पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१३२

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१२८ मेरा गालीखों पहाड़का अपरो भागबहन ठंडा रहता है। दुसरा यूरो राज्य करते थे। विश्नों के लिये बहुत मनोरम है। यहां ८२ गिरिसकट आधिपत्य विस्तार किया था। किन्तु परिममावासो हैं जिनमें से सजा, सखोसार चाचर, कहा और पार्वतीय बल चो जातिके पाक्रामणसे उनका अधिकार मोरो प्रधान हैं। बहुत कुछ डास हो गया। बलूचियोंमें मासिक मोहरब . मिन्ध नदीम जब बाढ़ पातो है, तो पूर्वाशका कोई हो प्रधान थे । बाद सरदार हाजो खाँ बहुत बढ़ चढ़ कोई स्थान डूब जाता है। जो जो ग्राम जलनावित होते गये। इनके पुत्र गाजीखाने १५वौं शताब्दी में अपने है, वहां दलदल जम जानेसे जमोन उर्वरा हो जातो नाम पर पहर और जिसका नाम रखा। तभोसे उग- । कभी कभी सिन्धु नदमें भारोबाठ पा जातो है। गाजीखाँ नाम प्रचलित है । उस बन्न चो लोग मुलतानके १८३३ और १८४१ में जब भीषण बाढ़ पाई थो, तब राजाके अधोग सामन्तों में गिने जाते थे। क्रमशः वे अपने मिन्धु नदोका जम्न २० फुट ऊपर उठ कर ६ कोस तकको दलको मजबूत कर दो वर्ष के बाद डेराजातके वधोन जमोनको इबाता हुआ शायद उपत्यका तक पा गया राजा हो गये। इसी वंशके १८ राजाओंने डेराजारा पर था । १८५६० के प्लावनसे डेरा गाजोखाँका सेनानिवास राज्य किया पोर उनके उत्तराधिकारियोंने हाजी भोर बह गया था। गाजोखाँकी उपाधि धारण की। अकबर के समयमें खनिजद्रव्यों में यहां पहाड़ पर लोहा, तांबा और गाजोखाँके वशने नाममात्र मुगल साम्बाज्यको पोशा मिलता है। पच्छ कोयले भो पाए जाते हैं। धोनता स्वीकार को। यद्यपि इन लोगोंका राज्य जिलेके दक्षिणभागमें फिटकरी निकाली जाती है। इस समय भी जागोरमें गिना जाता था और उन्हें कुछ पहाड़ पर मुलतानी नामको एक प्रकारको महो पाई कुछ कर भी देने पड़ते थे. तो भी एक तरहसे वे जातो है जो पौषध बनानेके काममें पाती है और साबन- सम्म ण स्वाधीनता भोग करते थे। दक्षिणधर्म नाहोरीने के बदले व्यवहत होती है। यहां खार नामक एक १२वौं शताब्दी तक अपनो स्वाधीनता बचाये रखी थी। प्रकारका पेड़ है जिसे जला कर सज्जो प्रस्तुत होती है। मुगलोंको प्रवनतिके समय १७३८ में सिन्धुनदीका सिन्धनावित भूमिमें मूज नामकी काफो उगतो है। पश्चिम कूलवी प्रदेश नादिरगाह दुरानीके अधिकार में अङ्गालो परामों में बाघ, हिरण, सूपर, गदहा पोर तरह पाया। इस समय गाजोखाँ दुरानोको अधीनता स्त्रोकार तरह से पक्षो तथा कबूतर पाये जाते हैं। कर पैबक प्रधिकार निर्विवादसे भोग करने लगे। उन. इतिहास-पहले इस जिले में केवल हिन्दूजातिका को मृत्यु के बाद कोई उत्तराधिकारी नहीं रहनसे यह वाम तथा हिन्दराजत्व था। जिलेके पनेक नगरोंमें जिला पुन: थोड़े समयके लिये नाममात्र मुखतानमें मिला आज भी हिन्दूराजापोंके कोर्तिकलाप वणित हुआ दिया गया । इस समय कसहोरा राजापोंने इस जिलेको करते हैं। यहाँके हिन्दू राजामोंमें वोरवर रसाल का अपने अधिकार में कर लिया, किन्तु १७७० में महमूद नाम बहुत मशहर है। रसाल देखो। . . गुजर नामक पहमदशाह दुरातीके अधीनसा एक भासन . सहर तथा दूसरे दूसरे स्थानों में मुसलमान पाक्रमण वत्ताने इसे उतार किया। उन्होंने यबसे इस जिले में कई को.पूर्ववर्ती प्राचीन कोर्तियाँके भनेक सावशेष देखे जगह कुएँ और नहर काटी गई, जिससे षिकार्यको जाते हैं। ७२ ई० में मुम्लतानके साथ साथ या जिला पच्छो सुविधा हो गई है। दुरानो राजाबो पत्रोन परब-बिजेता मरम्पद बन कासिमके हाथ लगा। मुसल यहाँ कई एक व्यशियोंने यथासम सासनवार्य लिया। मनि राजस्वकालमें इस जिले की पाय राजपरिवारको पोछे बलूची जातिय पन्तर्विद्रोले या.खान बोनष्ट इत्ति रूपमें दी जाती थी। प्राय: १४५०१० में तत्कालीन पोर उत्सब हो गया। . , , नवादी पारमोय लोदीव शके माहिरोका प्रभाव बहस.. इस समय नारंपादि बरसो गई, अषिकर्म बढ़ावा वित मोर सोसपुर अवलमें स्वाधीनभावसे उठ गया और प्रजा दुर्दमासोकोपनियमिक ,