पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१०७

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गर-गरि वेशपति 'डार (4.पु.) तोमरूपये दो पाने के बराबर म. साथ दिया। इसलिए जयसिको बाध बार रिकाका एक सिका। भागना पड़ा। मापद राजधानो पारोरको तरफ डाली (हि खो०) १ टोकरा, चंगेरी। २ फल फल या पग्रसर होने लगे। पबकी बार डाहिरने समस्त सेना से खाने पीनकी पख जो डलिया में सजा कर किसोके यहां कर जीजानसेन-नासिम विसधारण किया। भेजी जाय। उनको तरफसे उस समय ५०,००० मेगा बुर पर रहो उबड़ा (f. पु.) १ पिठवन। २ टावरा देखो। थी। वेन कासिम एक सुदृढ़ खान पात्रय कर पाम- डावरा (हि.पु. ) पुत्र, बेटा। रक्षा करने लगे। बहुत दिन तक खुद ए पाखिर डावरो (हिं. मी. ) कन्या, बेटो। .. एक दिन डाहिर स्वयं हाबोवे पोठ पर बुधवारते करते डाम (हि.पु.) चमारोंका एक यन्त्र । इससे वह चम विपक्षक तोरसे विड हो गये। उनके साथीने भो उस डे के भीतरका रूख सात करता है। समय एक जलते हुए पागके गोलेसे पाहत होकर वैगमे डासन (हि.पु. ) विशवन, विछौना, बिस्तर । निकटख नदीमें प्रवेश किया। सपति विपद में डासना (Eि क्रि०) फैलाना, बिछाना । समस्त सेना शिव भिव हो गई। इसके बाद राजाने घोड़े डासनो (हि.स्त्री०) चारपाई. पलंग, खाट । पर सवार हो कर अपनी सेनाको पुनः उत्साहित करने डाह (हि.स्त्रो०) . ष, जनन । पोर सुगालमें लामको बहुत पेष्टा को परसबम्यर्थई। डाहना (हिं० कि. ) दिक करना, सताना, अलाना। वे खयं युद्ध करके मारे गये। मिडरान नदी ददाहायके डाहिर देशपति - सिन्धप्रदेश के एक हिन्दू राजा। ममग्र मध्यवर्ती राबर दूर्ग के पास यह युग पा था। पराजित सिन्धुदेश, मुलतान और सिन्धुकूलवर्ती बहुत दूर तक मनान भाग कर राबर दूर्ग में पात्रय लिया। डाहिरके पुत्र प्रदेश इनके अधिकारमें था। इनके राजत्वमे पहले प्राबी जयमि' और विधवा गनी रानीबाईने दूर्गको रमाके लोग मिन्धुप्रदेश पर भाक्रमण कर लूट मचात सवा लिए जी जानसे कोशिश करनेको ठान लो । परन्तु स्त्रियों और बच्चोंको कैद कर ले जाते थे। डाहिरके डाहिरके विश्वस्त मन्त्रोने जयमिहको उम दुर्ग को छोड़ गजत्वकालमें उनके राज्य के अन्तर्गत देवल दरमें भर कर ब्राह्मणाबाद पाश्रय लेनेका परामर्थ दिया . बियोंका एक जहाज लूट गया था। अरबियोंकि उसको राबरका टुर्ग बेन कामिमके कों में श गया । दुर्ग- जतिपूर्ति के लिए दावा करने पर डाहिरने जवाब दिया - वासी राजपूत सेनाने जोवनको पाशा छोड़ कर शव को "देवल हमार रायके पन्तर्गत नहीं है, इसलिए के बीच भोषण वेगसे प्रवेश किया पोर युद्ध करते करते उसके लिए हम जिम्मेवार नहीं।" दम पर अरबियोंने प्राण त्याग किया। रानौने कई एक सन्तामों सहित पहले एकदल मेना भेजो, जो पराजित और निहत हो पनलमें प्रवेश किया। विजयी मुसलमान मनाने दुर्ग के गई। इसके बाद ७११०में बसोराके शासनकर्ताने बड़ी प्रस्त्रधारी पुरुष मात्रको मार डाला पोर नियों तथा भारी सेनाके साथ अपने भतीजे महमद बेन कासिमको बालकोंको केद कर लिया। इसके बाद मापद वैन डाहिरके विरुद्ध युद्धार्थ भेजा। बेन-कासिमने पा कर कासिमने ब्रामणवाद जय किया । जयसिंह पहलेमे हो पहले देवल पाक्रम और अधिकार किया। उसकारक्षणभार १५ सेनापतियोंको सुपुर्द करके हालो. पसको बाद महम्मद बैन कामिम हारा परिचालिम सर चले गये थे। विजयी परवी सेना निकन (वर्तमान हैदराबाद) पादि डाहिरको दो कन्यामोंने माता के साथ देखत्याग नहीं मगरीको जितने के लिए उत्तरको तरफ अग्रसर होने लगो। किया था। ये महमद वेन कासिम शायद हुई। मह- डारिने अपने बेठ पुत्र जयसिको बहुसख्यक मदने इन दोनोका' पलोभसामान्य मौन्दर्य देख कर बेनाके साथ भेजा। किन्तु इनमें पारस्थसे और भी लौकाको उपहार देनेवा विचार किया। दोनों खलीफा- २०.पवारोमो मनानेमाबर मासदन मासिमका बो तावालिक राजधानी दामस्वास नगरमें खलीफा