पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१३३

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पन्य विनिला लाहोर दरबार पोन शिक्षा-विभागमें वार्षिक १४... आय हो । हुपा। १८९ मैं रणजिमिहने अपना पाधिपत्य स्खल सिवा यहां कर एका पताल और पोषधालय सिन्धुनद तक फमा लिया। यहां तक कि म जिलेका भो। जिले में पांच पार लगी ,डेरा गाजोखो, दक्षिणीय भाग भो उनके हाथ मा गया। बहवमपुर के दजल, नोमहरा, यमपुर, राजमपुर घोर मिषनकोट । नवाब सादिक मुहम्मदखाने लाहोर दरबार में कछ वार्षिक २ मा जिलेकी एक तहमोल। यावा. २८३४ से कर दे कर ये मध नवीन अधिक्षत प्रदेश बतौर जागोरके, ३०.३१४० चौर देशा० ७.१० से ०.५४ पू में षय. ले निये। १८२०१०में नवाबने इसके उत्तरीय भाग खित है। भूपरिमाण १४५७ वर्ग मोल चोर बोकसंखा पर भो धावा माग । १८३२ ईमें मारा जिला मुलतान पायः १८१७४४ है। इसके पूर्व में सिन्धु नद और के मावनमलके हाथ पा गया। हितोय सिख युद्ध तक पविममें खाधोन राज्य है। यहां एकमाय पोर फोर्ट मावनमल के लड़के मूलराजका इम पर अधिकार रहा। मुनरो नामक पर्वतमा क्रमशः ७४५२ और 4.. बाद जब समूचा पञ्जाब हटिश गवर्मेण्टके शामनाधीन फुट समुद्रपृष्ठसे । सो सहसोलमें इसी नामका हुघा, तब यह जिला भो उसोके माथ माथ हटिशके एक शहर और २१५ ग्राम लगी है। दखलमें पा गया। जबसे यह जिला अग्रेजों के अधीन ३ ला तहसोलका एक प्रधान शार। यह पचा. पाया है, तभीसे इसको उबमि दिन दूनो और रात ३.३ उ०और देशा० ७.४७ पू. पर सिन्धु नदके चौगुनो होने लगी है। किनारे पर पवलित है। लोकसखा प्रायः २३०११। जिनकी चैतो फमल गेह हो प्रधान है। इसके अलावा १४७५१०में गाजोखा मिरानी नामक किसी बलूची- जना, पोस्त, तमाकू, धान, कई और मोलको उपज भी ने यह नगर स्थापित किया था। नगर के पूर्व वस्तूरो कम नहीं होती। यहां कम्बल, गलोचा, जौन तथा नामको नहर है। जिसके दोनों बगल धने पाम के जंगल पोर दूसरे दूसरे प्रकारके पशमके कपड़े तैयार होते हैं। हैं, बोच बीचम पनिक घाट भो । घोषवालमें बहुत- रेशमकी बुनावट भी यहांको अच्छी होती है। यहां जो से लोग यहां मान करने पति ।। नगरके अपर एक हाथो दाँतको चुड़ियों बनती है, वह सब जिलोंसे बढ़ बहुत ऊँचा बाँध है जो १८५८ में बाढ़से नगरको बचानके लिये तैयार किया गया है। पहले यहां गाजी. कर होतो है । इम जिले से गेह, बाजरा, नौल, पफोम, खाँका उद्यान था। अभी वहां पदालत है पोर प्राचीन रूई, चमड़ा और तेलहन करांची और मुलतान भेजा दुर्ग में सहसोलजी कचहरी और पुलिस कार्यालय है। जाता है तथा वहाँसे गेह, चना, नमक, दलहन, चीनो, इसके पक्षावा यहां टाउनहाल, विद्यालय, पोवधालय, चमडे और लोहेको बामदनी होती है। डाकघर पादिबोच बीच में अनेक ममनिट भो देखने- इम जिले में रेल नहीं गई है। लोग जहाज तथा में प्रातौ । नमें गाजोखा, पबदुल जबार पौर माव हारा वर्षाऋतु में नदी पार होते हैं। २८ मोल चूताखाँको मसजिद प्रसिह। सिखों पाविपत्यकालम सकपको सड़क पौर ६६० मोल तक बच्ची सड़क गई उक्त तीनों मसजिदें सिखोंक उपासना-सहक रूप में गिनो है। सखी सरवर नामको पक्को सड़क ही सबसे बड़ी जाती थी। यहां प्राचीन हिन्दू देवमन्दिर पौर दो मुसल- तथा मशहर है। शासनकाय को सुविधा लिये यह मान साधुओंको समाधिया। निला चार तहसीलों में विभक्त किया गया है, उरा सहरसे नोल, प्रफोम, खजूर, गड, कपास, कांगमो, गाजोखा, राजनपुर पौर सङ्गढ़। एक तहसील तहः | घो, चमड़े प्रादिको रफतनी और दूसरे दूसरे देयोंसे । सौलदार पौर नायब तहसीलदारके अधीन है। डिपटी चौनी, काबुलके तरह तराके फल, विलायतो कपड़े, कमिवर फौजदारो मामले का विचार करत पोर | धात नमक तथा गरम मचालेकी पामदमो होतो है। लिमिनदीवानोका। इन दोनों अपर मुलतान विसी समय यहा रशम पोर या कारवार था, अब सिविल डिविन डिविजनल । प्रायःमक बराबर है। Vol.IX.33