पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/११८

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११४ इसकी-उमरावं लिए पुनः पुनः प्रादेश दे रहे थे । यद्यपि इनका अभिः डुबवाना ( बि.) इबानका कामं किसी दूसरेसे प्राय दूसरा था, तथापि जपरवानोंक पदेिवसे डर कर कराना । १७५४ १०.४ प्रारम्भ ही उन्होंने मद्राजको सन्धिका बाना (Eि कि०) १ मग्न करना, गोता देना, पस्ताव भेज दिया । मद्राज-गवर्मे एटमे भी सन्धिके बोरना। २ नष्ट करना, सत्यानाश करमा, बरबाद प्रस्तावका अनुमोदन करके नियमादि खिर करनेक करना। लिए प्रतिनिधि भेज दिया। दोनों पक्ष प्रतिनिधियोंने दुबाव ( पु) माबनारको गहराई। कुछ दिन वादानवाद करके अपने अपने स्थानको डुबोना ( क्रि०) सोना देखा। प्रस्थान किया। डुब्बी (fe'स्त्री. ) डुबकी देखो। ___ फरामोसो इष्ट इण्डिया कम्पनोक डिरेकरगण इ.भकौरी (हि. स्त्रो०) एक प्रकारको बिमा तलो बगे। दुपसे अत्यन्त असष्ट थे। वे शान्ति चाहते थे न यापोठोको बनौहोतो. पोर इसोके झोलमें पकाई लोगों ने उनको अनुपयुक्त समझ कर मि० गडेह ( M. तथा ङबा कर रखो जाती है। Giorleheu)को पुदिचेरोका गवनर नियुत्ता करके उमई (हि स्त्री.) कारमें होनेवाला एक प्रकारका भेज दिया। गडहीने १७५४ ई०को शरीअगस्तको चावल। भारत पा कर इनसे शामनभार ग्रहण किया। इ.मरावं - १ शाहाबाद जिले के अन्तर्गत एक जमींदारी । इसके बाद दो महीने तक हुने पुंदिरी नगरमें रहे प्रायः ७५८ वर्ग मोल क्षेत्रफल ले कर यह संगठित थे। दो महीने तक उन्होंने अपने को कर्णाटकामयाब ममझ कर बड़े ठाट-बाटमे उमदा समदा पोशाक पहन ___ यहां इमराव के गजवंग रहते है। पंमार नामक कर भ्रमण किया था। राजपूत कुलोडव है। उनके पूर्व पुरुष उज्जयिनो नगरमें कुछ भो हो, उन्होंने फ्रान्स जा कर यथोपयुक्त वास करते थे, वहींसे भाार वे मध्यभारतमें रहने मम्मान नहीं पाया । इस देश में रह कर फगमोमो लगे। महाराज सिन्धोलमिहने मबसे पहले विहारमें गज्य के विस्तार के लिए उन्होंने अपनी निजी-मम्पत्ति घास किया। वे अपने पुत्र भोजसिहको राज्य शासन भो खर्च को थी। फरासोमी गवर्मण्टने उनको कुछ भी का भार सौंप गये। भोजसिंहके मामानुसार उनका हत्ति नहीं दो; सिर्फ उनके महाजनोंक हाथसे रिहाई- अधिक्षत जमपद भोजपुर नामसे विख्यात हुपा । काल- नामा ( Letter of protection ) का प्रचार करा कर चक्रसे यह राजवश कर एक शाखा प्रथाखायोंमें विभक्त उनको रक्षा की। उन्होंने अपने रुपये वसूल करने के हो गया। उनमें से प्रधान वंश अपने पूर्व पुरुषको राज. लिए न्यायालयका प्राश्रय लिया. किन्तु उसके फसलेसे पहले ही इनका देहान्त हो गया। धामी डुमराव में रहने लगे। एक शाखा बक्सर और डुग्ने अत्यन्त प्रतिभाशालो सुदन राजनीतिकुशमा दूसरो पाखा जगदीशपुरमें जा रहने लगौं । शासनकर्ता थे। ये अत्यन्त उच्चाकांक्षी, पहारी और सौ नशमें राजा नारायणमा उत्पब हुए। उन्होंने पराक्रमप्रिय व्यक्ति थे। चारिखको वास्तविक उबति पर. १५०५०म सम्बाट, जहाङ्गारस राजाका उपाधि प्रा इनका उतना ध्यान नहीं था। इन्होंने फरामोमी राज्य की। उनके बाद यथाक्रम वोरवरसाहि, रुद्रप्रतापसाहि, विस्तार के लिए सब तरह उपायों का अवलम्बन किया मान्धातासाहि, मोबिलसाहि, धारीसिंह पौर विक्रम- था. । भारतमें फरासोमी अधिकारके साथ उनके जित् सिंह राजाशासन कर मुगल बादशाहोंके प्रीति मामका चिर-सम्बन्ध है। भाजन हुए थे। पालमगौर, फरमणियर, महम्मदशाह डुबकी (हि.सी.) १ एम्बी, गोता, बुद्धको । २.एक पौर शासपातम्मे उस राजापोंने बहुतसो बागोर प्रकारको बिमा सलो बरी। यापीठोको बनी होती . पाई थी। . है। एक प्रकारका बटेर । १०४ अकबर मासमै पयोधाक नवाब ना