पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१३४

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१३० ग गोपीपुर-डेरापुर . प्रोमकान में नारके किनारे महाहमें दो बार हाट का पश्चिमीय प्रदेश स्तगत कर लिया और मिरानीका नगतो है। शान्तिरक्षाके लिये यहाँक किले में एक दल सारा खस्व जाता रहा। वाद की एक राजाघोंने इस अश्वा गेहो पोर दो दन्न पदातिक रही है। १८६७ १०में पर एक एक कर पानामण किया सहो, लेकिन कोई यहाँ म्य निमपालिटो कायम हुई है। यहाँ ऐकलो वर्ना- अधिक दिन तक ठहर न सके । कालकमसे हरबर्ट एड क्य नर हाई स्कन और एक अस्पताल है। वर्ड के यवसे यह विभाग १८४८ में सदा के लिये चंग डरा गोपीपर पसाबक कागड़ा जिलेको एक तहमोल। रेजोंके हाथमें पा गया। यह अना० ३१ ४० से ३:१३ उ० पौर देशा• ७५ डेग नानक-पनाबक गुरदासपुर जिले के अन्तर्गत बताला ५५ मे ७६३२ पूछमें अवस्थित है। भूपरिमाण ५१५ सहसोलका एका नगर । यह प्रमा० ३२२३. और वर्ग मोम और लोकमख्या लगभग १२५५३६ है। इममें देशा० ७५७ पू० पर रावी नदीके दक्षिण किनारे पव कुल १४५ ग्राम लगते है। यहांकी पाय लगभग दो स्थित है। लोकमख्या प्राय: ५११८ है। बह गुरदासपुर लाख रुपयकी है। शहरसे २२ मोलकी दूरी पर अवस्थित है। डराजात-पत्राब प्रदेश के अन्तर्गत एक कमिश्नरके प्रधान इस नगरके निकट दूसरी तरफ परेवाको ग्राममें एक विभाग। यह पक्षा. २८३० मे ३४१५ उ. और सिखोंक प्रादिगुरु नानक रहते थे और उसी ग्राममें उनकी देशा० ६८१५ मे ७२ पृ०में अवस्थित है। इसके पन्त- मृत्यु भी हुई। उनके वंशधर वेदीगण बराबर उस ग्राम- गत डेरा इम्मारम्नवा, डेग फतवा और डेरा गाजी में रहते थे, किन्तु जब वह ग्राम रावतो नदीसे कट खा ये सीन जिले है। यह उपविभाग उत्तरमें शेख गया, तब वे नदी पार कर गये और वहाँ उनहोंने एक बदिम प्रहार और दक्षिणा में जामपर शार तक विस्तृत नया नगर बसाया जिसका नाम अपने आदिपुरुष नामक है । भकी लम्बाई ३२५ मीन भोर चौड़ाई ५० मोल के नाम पर डेरा नामक रखा। तभीमे या नगर सिखोक है ! १८४८ में यह विभाग अंगरेजोंके हाथ में पाया। निकट बहुत पवित्र माना जाता है। बाबा नानक १५वो शताब्दीमें यह विभाग बग्न चके शामनाधोन स्मरणार्थ यहां एक सुन्दर मन्दिर बनाया गया है जिम था । मुलतानके लङ्गाधिपति सुलतान हुसेनने जब दे.. दरबार सारव कहते हैं। शहरमें मानकके वंशधर हो कि मिन्धुप्रदेशका अधिकार उनके हाथमें अब रहनेको प्रधान है। नौ है, मब उनीने बल च-सेनापोको बुलाया और एक ममय यहाँ वाणिज्यव्यापार खूब जोर था। रेल मलिक सोराबको वे सब प्रदेश जागौर में दे दिये सोह हो जानेसे व्यवसाय कुछ कम गया है। तो भो यहाँका राजके लड़के इस्माइल और फतेहखाने अपने अपने नाम शास प्रस्तुत करनेका व्यवसाय बाज भो प्रसिद्ध है। यहां- पर दो डेरा अर्थात् वासस्थान स्थापित किये। इधर से कपास पौर चौनीकी रफतनी अधिक होती है। रावो हाजोग्या जो बन चके प्राचीन मिरानो वश प्रधान थे नदोको बाढ़से नगरके विशेष अनिष्ट होनेको सम्भावना पौर नजाके दरबार में नौकरी करते थे, सुलतान हुसेनके रहती थी, रमोसे वहां एक बाँध दे दिया गया है। हम पोते महमूद के शासनकाल में स्वतन्त्र हो गये। उन्होंने पर भो मन्दिर पौर नगर भूगर्भ यायो हो जानेकी अपने लड़के के नाम पर एक शहर बसाया जिसका नाम पाया सदा बनी रहती। अंग गाजोखा रखा गया । १५२६१०में बाबर के उत्त- यहाँ थाना, अंगरेजी पोर देशोभाषा सिखाने रोय भारत पर चढ़ाई के ममय मिरानोने उनकी अधी. विद्यालय, पोषधामय पादि। १८७१.में यहां नता स्वीकार कर ली। बाबरके मरने पर उनके लड़के म्युनिसपालिटी खापित हुई। कामरानने, जो काबुल के शासक थे. उरामात पर अपना डेरापुर-१ बुलादपक कानपुर जिलको एक तहसील। अधिकार जमाया। फिर हुमायूं ने इसका पूरा अधिकार यह पक्षा• २६२० मे २६३७७. और देशा०. ७ मिरानीको दे दिया। १७३८ में नादिरशाहने सिन्ध-२४ ७४ पूरी बखित है। भूपरिमाव ३.८