पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१७४

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नक्षलविला टित्वात् डीप। बामोयन्त्र, बढ़ायाँका दा नामक एक रखा था। चीन परिवाजक भो यहाँ पाये थे। मौन भो बीजार एम वेनकही छोन कर माफ करते है। तीन दिन तक इस राज्यमें यथेट सम्मान पाया था। तीन तक्षन् (ग'०५०) मत कनिन्। कनिन् युषितक्षिग- दिन तक अभ्यागत व्यक्तिको अभ्यर्थना करनेका नियम जीति । उण ॥१५॥ त्वष्टा, बढ़ई। २ विश्वकर्मा । म नगर में प्रचलित था। ३ चित्रा नक्षत्र । त्रि. ) ४ लक्षणवत्त मात्र, जिसमें चोन परिव्राजक भ्रमणवृत्तान्त पढ़नेसे मालम होता काठ इत्यादि माफ किया जाता है। है, कि तक्षशिलावामो भारतके मध्यप्रदेश में जो भाषा तक्षशिन · तनशिलाकै एक गजा । ग्रीक ऐतिहामिकीका प्रचलित है वहो भाषा बोलते थे। इन लोगोमें लाकरी काना है कि. ३२७०के पहम्ने अन्लेकमन्दरके मिन्ध अक्षर प्रचलित था। नदके किनारे तक पहनने पर उक्त गजाने अग्रमर हो तक्षशिलाका दृश्य अन्यन्त रमणीय है। गजधानोके कर अनेक मन्दरका माथ दिया था। उत्तर-पश्चिम भागम नागराज एलापत्रका सरोवर है। रम अलेकमन्दग्ने जब भारत पर आक्रमण किया था, मरोवरका जल अत्यन्त स्वच्छ है । तरह तरह के कमल के तब पञ्जाब क्षुद्र राज्यों में विभक्त था। ये गजगण प्रायः फल मरोवरको शोभाको बढ़ा रहे हैं। सरोवर के दक्षिण मर्वदा हो पापमो कलह में प्रवृत्त रहते थे । इन गजाया- पूर्व में प्राकनिर्मित गर है । प्रवाद है. कि इस गहर में पुरु अधिक समताशोन थे। उनसे ईर्षा कर तक्षशिन (गुका ) के चारों ओर १०० पद तक को जमान भूकम्प अनेक मन्दर के साथ मिन्न गये थे। में कभी कंपतो नहीं है। शहर के उत्तरम अशोकने एक समशिन्ना--देशविशेष. एक प्राचीन देशका नाम । भरतर म्त प निर्माण किया था। पर्व के दिनमें नागरिकगणा पुत्र तक्षको इस स्थान पर राजधानी थो। महाभारत म्त पको पुष्पादिसे आच्छादित और आलोकित करते थे। मतानमार यह स्थान गान्धारके मध्य है । (भारत १॥३.२२) पण्डिताके मतानुसार तक शके गजानि वितम्ता जनमजयने यहां स यन किया था। नदोके किनारे तक्षशिला राज्य स्थापन कर बहत दिन (भारत विविण ५०) तक स्वाधीनतामे वहां राज्य किया था। अनेक मन्दरके एम नगरका भग्नावशेष प्रभो ६ वर्गमील भूमि ममयमें भी तक्षशिला स्वाधीन राज्य था। अलेकसन्दरने ऊपर फैला गया है। भग्नावशेषमं बरतसे घौडमन्दिर यहाँके राजकि माथ मित्रता को थो ! महाराज अशोकर्क बोर तप देखे जाते हैं। समय तक्षशिला उनके मामाज्यभुक्ता था। मोर्य वंश प्रानीन काल तकशोयगण रम प्रदेश पर शामन राजा अनि कुक्क काल तक यह गान किया था। कररी थं । इमो वशकै नामानुमार तक्षशिला नाम पड़ा जब अशोक पञ्जाबके शामनकर्ता थे. तब तक्षशिन्ना- है। १ला गताग्दा प्रारम्भमें तक्षशिला नगर अमन्द्र नगरमें हो उनको राजधानी थो। उनके पुत्र कुणाल यहां मामले परिचित था। रहते थे। कनिहमका कहना है, कि ख० पू० शताब्दा तक्षणिनाको जमोन बहुत उर्बरा है । यहाँ बहतमो के प्रारम्भमें तक्षशिला युफ्र टाइडिम राज्य के अन्तर्गत था । नदियां और माते हैं। फल ओर पुष यह बहुत उपजत १२६ ई० मन्के पहले अबर नामक शकगणने इस प्रदेश हैं। अधिनाभिगण अत्यन्त साहसो और मतेज है। पहले को अधिकार का प्रायः एक शताब्दो तक यहाँ राज्य यहाँ अनक मडाराम ( बौडमठ) थे, अभी उनका भोग किया था। बाद कूषाण कुलोमव कनिष्क तलवार के केवल भग्नावशेष देखा जाता है। बहुत थोड़े बौध यहां बनसे इस प्रदेशकै राजा हुए । इस समय उनके प्रतिनिधि वास करते हैं। शासनकर्तागण तक्षशिलामें राम्ध करते थे। इन शासन- ३२१ ई. सनके पहले अलेकसन्दर भारत पाक कर्ताओं की बहुमो मद्राए पोर उत्कोणलिपि शाधेरी मणके समय जब तक्षशिला पाये थे, तब यहांक गजान नगरमै मिलो है। स्वार्टम माहबने जिस लिपिको • तीन दिन तक यथेष्ट भादरक माथ उनको अपने यहां । पाया है, उसमें तक्षशिलाका नाम परित है।