पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१६१

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जमीन सौंपी जातीएम प्रायः २५ पट नो बोसिलो मति विवे बिना किसीवी भी । वर्ष जह रहता। अधिक समय तक बोद नहीं कर सकते। इस राधम ढोनपुरवे राजा हो इस समग्र भूखण्ड के एकमाव बहुतने थाने, फाड़ी, तथा प्रति पाममें एक एक चौको- अधिकारी है। अमौदार पथवा तालकदार आवकोंसे दार है। वन विभागका बन्दोबस्त तासीलदारक हाथ कर वसूल कर रोजकोषमें भेजते है। ग्रामके स्थापन है।गलपुरको काराप्रथा हटिय-साम्बाब्धको माई है। कर्ताक वशधर ही जमींदारणोमुक्त है। जब तक देशका जलवायु साधारणत: खासाजनक है। व जमींदारगण राजाके साथ निर्दारित नियमोंका पालन वैशाख पौर ज्येह मासमें अत्यन्त उण वायु चलती ।। करते हैं तभोसक वे जमीनका पधिकार भोग कर सकते वार्षिक वृष्टिपातका परिमाण २७ से २० । । परती जमोन तालाब प्रादि . राजाके खाम पधिः राज्यमें ३ दातव्य चिकित्सालय है, जिनका बचे राजकोष- कारमें है। से दिया जाता है। १८७६ में राज्य एक बार मापा गया था। यहां १०.४१०में तोमरवपके राजा ढोलन देव तलवार को लोग संस्था प्राय: २७०८७३ है। हिन्दू, मुसलमान चम्बल पोर बाणगङ्गा नदीके मध्यवर्ती प्रदेश पर शासन ईसाई पोर जैनधर्मके माननेवाले बहुतसे लोग यहां रहतं करते थे। प्रवाद है, कि उन्होंके नामानुसार होलपुरके हैं। राजपूत, गुर्जर, कच्छो, मोना, जाट, बनियां, बहीर राजाने बाबरको कुछ काल तक बाधा दो थो। पकवरी इत्यादि श्रेणोके लोग भो रस प्रदेशमें देखे जाते हैं। समयमें ढालपुर मुगल राज्यमें मिलाया गया। ११५८ बारो और गिर्द तान्न कके गुर्जरोगण पालतू पशुओंको ईमें ढोलपुरसे ३ मील पूर्व रसायबुन नामका स्थानमें चोरी करते हैं। मोनागण मषिजीवो है। वैष्णव धर्म राज्यके कारण पोरगजेब मुराद के साथ युद्धम प्रवत्त हुए हो टोलपुर राज्य में प्रवल है। स गज्यमें चौमो, वारो, थे। औरङ्गजेबको मृत्य के बाद पाजम पोर मुपाजमक पुरणा और राजाखेरा नामके चार प्रधान शहर तथा वीच ढोलपुर में एक लड़ाई लड़ी। नवोन सम्बाद . ५३८ ग्राम लगते है। यहां हिन्दी पारसो अगरेजी मुघाजमको विपदापन देख कर राजा कण्यापसिंहने पादि सिखानेके लिये बहुत से विद्यालय है। ढोलपुरको अपने पधिकारमें कर लिया। ___ढोलपुर राज्यके बीच हो कर भागरसे बम्बर तक ढोलपुरके शामनकर्ता जाटवंशक । इनके पूर्व ग्राण्डट्रङ्ग रोड गई है। ढोलपुरसे राजखेरा होती हुई पुरुष प्राचीन कालमें ग्वालियरके निकटवर्ती गोहद आगरा, ढोलपुरसे बारी और ढोलपुरसे कोलारी तथा नामक एक ग्रामके जमींदार थें । प्राचीन वर्णनके अनुसार बसेरी तक तीन पछी मडके हैं। सिन्धिया टेट रेलवे ढोलपुर कनोज-राज्यका एक प्रश जैसा अनुमित होता लाइन भी इस राज्यमें होकर गई। है।मबाट पकबरने ढोलपुरको पागरा गवशेषतः राजस्वकार्य को सुविधाके लिये यह राज्य ५ तहसो ___ गत किया था। जो कुछ हो, ढोलपुरके शासनकर्तागण समें विभक्त है। यथा (१) गिर्द ढोलपुर. (२) बारो अत्यन्त परिश्रमो और युद्धकुशल होनेके कारण धीर धोर (३) बसेरी ( ४) कोलरो, (५) राजखेग। उक्त उबति करने लगे। पेशवा बाजोरावके समयमें ये महारा. तहसीलोंमें यथा ग्राम ५, ७, २, ३ और २ ताल.क है। ट्रायके अधीन गोहदराज उपाधिसे भूषित हुए । १५॥ सैन्यसे सहायता पाने के लिये ५५ ग्राम जागीर और ४४ को पानीपतके भीषण युद्ध के बाद गोहदराजने म्बालि- पाम देवोत्तर उन्हें दिये गये है। जागोरदारोंके पत्या. यरका अधिकार और अपनी स्वाधीनताप्रचार कर गया चार करने पर राजा उसका विचार करते है। प्रजाकी की उपाधि धारण की । १७७८०में गोपदके महाराणा जीवात्य की चमता राजाके हाथ है। राजकार्य में लकिन्दरसिंहके साथ अगरेजीको रस पते पर सन्धि ससा देनेके लिये बौन्सिलमे ३ सदस्ख रहते ।नाजिम हुई, कि हटिशगवण्ड महाराणाको महाराष्ट्रों के विरत पुलिस पौर विचार विभागके प्रधान का। किन्तु बुद्ध करने में सैन्यसाहाब करेगो तथा जयपराजयी Vol. Ix. 40