पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१७७

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को राजा बनाया। जब तनसिह मारवाड़के राजा हो. भावप्रकाश मासे, तमर दो प्रकारका जिनमेसे गये, नो पहमदनगरवालोंने बखेड़ा शुरू किया। पाखिर । पहलेका नाम कासामुसर्या तगर । पर्याय-कुटिल पोर' इनके पुत्र भी छ वर्ष बाद जोधपुर चले पाये। इनका मधुर दूसरेका नाम है पिण्डतगर। पर्याय -दन्तासो गवर्मेण्टसे कई बातों में मतभेद था । एमके शासनकालमें पौर वर्षिण। ये दोनों प्रकार के तगर उणवीय, मधुर- राजा विशेष मुखो न थी। ( राजस्थान ) रस. सिन्ध, बघु तथा विष, पपस्मार, शूल, अधिरोग पौर सरसा ( फा० पु.) १ लकड़ीका चीरा एषा बड़ा पटरा, त्रिदोषनाशक है। पहा । २ लकड़ोकी बड़ी चौकी, तरन । ३ मुर्दे को श्मशान माधारणतः नदी के समीपवर्ती पक्षको पादुक वा तगर. ले जानको लकड़ीको बनी हुई ठटरो, परथी, टिवटी। पादुक ( Patrocurpus Dalburjiodus) कहते है। यह ४ कागजका साव । ५ जमीनका पलग अलग टुकड़ा, ब्रह्मदेश में सिटाड नदोके पूर्वाध शलन तथा थाइन, कियारी। उखानी पोर न्याटारण नदोके किनारे भी थोड़ा बहुत सरनापुल ( फा० पु. ) किलेकी खदक पर बनाये जानेका पाया जाता है। 'दूमरा पिण्डीतगर ( Tabernenmon. पटरोंका पुल । रच्छानुसार यह हटा भी लिया जाता है tama Coronaria) कोपदेगमें बहुतायतसे होता है। लखो ( फा• स्त्री० ) १ छोटा तरङ्गा । २ लिखनेको पहो। किसो किमीका कहना है कि. जब तारका नामान्तर ३ किसी चोजको छोटो पटरो। दन्तहस्त है, तो जल चौड़ो मामा नदीमें उत्पन्न होने . तगड़ा (हि. वि०) १ बलवान्, मजबूत, सबन्त । २ अच्छा वाला कचो नातोय कोठरमध्यकुञ्चित नोलपुष्प शाक और बड़ा। नगरपादुक है. क्योंकि मका काड दण्डाति पौर सगड़ो ( हि स्त्रो. ) ताड़ा देखो। पत्तै पादुकालतिर किन्तु विचार कर देखमेसे मालम तगण (सपु०) छन्दोग्रवासिह,विवर्णात्मक गणविशेष, होगा कि, उता शाकके पुष्य मोलवर्ष पोर कोठरमध्य छन्दःशास्त्र में तीन वर्णीका समूह । इसमें पहले दो गुरु है। मलिए उसको मोलबुला कहना हो सङ्गत है। और तब एक लघु ( 1 ) वर्ण होता है। २ तगरमूलजात गन्धव्यविशेष, डल पक्षको जड़ तगदमा (अ.पु.) अनुमान, अन्दाजा, तखमोना। जिमको गिनती गन्धद्रव्यों होती है। इसको चबानसे सगना (Eि क्रि.) सागा जाना। दाँतोको पोड़ा जाता रहता है। मदनाच, मैनफल, तगपहनो (हिं. स्त्रो०) जुलाहीका एक मौजार । इससे ४ पुपक्षविशेष, तगरपुष्प, इसमें बहुतसो पखड़ियाँ वैटूटे हुए सूत जोड़ते हैं। होती है और यह देखने में सफेद है। पर्याय-मितपुप्प, नगमा (हिं यु.) तमगा देखो। कालपण, कट छद। (शब्द) या पुष्य नारायणको सगर (म.पु.) तस्य क्रोडस्य गरः, ई-सत् । १ नदोसमोप- पूजाके लिए प्रशस्त है । ( भारत १३।१०।०५) जात वृक्षविशेष, तगरमूल, एक प्रकारका वृक्ष जो तगर 'हि.पु. ) एक तरहको शहदको महो। काश्मीर, भूटान, अफगानिस्तान भोर कोण देशमें तगर-टलेमोके भूगोल और परिशस बर्षित भारतवर्षका नदियोंके किनार होता है । काग्मोरमें यह सरवट और एक प्राचीन नगर । यह प्रतिष्ठान नगरके पूर्व दश दिनके कोरदिप पिडीतगर मामले प्रसिह है। इसके पर्याय पथ पर अवस्थित तथा वस्त्रप्रभारनेके लिये प्रसिह था। बाची शब्द-कालानुयारिवा, वा, कुटिला, पठ, महोरग, किन्तु अभी एमको वर्तमान अवस्थाका पूरा पूरा निर्देश मत, जिला, दोपन, सगरपादिक, विनम्ब, कुचित, पण्ड, करना कठिन है। यह नगर एक समय मिताहारने महुष, दन्तहस्त, वर्डच, पिण्डीतगरका, पार्थिक, राज राजापाको राजधानो वा । पण्डित भगवानलास इन्द्रजी पर्षक, कालानुसारक, मन और दोन। मुण-गीतल, करते है, पूना जिलेका वर्तमान शुबार नगर को प्राचीन - ति तथा हरिदोष, विषदोष, भूतोन्माद, भय-नायक टलेमोवणित तगर है। इसका कारण बतलाते हुए और पय। राजनि.) . ., उन्होंने बसा है कि शबार नगरको प्राचीन शिक्षाखिपि Vol. Ix.44