पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१५८

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दुरिगण-कली . २ जातकपदसि नामक जोतिग्रन्धकार। ३ मामा- : ढलकाना (हि. वि. ) लुढ़काना, सरकाना । दिनिर्णय नामक संस्कृत ग्रन्य के रचयिता । ४ एक मजन टुलना (Eि क्रि०) १ गिर कर बहना २ । लुढ़कना. शास्त्रानुराग राजा। इन्हींके उत्साहसे विखनाथभट्टने फिमल पड़ना । ३ प्रवृत्त होना, भकना। ४ प्रमत्र होना, विख्यात 'ढ गिटप्रताप" नामक एक वृहत् स्मृतिनिबन्ध । खुश करना। ५ शिलना, डोलना । प्रकाश किया है। दलवाई (रि'. स्त्रो०) १ ढोनका काम। २ ठानेको दण्टिगज एक विग्यान ज्योतिर्विद। ये पार्थ पुरवा मी । मजदूंगे। नृझिके पुत्र थे । इन्होंने बहसमे ज्योति:शास्त्रीय ग्रन्य ढलवाना (बि. क्रि०) ढोनेका काम किसी दूसरेमे प्रणयन किये हैं, जिनमेंमे निम्नलिग्वित कई एक पाये कराना। जाते हैं--ऋणभकाध्याय, कड़कल्पलता, ग्रहफलो. ढलाना (हिं. क्रि०) १ ढालना, दरकना । २ गिराना। ३ त्यत्ति, ग्रहलाघवोदाहरण, जानककोम्त भ. जात काम- लुढ़काना, मरकाना । ४ प्रवृत्त करना, झकाना । ५ प्रश्न रण, तानिकभूषण, ताजिकाभरगा पञ्चाङ्गफल, गज- करना, खुश करना । ६ इधर उधर हिलाना, फहगना । योगाध्याय, शिष्टाध्याय, अनन्तरचित सुधारमको सुधारम. ७ चलाना, फिगना। ८ ढोनेका काम कराना। मारिणी नामको टोका. सुधारमकरणचतुष्क प्रभृति। ढलुषा (हिं. स्त्री० ) एक प्रकारको चीनी जो खजरमे इनके पुत्र गणेशन गणितमन्नरोको रचना को है। बनाई आती है। २ बौधायनोय चातुर्मास्य-प्रयोगरचयिता। ३ कार्वगेढवाग (हि. पु. ) घुन नामका कोड़ा। म्तोत्र प्रता। दकना (हि. क्रि० ) ड कना देखो। द गिटगजलल-एक वैदिक पगिडत । इन्होंने मृतपत्रो. ढका (हि. पु.) किमो पदार्थ को देखने के लिये घातमें काधान, म्वर्ग हारेष्टिमत्रप्रयोग तथा बौधायनीय हौव विपनका काम । सामान्य नामक ग्रन्थ रचे हैं। दढ़ (हि. स्त्रो० ) अन्वेषण, खोज, तलाश । ढ,ण्डिराज व्यामयज्वन् - एक महाराष्ट्र-पण्डित । इन्होंने ढढना ! हि क्रि०) अन्वेषण करना, तलाश करना। १७१३ ई में शाहजोके अनुरोधमे शाहजिविलास टूटला (हिं स्त्री०) ढढा नामको राक्षसो। नामक एक मङ्गोत पुस्तक और उनके बाद मुद्राराक्षम- टू का (हिं. पु. ) उंढन्न, घाम इत्यादि के बोझका एक टोका रचना को है। मान । यह दश पूलेके बराबर माना गया है। द गढ म ( म० पु०) डुण्ट भ, डेडहा सॉप। टूढिया ( हि पु०) खेताम्बर जैनौको एक श्रेणी, ये दुरमा (हि. क्रि० , १ ढलना, टपकना, गिरकर बहना। मूर्ति पूजा नही करते और गृहस्थ धर्म ग्रन्य पाठ करते २ इधर उधर डोलना. डगमगाना । ३ हिलना, डोलना। समय और साधु हमेशा अपने मुंह पर पट्टी बांध रहते हैं। ४ लढकना, फिमम्न पड़ना। ५ प्रवृत्त होना, झकना। ढमर (हि. पु०) बनियोंको एक जाति। धूपर देखो । ६ प्रमत्र होना, खुश होना । ६सा (हिं. पु. ) कुम्तोका एक पेच । ढरहरी ( नि. स्त्री० ) १ फिसलनेको क्रिया। २ पग- क (हिं. स्त्रो. ) एक प्रकारको चिड़िया। जो मदा डी. पतला सम्ता । मोनेके गोल दानोंको पनि जो पानीके किनार रहती है। दमको चौच ढोर गरदन मथमें लगा रहता है। लम्बो होती है। ढगना (हि' कि०) १ ढरकाना, टपकाना । । २ हिलाना टेंकनी (हि. स्त्रो ) १ एक औजार जिसके द्वारा सिचा. जुलाना। ३ लुढ़कना। ईके लिये कुएँ से पानी निकाला जाता है। इसमें एक प्राड़ी दुरुषा (हि. पु. ) गोल मटर, वेराव मटर। .. लकड़ी एक 'चो खड़ी लकड़ी के ऊपर रस प्रकार टेको टुरो (हिं. सी) पगडंडो, पतला रास्ता। रहता है कि उसके दोनों छोर क्रमशः नोचे जपर हो ढमकना (हि. कि०) फिमलना, सरकमा। सकते है। एक प्रकारको सिलाई। ३ एक प्रकारका