पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१८५

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सम्बार (जापुर) tet दिन बाद ही उन्होंने ३००० वागेही और २००० पदा- काबरोक उत्तरो किनारे विशिरापलीक निकट तिक संन्य मोजोक सेनापतित्वमै महम्मद पलोको सहा- नेन र नामक स्थानमें एक बाँध था। राजा प्रतापसिंह यताक लिये चौदसाहबके विरुद्ध भेजो। महम्मद अलोन को प्राथना और खरंसे त्रिशिरापझोक शामनकर्ता जयलाभ कर तबाबुरके राजाको पुरस्कारस्वरूप बकाण महानिजन उसे धनाया था। कामो नशामनकर्ता पौर दश वर्ष का पेशकश ( नजर ) छोड़ दिया और कोइलदो कभो गजाके से उस बाँधको मरम्मत होती रही। तथा लङ्गादु नामके दो प्रदेश भा दिये। १७६४१० में उसका एक स्थान टूट गया । नवाबमे उम १७५२ में प्रतापसिंहने मन्त्री शक्कोजी के कुपग- को मग्म्मम न की पोर न तो राजाको हो उसे मरम्मत मर्शसे सेनापति मोजोको कार्य मे अलग कर दिया। करने को अनुमति मिलो। म समय तुलजाजो समाबुर मुरारिराव यह जान कर कोइनदी अधिकार कर (तजोर) के राजा थे। उन्होंने भयमात हो कर गरज सञ्जाबुरकी ओर अग्रसर होने लगे । राजान कोई उपाय गवन रको सहायता ला। इस ममसे जब कभी बाधकी न देख कर मनोजौको शरण लो। मङ्का जोन महाराष्ट्रीय सेनापतिको मार भगाथा । मरम्मत करनका भावग्यक होता, सभी राजाको गरे। जोंमे सहायता लेनी पड़तो थो। १७५४ ई० में फगसोमो मेनानायकन तनाबुर राज्य इसके बाद हैदरपला के सञ्जोर पाक्रमण करने पर लट कर कोलरूणका बांध काट दिया। प्रतापसिन राजाने उन्हें प्रचुर धन दिया। १७६८ में उनके माथ अंगरेजोको सहायतासे पुन: कोलरुगा नदोका बांध संस्कार कर लिया। राजाको एक सन्धि हुई । शिवगाके राजा ८ वर्ष पहले १७४८ ई० में प्रतापसिंहने चाँदसाहब को जो ५ : लाग्द तबोरको जो मम्पत्ति ले गये थे, राजा तुलजाजीने रुपयेकी दस्तावेज लिख दो थो, वह फरामोसो गवर्नर के १७७१९ में उसे पुन: अपने अधिकार किया। पम पर हाथ लगी। इस रुपयेको पाने के लिये फरामोमी गवन र नवाब बहुत पसब हुए। राजाके यहाँ दो वर्षका कर काउगट लालो कई एक स्थान ल ट का तनाबुर दुर्ग के बाको है, मो कलमे समोर पाक्रमण करमेम मत- सामने प्रा पहुंचे। इस समय उनको बारूद और रमद मङ्गल्य हए । २३ मितम्बरको नवाबपुत्रने सञोरका दुर्ग कम गई। राहमें जाते समय प्रतापसिंहने उनका अनु- पवरोध किया, बाद २७ तारोग्यको राजान बाध्य हो सरण कर उन्हें राज्यमे बाहर निकाल भगाया। कर उनके साथ मन्धि कर लो । सन्धिपत्रमें यह शर्म महम्मद अली अंगरेजोंके साथ लड़ाई का खर्च रहो, कि २ वर्ष का बाको पेशकश ८ लाख रुपये और चुकान में बहुत ऋणग्रस्त हो गये थे । उन्होंने नवाब को युद्धव्यय स्वरूप ३२॥ लान रुपये नवाब को देव पौर शिव- कर ऋण-परिशोधको कोई सुबिधा न देती। अन्त में जब गङ्गाके राजाको जो सम्पत्ति ली गई है, उसे लौटा देवा उन्हें माल म पड़ा, कि पतापमि कई वर्षोंसे पेशकश आर्णी, विवानुर, मागाद्य, पोर केलदो छोड़ देने पड़ेंगे नहीं देते हैं, तब उन्होंने सोचा, कि तञ्जाबुरको खास तथा उक्त २२॥ लाख रुपये चुकानके लिये मायावरम अपने दखल में लाने से बहुत नगद रुपये मिल मकते हैं। और कुम्भघोणम् ये दोनों प्रदेश दो वर्ष के लिये नवाबो यह सोच कर उन्होंने मन्द्रामके गवर्नरमे महायता मांगी। अधिकारमें छोड़ देव, गजा नवाबके मित्रके माथ मा प्रस्तावमें सहमत न हो कर उन्होंने राजाका बाकी मित्रता और शव के साथ शत्रता रखें। १७७१-७२ पेशकश चूकानक लिये कोमिनिक अन्यतम मदम्य ई०का पेशकश फिर, बाको रह जानिमे नवाबने १७७३ जोसियार-डो-प्रेको भेजा। उन्होंने यह मोमांमा को, कि में गरज गवन रके निकट मनोरराज्यके विरुद्ध राजा प्रति वर्ष नवाबको ४ लाख रुपये पेशकश देंगे, यह नालिश को, कि पेशकश खातमें दश लाख रुपये बाकी पेशकश (२२ लाख रुपये ) दो वर्षों के मध्य पांच बाको रह गया है। राजा हैदरपली पौर महाराष्ट्रोंक दफे परिशोध करना होगा। यह सन्धि १७६२ में साध नवाब तथा गरेजोंके विरुद्ध षड़यन्त्र कर रहे .. गरज गवर्नरको पानासे सेनापति स्मिथने सित- Vol. Ix.46