पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१८०

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१७६ तजरपाकार चोर (तनापुर) जनराकार (बि.प.)जिम अनुभव किया हो। पृथक करतो है पूर्व और दक्षिण पूर्व बोपमागर तजरबाकारी (हि.स्त्री० ) अनुभव, तमरना। दक्षिण-पश्चिममें मदुग जिला भोर पचि पुदुबो राज्य सजाया ( १०) नजया देग्यो। तथा विचिनापली जिला अवस्थित है। तमोर जिला ताबाकार ( प.) नक्षवाकार रेग्यो । दक्षिण कर्णाटका एक प्रश है। तबीर नगर निलेका समनबावारी (Eि स्त्रो.) तजरबाकारी देग्यो । मदर जो कावेरी नदीके दाहिने किनारे पड़ता। सजगेज़ ( अ० ग्वी. ) १ मम्मति, मन्नाड, राय। २ या जिन्ना मन्द्राज प्रदेशका उपवनम्वरूप है। इसका निर्णय फेमन्ना। ३ प्रवन्ध, इतिजाम। उत्तर भाग बहजनाकोण तथा प्रमस्य नारियल के नजवीजमानी (प्र. स्त्री. ) एक ही हाकिमके मामने कन्चसे शोभित है। कावेरी नदीक विम्तीर्ण उलटेंमें होनेवान्ना पुनर्विचार । बहुत धान उपजता है। अनेक पयःप्रणाली इस खण्डको लज्ज ( म. वि. ) ततो तम्मान् जायते जन्-। १ जानको नाई ढके रमतो हैं। इन वाड़ियों के हारा बड़ो उमीमे उत्पन्न, उमीमें लगा हुआ। २ शोध, हठात्, प्रासानोमे शस्य क्षेत्र मौंचे जा सकते है। सुरन्त । तमोर नगर के दक्षिण पत्रिमश कुछ ऊंचा है, किन्तु सज्जनान (म. वि.) ततो जायते जन इ. तम्मिन मप्रस्त जिले के मध्य कहीं भो पहाड नहीं है। उपकून नीयते लो-इ. तेन सजनेम प्रनिति अन विप । उमीमें भागमें बालुकास्त प और उसके बादडी मामान्य जङ्गल प्रत्पत्र, उमे में लोन और उनमें अवस्थित पदार्थविशेष, है। केवल कालोमोर अन्तरोप मे अद्रमपत्तन पन्तरोप तक पर्थात् ब्रह्म । ब्रह्ममे यह जगत सत्पन हमा है और एक विस्तीर्ण लवणात जलाभूमि देखी जाती है। यहां उसी पर रहता है, पाद पन्तमें उमो में लीन हो जाएगा। अधिक पत्थर नहीं मिलते हैं। "सर्व बल्विदं ब्रह्म तज्जलानिति शान्त उपासीत् " (छन्दो०)। ___ दक्षिण भागमें उपकूलसे प्राय: प्राध मोल दूर जमीन 'यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते. येन जातानि जीवन्ति, मे दो गज नोचे में पत्थर का स्तर निकला है। यह पत्थर यत् प्रविशन्ति अभिसविशन्ति ॥” (ति) नरम होने पर भी घर बनाने में उपयोगी है । नग्नपत्तन. जहाँसे ये समस्त भूत जन्मते, जहांसे जोवन धारण के दक्षिण महोके नोचे मोय शाह और घोधेका विस्तीर्ण करते और पन्तमें जहां लोन हो जाते हैं, वहो ब्रह्म है। स्तर खोदा हुआ है। इस स्तर के उपरो भागमें बहुत “यतः सर्वाणि भूतानि भवनयादियुगागमे । दिनोंसे सञ्चित कोमल मिट्टो पड़ो हुई है। इस तरह यस्मिंश्च प्रलयं यान्ति पुनरेव युगक्षये ॥" (स्मृति ) सोपर्क सरमिसे कुछ अत्यन्त प्राचीन और कुछ पाधुनिक- अदि मर्ग कालमें जहाँमे ममम्त भूत उत्पन्न हुए हैं के जैसा माल म पड़ता है। यहाँको सब जमोन उर्वरा पौर यगक्षय होने पर जिममें लोन हो जायगे, वही ब्रह्म | नहीं है, केवल जलसिञ्चनका अच्छा बन्दोवस्त रहनसे है। ब्रह्म देखो। हो शस्यादि यथेष्ट उपजते हैं। डेल टाके सिवा अँचो सच्ची (म'. स्त्री० ) त निन्दितं जयते जुक्तिप, गौरा. भूमिको मट्टी लोहितवर्ष पोर लण्णवर्ण को है जहां डोष । हिङ्ग,पत्रीहक्ष। कपासको फसल अच्छी होती है और कहीं कहीं बाशुका- सन्ज (म'• वि. )१ तत्त्वज्ञ, जो तत्व जानता हो। मय हरुको महो है। पोले रणको चार मही भो देखो २चानो। जातो, जो बहुत अनुवर होती है। तज़ोर (समाबुर)-पन्द्राज प्रदेश के अन्तर्गत परेज। जिलेका उपकूमा भाग प्रायः १४. मोल । उपल शासनाधीन एक जिला। यह प्रक्षा०४८ से ११ भागमें ऐशे भोषण तरङ्ग पातो.. कि जहाज रत्यादि २५ ७० पोर देशा० ७८°४७ मे ७८.५२ पू.में भवन्ति । वहाँ मामानीसे जा नहीं सकते। है। इसका क्षेत्रफल ३०१० वर्ग मोल है। इसके उत्तरमें | । चावल ही यहाँके परिवासियों का प्रधान साथ है। कोसपण नदी, विचिनापल्ली और दक्षिण पर्काटनेसको अतिम उपाय नल सींचीयर बानकी फसव को