पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१८१

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तम्बार (तापुर) होतो है। ससरा डेन टेको समतल भूमिमें तथा जची। और किसी न किसी एहस्थो खेतमें चिरम्यायो रूपले भूमिमें केवल बड़े बड़े तालाब के निमग्थानमंही धानको | काम करते है। शेष मोस श्रेणो के हिन्दू और मर- . खेती होती हैं। प्रधानत: कार और पियानम् नामक | वर प्रभृति कावेरो मदोके दक्षिणम्य प्रदेशमे रम जिले में दो प्रकारके धान उपजाये जाते है। कार धान जेठ माम. पाये हुए हैं। में बोया जाता और काति क मामी काटा जाता है। डेला भागमें जहाँ नटोको बाढ़ से जमोन डूब जातो पिशाम् धान प्राषाढ़ में बोले पोर माघ मासमें काट | *. वहाँ कोनड़ और रेतोलो मिट्टो जम जाती है, जिनसे नेते हैं। उत्तम. ग्वादका काम निकलता है। किन्तु अँचो भूमिमें ___ रब्बो-फमन यहाँ बहुत अप होतो है। चेना, तथा जहाँ ग्वाड़ी इत्यादिमे जन्न मोंचा आता है. वहाँ बाजरा, कंगनो ओर उरट अधिक उपनते हैं। जिनके खादका प्रयोजन पड़ता है। मचराचर उस तरह की पश्रिम भागमें ऊँची जमोन पर चेना ओर उद ययेष्ट जमोन मवेशो का गोबर दे कर उबरा बनाई जाती है। होते हैं। डेनटे में जहाँ जन मोंचने को सुविधा नहीं है। इमर्क मिया मड़ा पचा उद्भिज, ग्वार, कूड़ाकरकट पाटि एम तरक्की भूमिमें अथवा धान के खेत धान काटनेके | मार रूप में व्यवहत होता है। बाट उक्ता फमन को खेतो हे तो है। __ तन्नोर जिले में स्वभावतः जन्न पधिक होता है। तजोरमें नागपओ जड़त मिलती है। गृहसंयक हमके अलावा अङ्गारेज अधिकारके पहले ही अनेक उद्यान और नगेनोर प्रभृपि सनी, प्याज और पान | वासो रहने के कारण खेतमें जम्न मी चमेकी पोर भी तथा तरहरणे माग उत्पत्रोते हैं। धनियाँ, मौंफ ग्रच्छो मुविधा नो गई। उत्तरो मौमामें प्रवाहित श्रादिममात्र भो यहाँ त भोते हैं। कोनरुण नदी बहत छिछलो रहनेमे इसका जन उतमा हम जिन्ने डेच्या निभागमें मेला, पान, समाकू, अधिक काम नहीं लाया माना है। ईख इत्यादि योष्ट उत्रनो हैं। ऊँचो भूमिमें मन म जिन्ने में बहुतमी नदियाँ हैं। इनके अतिरिक और पटमन (गाट) को देखे जाते हैं। घरके म्मोप ग्यासो हारा भी जमीन भलोभौति सोचो जाती है। को परती जमोन तथा नदो मिनारे ही प्रायः तमाकूको विचिनावालोमे ८ मोल पूर्व में कार्यरो नदी, तमोर जिले. खेती होती है। इसके मिवा जिले के दक्षिण-पूर्व प्रान्स में प्रवेश कर काई एक शाखा-प्रशाग्वाम विभक्त हो कर में कालीम र यत्तमेयर निकट वान जमीनमें भी तमा उत्तरको ओर चलो गई है । इमी प्रदेशको कावेरो नदो- उपजता है। तमाको पत मोटे तथा उनको गन्ध का डेल्टा कहते हैं, यहाँ धान बहुत उपजता है। बात कही तो है। ये प्रायः नाम प्रथा पान जिले के पविम भागने कोलरुण पोर कविरा मदो परस्पर माथ व्यवहन होते हैं। यहॉ तमाकू ही प्रधान वाणिज्य अत्यन्त निकटवर्ती हैं। उम जगह कोलरुयाका गर्भ द्रव्य है। प्रतिवर्ष अधि परिमाणमें तमाकू विवाशर कावेरी नदी प्रपना प्रायः१० फुट ऊँचा है। और ट्रेटममेट लमेण्ट प्रभृति स्थानों में भेजे जाते हैं। अतः बहुत कम संयोग पानसे हो कावेरी नदीका मब कपाम भो यहाँ कुक कुछ उपत्रतो है। जिले का दक्षिण जल कोलरुण नदों में आ सकता है। हम पाशाको पश्चिमांश छोड़ कर दूपरी मच जगह प्राम, नारियल, | दूर करनके लिये २रा शताव्दाम चोलव शके किमो राजा. इत्यादि के वृक्ष बहुत सुगमनासे उपजते है। दक्षिणा - | ने उम स्थान पर शाखा कावेरी नदोके किनारे एक बड़ा पश्चिम भागमें प्रतरोली महो रहर्नमे वो कोई अच्छ पक्का बाँध यार किया है, इसी कारण रसको तखोरका पेड नहीं उगते हैं। उर्वरतारक्षक बाँध कहते है यह बाँध पत्थर का बना __ अधिवासियोंमसे अक भू-सम्पत्ति शून्य तथा श्रम | हुआ है। इसको लम्बाई १०८० फुट चोड़ाई ४० मे जीवी है। पनमें से प्राय: श कषिकार्य में नियुक्त | ६० फुट और ऊँचाई १५ मे १८ फुट है। १८३६ ई में रही है। ये प्रक्षमतः पकार तथा परिया जातिके | कोलरण शाखाके अपर एक कानिकट प्रस्तुत हुआ. इससे Vol. IX.45