पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१४७

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सका ले कर धलेश्वरी और लामा नदोके संगमस्थल तकको काष्ठादिसे भी प्रामदनी थोड़ोलो होतो है । परागाह भो भूमि पक्षमय और उर्वरा है। पूर्वोत्तर खण्ड लाक्षा अधिक नहीं है। नदियोंसे प्रति वर्ष बहुतसी मछलिया और मेघना नदीका मध्यवर्ती तथा अधिकांश पसमय है। पकड़ी जाती है। प्रतएव पश्चिमस्थ खण्डको अपेक्षा इमके लषिकायको ढाका बहुत दिनों तक मुसलमानोंको राजधानी अवस्था बहुत अच्छी है। इसके अनेक स्थान बाढसे रहने के कारण अन्यान्य स्थानों की अपेक्षा इस समय यहाँ खुब जाते है। धलेखरी नदीका दक्षिणस्थ विभाग री मुसलमान पधिवामियों की संख्या बहुत ज्यादा है। जिले में सबसे अधिक उबग है। यह विस्तीर्ण समतल लोकसंख्या प्राय: २६४८५२२ है। भूभाग वर्षाकालमें २ फुटसे १४ फुट पर्यन्त बाढ़ के अन्न- ढाका जिलेको पावहवा और खेती पादिको सुविधा से डूब जाता है। इस समय यह स्थान एक प्रशस्त को होने तथा पाटका व्यवसाय खुल जानसे यहाँको जन- नाई दोग्यता है । वर्षाकालमें समस्त भूभाग हगभरा संख्या क्रमश: बढ़ती जाती है । यहांके मुसलमान प्रायः माल म पड़ता है। बीच बीच में कृत्रिम अंची भूमि पर अधिकांश मेख सम्प्रदायक है। मै यद, मुगल और पठानों ग्राम बसे हुए हैं। अधिवासिगण छोटो छोटो नार्क को सख्या उमको अपेक्षा बहुत थोड़ो है। हिन्दुनों में हारा इन क्षेत्रों के मध्य हो कर इधर उधर जाते आते ब्राह्मण, कायस्थ, वैद्य, बताई अर्थात् स वधर, सम्बोली, हैं। अभी यहाँ स्थान स्थान पर पाट मन प्रादिको बनिया, ग्वाला, धोबी नापित. कुम्हार, लोहार, मलाह, खेती होती है। ताँतो, संडी इत्यादि प्रधान है। चण्डाल और कोच __ इस जिले में नदियों को मख्या अधिक है। वर्ष भर ___जाति भी हिन्दू धर्म स्वीकार करतो है। इनकी संख्या जनपथ हो कर हो लोग अधिकांश स्थल जाते अति भो थोड़ी नहीं है। जातिभ्रष्ट अनेक हिन्द वैष्णव- हैं । पद्मा, मेघना और यमुना इन तोन नदियों के प्रति- सम्प्रदाय के कहे जाते हैं । इम सम्प्रदायको लोकसखा रिक्त आरियालखां, कीप्ति नाशा, धन्लेश्वरो, बूढीगङ्गा, कम नहीं है। अधिकांश नोच जातिके लोग पहले लाक्षा. मेदोखाली पोर गाजीखाली नामक ७ नदियों- मुसलमान अयवा ईसाई धर्म में दीक्षित हुये थे। प्रध. में भी बड़ी बड़ी नावे आ जा सकती हैं। इनका शिष्ट लोग अपनेको निम्नश्रेणीके बतलाते है। ढाकाके अधिकांश गङ्गाका या ब्रह्मपुत्रको शाखाका अथवा ईसाई सम्प्रदायको उत्पत्ति भिन्न प्रकारको है। वे लोग प्राचीन परित्यक्त नदीका गर्भ है। भाज भी जिलके पोनं गोज, पाम गोय, ग्रीक, यूरोपीय पथवा देशीय ईसा. दक्षिणखगड़ में समस्त नदियों का गर्भ बाढ़ के समय योंके वशधर है। फिरनी अर्थात् पोर्तुगीज ईसाई परिवर्तित हो जाता है। अपेक्षाकृत छोटो नदियों में देशियों मिश्रणसे उत्पन्न है। ईमाई जिलेके अनेक हिल्सामारी, बाँसो, तुराग, टुङ्गो, बाल ओर ब्रह्मपुत्रके स्थानों में छोटे छोटे दल बांध कर निवास करते हैं तथा प्राचीन स्रोत प्रधान है। इन नदियों में ज्वारका प्रभाव कृषि पादिक हारा जीविकानिर्वाह करते है। ये लोग लक्षित होता है। ढाकाके निकटस्थ बूढीगङ्गाको ज्वार गोया नगरके प्रधान पादरी साहबको अपना प्रधान २ फुट पर्यन्स अपर उठती है। अनेक स्थानों में नदोके गुरु मानते हैं। हट जानसे विस्तीर्ण झील बन गई है। एक नदोसे दूसरो निम्नलिखित सात नगरों में ५ सहस्रसे अधिक मनुष्य नदो में जानके लिये अनेक नहरें खोदी गई हैं। जिन निवास करते है। यथा १ ढाका, २ नारायणगन, को सभी नदियो उत्तर-पश्चिमसे दक्षिण-पूर्व को ओर मदनगन्ज, ३ माणिकगत, ४ चरजजिरा, ५ शोणगढ़, बहती हुई प्रान्सभागमें गङ्गा और मेघनाक सङ्गमः कमारगांव तथा ७ नरिसा ये ही सात नगर है।. खलके निकट उसके साथ मिल गई। उनसे प्रथमोत तीन नगरीमें म्युनिसपालिटी है। ढाका अकुछ जलज और जङ्गली उद्भिदको छोड़ कर यहां विशेष नगरमें जिलेका सदर है जो लामा नदीक परस्पर प्रसारके फल पुष्यादि उत्पब नहीं होते। जालींके विपरीत तोर पर अवस्थित है। नारायणगापोर मदन-