पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१२५

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बखा-कोयल जल्योम्यामों है। पत्थर तथा काठ। इस मगरको अवरोध किया । यहाँ एक पारसी परकी खुदाईका काम प्रचमनोय है। चाँदी सोने भो | डाकवर, टेलिग्राफ पाणित, कायगार, पखतास पोर कर पळ कारीगर । पालो वर्ना सर कस। . . यहाँक नरेशोंको उपाधि "गयरायां महाराणा .,धिराज महारावन यी १० श्रो..... बहादुर" पन्द्रा इंगपुर गायकी वंश-आलिका । तोपोंकी मलामी है और भाट साहबसे वापसोको मेवाड़ नरेश रसिक मुलाकात ( Return Visit) होती है । राजाको राज्यके पाभ्यन्तरिक प्रवन्धमें पूरा पधिकार है। राज्य क्षेमसिंह (रावल शाखा) (राणाशाखा ) यो अमात्य कार्यालय दरबारके अधीन है। भिव भिव विभाग एक एक अध्यनको देव रखमें है। राजकार्य सामन्तसिंह मेवाड तथागरपुर राजा) मेवाड़-(मंवत् ११३८ १२१६), को सुविधाके लिए स्वर्गीय मसागवन विजयसिंहजो डूंगरपुर-(संवत् १२३१ से १२७७की पूर्व) दो सभाएँ स्थापित कर गये। पहलो मभाका नाम सोहादेव (संवत् १९७७ से १२८१) "राजप्रवन्धकारिणी सभा" है। इसमें वह मुकदमा पेश किया जाता है, जो अमास्थ कार्यालयके अधिकारमे देवपालदेव (संवत् १२८१ से १३४३ के पूर्व ) बहार रहता है। दूमगे सभा "राम-सामनममा" बोरसिहदेव (संवत् १३४३ से १३७८) कहलाती है। इसमें बड़े बड़े फौजदारो और दोवानो भमुण्डी (भरतुण्ड) मुकदमें तथा दीवानो फौजदारीको अपोलें सुनो जातो हैं। नवोन कानून भी हमी सभासे पास होता है। डूंगरसिंह "राज शासनमभा" में केवल मेम्बर ही नहीं बैठते, मगर करमसिंह (करणसिह) कुछ असेसर भी बैठते हैं। राज्यको पामदमो दो लाख कामरदेव रुपयेको है, जिसमें से १७५००, र हटिश गवर्नमेण्टको देने पड़ते हैं। डगरपुर राज्य में अपना सिक्का नहीं पाती रावल (प्रतापसिंह) चलता। सब जगह अंगरेजी सिक का हो चलन है। गोपा रावल (गोपीनाथ) राजपूतानेके जेमा यहां भी जमीनके अनुसार माल. सोमदास गुजारो स्थिर की गई है। ___ राज्य में विद्याकी उतनी उबति नहीं है, किन्तु पहले याँगोरावल (गादेव) में पाजकल कुछ बढ़ोतरो पर है। भील लोगों के लिये उदयसिम खास एक स्कूल है। स्कूलके प्रसिरिता दो पस्पताम्न पृथ्वीराज हैं। शहर मफाई प्रादिके लिये म्युनिमपालिटो भी स्थापित है। पासवारण २ उता राज्यका एक शहर । यह पक्षा० २५५५७० और देणा० ७३४३ ३० उदयपुरसे १६ मील दक्षिण में कर्म सिंह प्रवखित है। सोकस स्या समभग 48।कहने है, कि १४वौं शताब्दीमें यह नमर महारावल बोरसिंहले पूजाराम । भोलादाइ गिरिया के नाम पर बसाया गया । बौं | गिरिधरलाल . म. सभागासीनाने माजासादादी अमीन .. . Vol. 18.81