देह नहीं, किन्तु , - In India, everything ( as well as algebra ) पाश्चात्य जगत्में बोजगणितको प्रवेश-प्रतिष्ठा और seens equally insurmountable and truth and पूर्णपुष्टिको यातको छोड़ कर हमें बोजगणितके प्राचीन | error are equally assured of permanence in the इतिहास-सम्बन्धमें मालूम होता है, कि आर्यभटके | stations they have once occupicd." घहुत पहलेसे ही भारतमे यह विद्या किसी न किसी। भारतीय ज्योतिष और धोजगणितकी प्राचीनता जो तरह प्रचलित थी। यदि वास्तविक ज्योतिपतत्वक अविसम्यादित है, उसे दर्तमान प्रत्नतत्त्वविदों ने एक