पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१८२

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१७८ तम्जोर (तजापुर) कावेरीको शाखाका जम्न बहुत बढ़ जानेमे १८४५ ई में शिल्पके मध्य तखोरके भित्र भित्र धातुके तार, रेशमो कावेरोके अपर एक दमरा पानिकट बनाया गया | कपड़ा, काट ( गलीचा ) तथा काठको बनी हुई वस्तु यह कोलकण के निकट ७५० गज तथा कावेरोके निकट प्रधान हैं। मूतो कपड़ा और सूत. यूगेपसे कई तरह १५० गज नबा है । शेषोत दो पानिट हारा तनोग्में धातु, स्टेटममेटलमेण्टम् ओर मिहलहीपमे सुपारी जलागम मम्य गा रूपमे प्रायसाधीन किया गया है। प्रभृतिका आमदनो होतो है। रक्तनी द्रव्यों में चावन्न कोलकणके ऊपर पानिकट हो जानसे इमका जन्न बहत ही प्रधान है। कम माता है। पहले जो जमीन दमके जनमे मीचो तखोरमें वृष्टिपात करमगडल उपकूलके अन्यान्य जातो श्रो, अभी उसनो दूर तक इमका जम्न नहीं पह स्थानीको नाई मब वर्ष एक मा नहीं है। ज्ये ठ माममें चता है। इसके प्रतिकारके लिये पूर्व में पानिकटमे ७० दतिगा-पश्चिम मौसम वायु प्रारम्भ हो कर भाद्र माप मोल नो एक द्रमा पानिकट बनाया गया है। हम तक प्रवल रहती है। इम ममय वर्षा नहुत कम ममय कोलकणमे दो ग्वाड़ो काट कर एक प्राकट और | होतो है और जब कभी होती भी है तो दो दमगे सञोर नगर तक ले गये हैं। उत्सरो खालको घगटे से अधिक काल तक नहीं ठहरतो । पाश्विन वा उत्तर-रजनवायाग्वान और दक्षिणो म्वालको दक्षिण कार्तिकमे पोष माम तक उन र पूर्व वाय बहती है। रजनवायाखान करते हैं। इसके मिवा और भी कई इस ममय दृष्टि पहलेमे अधिक ओर बढ़त देर तक रहत' एक ग्वाड़ी ग्वोदो गई हैं। उक्त खाड़ियों मे फिर गाग्वा । है। तब वार्षिक वृष्टिपात क्रमशः १५ और २५ च प्रशाग्वा निकाल कर बहविस्तीण प्रदेशमें जन्न मोचा! होता है। प्रायः मब माममें वृष्टि होतो किन्तु भादांमे जाता है। जो कक हो, धीरे धीरे हम जिम्नेको उति अगहन माम तक हो मचमे अधिक होती है । चैतसे जेठ हो रही है। कहना नहीं पड़ेगा, कि नदोहाग की प्रायः तकका ममय ग्रोमकाल रहता है। तापांश फाल्गुन में B. अश शस्यनेत्रमें जल पहुंचाया जाता है। चहत प्रायः ८२, ग्रीष्मकालम प्रायः१०४ तथा शोतकालम थोड़ी जमीन तानाब या वृष्टिजनके ऊपर निर्भर है। ६४ तक हुआ करता है। तखोरमें बाढ़, अनावृष्टि प्रभृति देवदुर्वि पाक प्रायः | प्रोधी मेह आदि अक्सर होता रहता है। तुफानर्क नहों के बराबर है। समुद्र के किनारे बान का अचा ममय नाव जहाज इत्यादि जिलेके दक्षिणस्थ पका पहाड़ रहनेसे त फानहाग उत्पन्न सागरसरङ्ग जिलेमें उपमागरमें ठहरते हैं। प्रवेग नहीं कर सकती है। पूर्व भागको जमोन भी तजोरमें कोई भी रोग क्यों न हो, देशभर में फलता किनारकी और ढान्न रहनेमे नदी वा वर्षाका जम्न महज । नहीं है। पहले यहाँ पोन्नपा (पैर फल जाना ) रोगका होम निकल जाता है। सुतरा जन्न जमा हो कर देशको | प्रावित नहीं करता है। | नड़ा प्रादुर्भाव था, अभा यह कुम्भधोनम् तक फैल गया ____ व्यवसाय-बाणिज्य--तोरमें सब जगह जाने-अनिको है। स्वास्थ्यको ओर मभोको दृष्टि आकर्षित होनसे यह विशेष मुबिधा है। दक्षिणभारतीय रम्नपथको दो गाग्लायें रोग प्रायः विलुप्त हो रहा है। ज्वर, वसन्त और हैजा रोग एमके मध्य हो कर गई हैं। एक शाखा विचिनापानीमे हो मक्रामक हो जाता है। जिले भर में प्रायः ३८ पौष उपकून होते हुए नग्नपत्तन नगर पोर इमरी तन्नोर | धालय हैं। जिनमें अनेक लोग विना व्ययके चिकित्सित नगरमे वरिगत को कर मन्द्राजकी ओर चली गई है। होते हैं। जिलेके मध्य ५ म्य निसपालिटि है। जिले के मध्य प्राय: १२३३ मोल लम्बा, चौड़ा और नदी यहाँको लोकसंख्या प्रायः २२४५०२८ है, जिनमेंसे खाडी पादिके ऊपर मेतयक्त राम्ता है। एक २२ माल हिन्दुओं की संख्या अधिक है। पधिवासियों में वैग्लियर नम्बौ खाड़ो हो कर नाव इत्यादि जातो पाता है। उन ( मजर , बेसनर (सषक ), परिया, ब्राह्मण, शेम्बड़बन नावी पर विशेष कर वेदारण्यम नामक स्थानका उत्पन्न (धीवर), इयर (मेषपालक), कम्पनर (कारोगर), कैक लवय मादा जाता है। | नार (तांतो), सतानी. (मित्रजाति), शानच (पासी), मेठी