पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१३९

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होमः मृतको तामा बसे पब और मय हम करते है। ये पर, घोड़ीहत्तस, मूसे रत्वादिका मांस है। दिन तक कोई मछली या मांस नहीं लाता। खाते हैं। किसी किसी देयके डोमोमें गोमांस भी प्रच. १०३ दिन सूपरका मांस खा कर और मध पो कर उत्सव लित है। करते हैं। पश्चिम बङ्गाल और बिहार प्रदेश में डोम प्रायः डोम धोबीका कुमाएपा द्रव्य नहीं पाता है। इस मृतका भन्निसत्कार ही करते हैं। लेकिन जो वास्त सम्बन्धमें एक गल्प इस तर -एक दिम डोमोका प्रभृति रोगसे अथवा तोल वर्ष से कम अवस्थामें मरता है प्रादिपुरुष सुपत मला प्रत्यक्ष कान्त पोर उधास हो उसे गाड़ दिया जाता है। वहाँ स्थान खान पर ११२ दूर देशसे घरकी पोर पा रहा था। रास्ते में उसने एक १२वें या १३वें दिनमें मृतका थाह होता है। धोबीको गदहेकी पोठ पर बहुतसे कपड़े सादकरले समस्त हिन्दू डोमोको अत्यन्त घृणा और भयसे देखते जाते देखा तथा उससे कुछ खाद्यपदार्थ पोर घोड़ा. जल हैं। उनका पाचार-व्यवहार तथा खाद्य प्रभृति एसा मांगा। धोबोने उसे कुछ भी दिया। इस पर दोनों जघन्य है कि हिन्दू उनको छाया स्पर्श करनेसे भी गालियोंको बौछार होने लगी। पन्तमें उसने धोबी- अपनको अपवित्र समझते हैं। फिर भी उनका काम को मार कर भगा दिया पोर उसके गदहको उसी जगह रामा वृषस है जिसमे माल म पड़ता है कि वे दया- मार कर मांस खा लिया। बुधा निहत्त होने पर गई। मायासे रहित हैं। इनका मधदोष पोर चरित्रदोष अत्यन्त को हत्या पर उसे बहत दुःख इमा। धोबी होस प्रवल है। ये जो कुछ उपार्जन करते हैं उसे मद्य पापका मूल है ऐसा सोच कर यह धोबी जातिको अत्यन्त इत्यादिमें व्यय कर डालते हैं। भविषात्के लिए ये कुछ णादृष्टिसे देखने लगा। उसो समयसे कोई डोम भी बचा कर न रखते। ऐसा प्रवाद है, कि ढाकाके धोबीके घर अथवा उसका स्पर्श किया हुपा पदार्थ किसी नवाबने जमादका काम करने के लिये एक डोम. भक्षण नहीं करता है। वोरभूमधामी पररिया तथा को मंगाया था। ढाकाके डोम उसोके वंशज हैं। विसमलिया डोम न तो घोड़े पकड़ते और न कृती फॉसौदण्डात्रा कार्य में परिणत करनेके लिये प्राय: मारते हैं। वे लोग गड़ामे में काठका सत्या लगाते। प्रति निम्न में एक डोम नियुक्त है। जब दण्डित मनुषा- उस देशके डोम कुत्ते को तो नहीं मारत मगर सर को फांसी दो जाती है तब वह डोम दुहाई महाराणो शहरके डोम कुत्ते को मार कर पर्थ उपार्जन करते है। या टुहाई जज साहब कह कर चिलाता है। वह सूप. टोकरे प्रभृति प्रस्तुत करना हो डोमोका सोचता है कि, ऐसा करनेसे ही वह पापसे मुक्त हो जातिगत व्यवसाय है। किन्तु इन लोगोंमें पब बात हो जायगा। कृषिकार्य में लग गये है। इनके रैयतो सत्व नहीं है। डोम श्मशानघाट बहुत माफ सुथरा रखता है। क्योंकि ये प्रायः स्थान परिवर्तन किया करते. मानः डोमों की सहायताकै बिमा काशीमें मृतदेह सत्कारमें भूम जिले के दक्षिणायम शिवोत्तर डोमोंका पधिकारमुक्त विशेष सुविधा होती है। ये पहले चिता मना देते है। बजुनिया डोम विवाहकान में बाजे बजात चोर पौर तब पम्मि, पयाल तथा काष्ठ प्रभृति ला देते हैं। स्त्रियां गानवाघ क्यिा करती है। किसो किमौके मतो इस कार्य के लिए वे मृतव्यक्तिक पानीय अवस्थानु- चोर्य वत्ति ही चम्पारनके मया डोमौका व्यवसाय है। सार कुछ द्रव्य से है। कलकत्ता प्रभृति स्थानों के इस श्रेणोके डोम अधिक दिन एक स्थान पर नहीं प्रमशानघाटमें बहुतसे डोम नियुक्त है। रहते। ये किमी शेटे ग्राममें रास्त के निकट सिरको . सभी डोम स्मयानघाटको कामों में लगे नहीं रहते, बाधते भोर वहौंसे चोरो करनेके लिये रघर.धर परन्तु मृतदेह सखारके पहले और परिका.जो काम है निकल पड़ते है। मध या डोममें सबके सब चोर नहीं उसे ये लोग अपना जातोय पणा अवश्य मानते है। होते। गयावासो सङ्ख्या बाँस और षिकार्य द्वारा काल- पाप सम्बन्ध एन लोगों में कोई रोक टोक नहीं क्षेपण करते..। . .