पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१२६

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१२२ गिरिधरलाल खुमानसिंह इंगरसि-रेनमार्क गिरिधरलाल गरी (हि.सी.) शेटी पहाड़ी गा (हिं० पु०) १चम्मच, चमचा । २' लकड़ोका नाव. मरमिहजी असवन्तसिंहजी श्म गा। ३ रस का गोल लपेटा हुआ लच्छा । (जागीरदार मावलो) जुड़ा (हि. वि. ) जिमका सौंग टूट गया हो। खुमानसिंह इक (हि. स्त्री० ) एक प्रकारको बोमारो जो पापों के रामसिंह फेफड़ों में होती है। शिवसिंह डूबना (हिं क्रि० १ मग्न होना गोता खाना । २ सूर्य या किसी तारका छिप जाना । ३ सत्यानाश होना, चौपट वैरिणाल होना। ४ बुड़ जाना, मारा जाना । ५ कन्याका दरिद्र के फतहमिंह घरमें ब्याह होना । चिन्तनमें मग्न होना, अच्छी तरह असवन्तमिहरय ध्यान लगाना। ७ लीन होमा, लिप्त होना। इमा (हिं पु०) रूसको राजसभाका नाम । दलपतमिह इसी (हि. स्त्री० ) एक प्रकारको सरकारी जो उदयसिंह श्य ककडोकी तरह होती है। डेग (हि.पु. ) देग देखो। डेगची (हिं. स्त्री. ) देशची देखो। विजयमित डेढ़ (हि. वि. ) साईक, एक ओर प्राधा, जब किसो श्रोमान् महारावल लक्ष्मणसिंहजी निर्दिष्टमस्याके पूर्व इस शब्द का प्रयोग होता है, तब (वर्तमान नरेश) उस संख्याको एकाई मान कर उसके पकको योग गरसिंह --बीकानरके एक राजा। उनके पिताका नाम करनेका पभिप्राय होता है, जैसे डेढ़ सौ, डेढ़ हजार लालमिर था। ये पोष्यपुत्र हो कर बोकानेरके गजसि- इत्यादि। लेकिन दहाईके पागेके स्थानों को निर्दिष्ट हामन पर पाये थे। उनकी माबालगीमें मन्त्रिममाके द्वारा करनेवाली संख्याओं के साथ ही इस शब्दका प्रयोग राज्य का शासन चलाया जाता था। नाबालिगो दूर होने होता है, जैमे, सौ, हजार, लाख, करोड़ इत्यादि । पर भी मन्त्रिसभाके हो प्रधान राज्यशासनका इन्तजाम डेढखन (हि. स्त्री.) एक प्रकार की गोल खानी । रहा : मन् १८७५ ई० में अमरसिंहनामक एक सामन्सने डेखण्या (हि.प्र.)विना कलफीका तंबाक पीनेका नेचा। इनको विष देनेका प्रयत्न किया था। अतएव महाराजन डेढ़गोशी ( हि.पु.) एक बहुत छोटा और मजबूत उसे १२ वर्ष के लिये कारागार भिजवा दिया। मन् जहाज । १८७६ ई में ये हरिद्वार और गयातीर्थ करने गये थे। डेढा (हि. वि.) १ डेढ़ गुना। २ एक प्रकारका वहाँमे लोटते समय प्रिंस आफ वेल्स (सम्राट् एडवर्ड)- पहाड़ा। इसमें प्रत्येक संस्थाकी डेढ़गुनी संख्या बस. से पागरमें मिले थे। कर बढ़ा देनेके कारण सामन्त लाई जाती है। लोग इन पर बहुत असन्तुष्ट हो गये थे। अन्त में लड़ाई डेढो (स्त्रिी०) किसो वसका पाधा और अधिक देना। बिड़ हो गई। गवन मेण्टको सेना और महाराजको डेठिया ( पु.) दारजिलिंग, सिकिम और भूटान ' सेना दोनोंने बौदामर नामक दुर्ग पर पाक्रमण किया। पादिम मिलनेवाला एक प्रकारका उच । इसके पत्तोंसे पन्तमें सामनोने पात्मसमर्पण कर दिया। एक प्रकारको सुगन्ध निकलती है। गरफल (हि पु० ) बंदालका फल। यह बहुत बडा डेनमार्क-युरोपके उत्तरांशव एक छोटा राज्य। यह होता है और सरदौमें घोड़ों को खिलाया जाता है। पचा. ५४.३३ से ५७४।७.. और देया०८४५४