पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१२

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८ टेक (बॉक) सा, ऋ, ग, म, प, ध, नि । ( संगीततर०) १६ म्बान । १७ कोटेदार पेड़। इममें वेम या केथके बराबर फल लगते हैं। १८ टक्षणक्षार, सुहागा । १८ नियत मान वा बाट । इममे धातुको तौल कर टकमाल में पिकं बनाने के लिये देते हैं । २० मुद्रा, मिका । २१ २१ तोके बराबर मोतीको एक तोल । २२ घटनेमे म्ने कर गडी तकका अङ्ग, टाँग। २३ रजतमुद्रा । २४ पाषागाटारगा। टन ( तो)- १ राजपूताने के अन्तर्गत एकदेशीय राज्य । रसका थोड़ा भाग तो गजपूतान में और थोड़ा मध्यभारत में पडता है। राजपूतानेमें केवल यही एक राज्य मुमन्नमान राजामे शामित होता है । यह राज्य परम्पर विच्छिन्न विभागोंसे मंगठित है, यथा-राज- पूतान के टकर, अलीगढ़ रामपुर तथा मध्य भारतके निम्भर, पिग्वा, चपरा और मिगेज है। यह प्रक्षा २३५२ से २६ २८ उ० और देशा० ७४ १३ मे ७७ ५७ पू०में अवस्थित है। इमका क्षेत्रफल २५५३ वर्ग- मौन्न है, जिनमेसे १११४ राजपूतानम और १४३८ मध्य-भारतमें हैं। यहांका राजस्व प्रायः १२ लाख रुपये है। राज्यमें जहां तहां घनी झाड़ियोंमे ढके हुए छोटे छोटे पहाड़ देखे जाते हैं। चित्तौर नामक पहाड़ हो सबसे बड़ा है। इसकी ऊँचाई ममुद्रपृष्टमे लगभग १८८० फुट है। यों तो गज्यभर में अनेक नदियों प्रवा- हित है, पर बनाम और पावगे नटो हो मबसे बड़ो है। बाढ़के ममयमै ये दो नदिय बहत भोषणरूप धारण कर लेती है। १८७५ ई में उक्त नदिया जा बाढ़ पाई थी उमसे हजारों ग्राम तथा घर बह गधे थे. बहुतोंको जान चली गई थी। इन निवा मागो गेहद गम्भार, धेरच आदि भी कई एक कोटो नयाँ बहती हैं। यहां- काजलवायु शुष्क तया स्वास्थ्य कर है। टक्के अधिपति बोनर मम्प्रदायके पठान हैं । सम्राट महम्मदशाह गाजोके राजत्वकालमें तालखाँ नामक कोई पठान पपनो वासभूमि केशरको छोड़ कर रोहिलखण्डके संन्य विभागमें चले पाये। इनके पक्ष हेयतरोन माया- बादमें थोड़ी भूसम्पत्ति प्राल को । १७६८ में यतक पुत्र टकराज्यके स्थापनकर्ता विख्यात अमीरखाने जन्म प्रहमा किया। पामीरने सबसे पहले थोड़ेसे अनुचरोंको ले कर म निकत्ति पवलम्बन को। क्रमश: जब इनको शक्ति कुछ बढ़ी, तब १७८८ में उन्होंने यशवन्सराव होल- करके सेनापति हो कर सिन्धिया, पेशवा और अंगरेजी के विरुद्ध लड़ाई ठान दी। १८०६ में होलकरने मोरको टङ्ग राज्य दे कर उनसे अपना पिगड छुड़ाया। इसके बाद अमीरखाने पर- स्पर विवाद में प्रवृत्त जयपुर और जोधपुरके दोनों राजा. ओंको क्रमशः सहायता दे कर दोनोंका राज्य तहम नाम कर डाला। उनकी दुर्दान्त मैन्यने दोनोंका गज्य स्लटा । १८०८ में उन्होंने ४० हजार अवारोही लेकर नागपुरको भोर यात्रा को । रास्ते में २५ हजार पिण्हारी उनके दलम मिल गये। जब अंगरेज गवर्मण्टने उनको इम काम मे मना किया, तब उनके सेनादलने गजपूताना लोट कर लूट मार मचा दी। १५१७ ई० में मानिस आफ हेष्टि मने पिण्डारियोंको टमन करनेकी पच्छासे प्रमोरको होलकर-प्रदत्त राज्यम स्थापित करनेको विचारा और उन्ह मन्यटलकी लोटा देने के लिये आदेश किया। प्रतिवाद करना निष्फल ममझ कर अमोर सहमत हो गये। उनको अधिकांश युद्धसामग्री टिश सरकारने खरोद लो। अलीगढ़, गम- पुर विभाग और रामपुरदुर्ग उन्हें दे दिये गये । १८३५ ईमें अमीरको मृत्य, हुई। बाद उनके पुत्र वजीर महम्मदरखाँ तथा उनके बाद वजीर महम्मद के पुत्र महम्मद अलोखा टक्षके नवाब हुए। उन्होंने किसो मामन्त राजाके परिवारको अन्याय अत्या चार प्राश्रय दिया वा, उमामे अंगरेजने उन्हें राज्य च्य न कर उनके पुत्र महम्मद इब्राहिम अलोखों को नवाब के पद पर अभिषिक्त किया। उनका पूरा नाम प्रमोन उद-दौला वजोर उल मुल्क नवाब सर फोज महम्मद बाहोम अलोखॉ बहादुर सौलत अङ्गजी०मी०एस०पाई। जी०सो पाई है। नवाबको कर नहीं देना पड़ता। इन्हें १७ तोपको सलामो मिलती है। ये ८२ सोपें, २४७ गोलन्दाज सैन्य, ४४३ अवारोही पोर १.४६ पदा तिक सैन्य रखते हैं। इस राज्यमें ग्राम पौर महर मिला कर कुल १२८४