पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१६

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१३ हा- टनं मख्या प्रायः ४१७४५ है। अधिवामियों में अधिकांग . घो, चीनो और रेशम तथा रफत नोमें कपाम, रेशमो मुमन्नमान है। दम तालुकमें इमो नामका एक शहर और कपड़ा ओर चमड़ा प्रमान है। ३५ ग्राम नगर्त हैं। इसके उत्तरमै पावत्य भूमि और टट्टा नगरनं बहतमो प्राचीन कोर्तियों विद्यमान हैं, दक्षणामि मन्नकालो पहाट है। यहाँ धान उपज धान, । जिनमे यहांका दुर्ग और जुमाममजिद प्रधान है। यह ईख, गह, जी. बाजरा, ज्वार और तिल है। नगर अत्यन्त प्राचीन है। १५५५ ई में पोस गोज ३ मिन्धप्रदेशम कगची जिलं के अन्तर्गत उक्त टट्टा : उतान इम गरको लूटा था। १५५१ ई में प्रक तालुकका प्रधान नगर। यह असा० २४ ४५ ३० ओर बाने मिन्धुप्रदेश पर आक्रमणके समय इसे हम नहस देशा० ६.०५८ पू० पर मिन्ध नदोके दाहिने किनारेमे कर डाला था। ७ मोल पश्चिम और कराचीमे ५० मोल पव में अवस्थित : जब शाहजहान् जहानगोर के निकटमे भागा था. तब

  1. ! लोकमग्या प्रायः १.७८३ है।

उन्हान टट्टाको मजिद में उपासना को थी। इम कत- पहने नगरको चागे दिशायरिध नटोके जनसे : जतामें उन्होंने ८ लाख रुपये खर्च करके वहां जुमा- नावित होती थीं। अब भी बाढ़के बाद बहुतमो झोल ! ममजिद बनवाई थो। यहां लोगोंने चन्दा मंग्रह कर और खाडोमं जन्न रह जाता है और उम चन्नमे वायु तथा गवर्मे गटसे कुरु महायता ले कर इस ममजिद की दूषित हो कर ज्वर प्रत्याटि गंग उत्पादन करती है। मरम्मत को जिमसे यह और भी अधिक सन्दर दोख उन्हीं मच कारणाम यहांका जलवायु अस्वास्थ्यका है ।। पडतो है । टट्टाकै निकट माकन्नो पर्वत पर बहुविम्तोगा मिन्ध-पन्नाब दिलो-रेन के जङ्गगाहो में जनमे १३ ! और प्राचीन विख्यात कब्रिस्तान है। मोल दूर यह नगर पड़ता है। दमका मध्यवर्ती बहुत । टट्टो (हिं. स्त्रो०) १ दट्टा दखे।। २ चिक, परदा, चिन्न सुन्दर और सुगम है। यहां पर मुहतियारका पौर मन । ३ बाड गक आदि के लिये खडी की जानवालो तपादारका अाफिम तथा एक थाना है। इमक मित्रा पतलो दोवार : ४ पाखान।। ५ बारातोंमें ले जानका मरकारो-विद्यालग, डायघर, दातव्योषधालय और एक कारागार है । समोयवर्ती माकनी पवत पर प्रमिड फुलबारीका तखा । ६ अंगुर आदिको बेलें चढ़ाई जान के लिये बॉमका फाट्टयां आदि को बनी हुई दोवार । कब्रिस्तान है भार इम ममाप हो फोजदारी अदालत ' टहरा ( म० पु. ) टट्ट, इत्य व्यक्तशब्द राति राक मेरोका और डंपुटिकमिश्ररका बङ्गला है। शब्द, तुरहीको आवाज । १८वों शताब्दीक पहले टट्टा बहुजनाकीण वाणिज्य । शिल्पादियुक्त एक बड़ा नगर था । १६५८ के पूर्व ' टट्ट (हि पु० ) १ छोटे आकारका घोड़ा, टोगन एक भोषण महामारोमे इसके प्रायः ८० हजार अधिवा- २ लिङ्ग न्द्रिया। सियो की जान गई थ।। १७४२ ई० में जब पारस्य राजा टठिया ( हि स्त्री० ) टाटी देखो। नादिरगाह टट्टा देगका प्राय घ, तब वहां ४० हजार टड़िया ( हि स्त्रो०) एक प्रकारका गहना जो बॉहमें तोतो, २० हजार प्रन्यान्य शिल्पजोवा और ६० हजार पहना जाता है। यह अनन्तक आकारका होता है दूसरे अधिनामा वाम करते थे । किन्तु भारतोय नो परन्तु उमसे मोटा और बिना घुडोका होता है। सेनादलकं साप्तान Chaptain उड़ अनुमान करते हैं, टण ( हि पु० ) टना देखो। कि १८३७ ई में टहाक अधिवासो १० हजारसे अधिक टगडु क ( संपु.) पोतलोध्र । नहाँ थ । टट्टा का वाणिज्य पार शिल्प पहले की तुलनाम टन (हि. स्त्री०) व शब्द जो धातुखण्ड पर प्राधात नाम मात्र है। प्रभा साधारण कपड़ा बार छोट तैयार पहनेम उत्पन्न होता है, टनकार, झनकार । होता है, कि मैनचेष्टरको तियागिताने उपका भो : टन ( अं० पु० ) अट्ठाईस मनके लगभग को एक अंगरेजो धोर धोर हाम होता जा रहा है। भामदनों में अनाज, तौल।