पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१५५

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थी, किन्तु १८६२ में लोकसंख्या केवल १८२१२ रह 'मित्रजीका जन्मखोन और उनका पिनालय है। उपेन्द्र गई । १८८१ में इनकी संख्या ७९.७६ यो । रेल तथा मियजोका वास भवन हो अभी वैशवतोथ रूपमें वाणिज्यकी वृद्धि हो जानसे दिनों दिन यहाँको लोक- परिगणित हा प्रति वर्ष बहुत से वरस सोय संख्या कुछ कुछ बढ़ रही है। किन्तु फिर भी यह शहर को देखने के लिये पाते। कभी पूर्व-गौरव पा सकेगा, यह पाशा दुरामा मात्र है। प्रायः साढ़े चार सौ वर्ष के प्राचीन चेतन्योदया. सम्पति ढाकेको मलमलका थोड़ा बहुत पादर होता वलो तया परवी मनःसन्तोषियो प्रन्योम रस तोयं को है। थोड़े तातो धनकुवेरके उत्साहसे अत्यन्त सुन्दर और उत्पत्ति और माहात्मा इस तरह लिखा- सुक्ष्म मलमल प्रस्तुत करते हैं। अब ढाकामें युनिवामिटि ढाका दक्षिण, उपेन्द्रमित्रके पुत्र जगबाथमिश्रका प्रतिष्ठित हुई है। वास था । जगवाथ नवहोपमें पढ़ते थे । नवदीपक नीला. ढाका नगरका प्रवस्थान वाणिज्य के पक्षमें बहुत हो म्बर चक्रवर्तीको लड़की शचोदेवो के साथ उनका विवार सुविधाजनक है। गङ्गा, यमुना पोर मेघना इन तोन हुआ। विवाह के बाद वे नवहोपमें रहने लगे। कुछ दिनके बड़ी नदियोंसे यह अधिक दूर नहीं पड़ता है। मदनगञ्ज बाद वे मपरिवार विदर्शनके लिये यहाँ पाये। यहां और नारायणगञ्जको ढाका बन्दर कह मकते हैं। इस शचीको गर्भ रहा, रमो गर्भ की मन्तान योचतन्यदेव का वाणिज्य पटना छोड़ कर बङ्गाल के अन्यान्य मभ थे। गर्भावस्था में शोको लेकर जगनाथ पुन: गवाहोप. मध्यवर्ती नगरों से अधिक है। यहाँ के प्रधान वाणिजा- की लौट पाये। पानिके पहले बचोसे उनको मासने द्रव्य-चावल, पाट, तिल, सरसों, चमड़ा ओर वस्त्रादि अनुरोध किया था, कि पुत्र जन्म लेने पर उसे एक बार हैं। ढाकाके माँझो बङ्गाल के सभी मॉझियों में श्रेष्ठ गिने ढाकादक्षिणमें भेज देना। जाते हैं। यथासमय मासका अनुरोध शचोदेवोने अपने पुत्र ढाका नगरको जलवायु अत्यन्त खराब थी। वर्षा- कह सुनाया था, किन्तु गौराज मंन्यासके पहले बोहर. कालमें चागें पोर जलमग्न हो जानसे अनेक रोग उत्पब में पा न सके। सन्यामके माद १४२१ सौ वे बीमक होते थे। अभी विशुद्ध जलपारिको सुविधा हो जानसे ढाकादक्षिण में आये। ढाका पहलेसे स्वास्थ्यकर हो गया है। यहाँका सेन्ट्रल पूर्वोक्ता दोनों ग्रन्वोंमें लिखा है, किसान अपने कारागार पूर्वीय बङ्गाल में सबसे बड़ा है, जिसमें प्रायः पौत्रके सामने पनेक तरहको कथा-वार्ताक साथ अपने ११५३ कैदी रखे जाते है । १८५८ में मिटफोर्ड अस्प- पारिवारिक सुख-दुःखको बाते भो कही थी। इस पर ताल स्थापित हुपा। इसके सिवा यहाँ ले डो डफरिन चैतन्यने उन्हें दो मूत्तियाँ दो, एक बोकणमूति पोर जनाना अस्पताल और पागलखाना है। दूसरी पपनो। मृत्ति को दे कर चैतन्यदेव पले गये, ढाकादक्षिण-श्रोह जिलेके अन्तर्गत एक परगना । इस किन्तु पाव का विषय था, किन दोनों मूर्तियोंके परगनेके मध्यमें हो स्वनामख्यात 'ढाकादक्षिण' ग्राम प्रभावसे वह ग्राम हरिभक हो गया-विवादो कोई है। यह बोहटके मध्य एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान में गिना भी न रहा तथा इन दोनों मूर्तियों के प्रभावसे मित्र- जाता है और गुमवन्दावन नामसे मशहूर है। यह वंशका पारिवारिक प्रभाव जाता रहा। पाज भी अचा. २४.४८ और देशा० ८२१० पू० में अवस्थित है मूर्ति पूजाके सिवा मित्रवधको पोर कोई दूसरी यह पाम बीपहरसे सात कोस दूर दक्षिण-पूर्व जोविका नहीं है। उत्सव धादिके उपलक्षम यहाँ जो कोनमें अवस्थित है। शहरसे ढाकादक्षिण तक एक पक्को पामदनो होतो है, उससे एक वंश (१८ घर बामण)- सड़क गई है। ढाकादक्षिण एक समृयालो बड़ा ग्राम का भरण-पोषण होता है। है। यहाँ कई बजार बामण कायख रत्यादि वास करते हैं। उपेन्द्रमिश्वका मकान जहाँ दोनों मूर्तियाँ विद्यमान 'या ढाकादक्षिण बीचैतन्यदेवके पिता जगनाथ- अभी 'गकुरबाड़ी' मामले प्रसिद्ध है। इस ठाकुर..