पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१९

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लिस्टय (लियो) गया । उस मसय कजानके ममान मौजकी जगह हसिया स्वास्थ्य बिगड़ गया ; म्हों ने किगो ग्राम (देशात ) में भरमें न थी। परन्तु मर्वदा भोज खाते और 'बल'-नाच जाने के लिए अनुमति मांगो। बम प्रकार टलमयकी देखते देखते रमको उससे नफरत हो गई। टलस्टय विद्या-शिक्षा ममालहर- कुछ उपाधिन पा सके । इस ममय भौताही भीतर अपने लिये आदर्श नायिकाकी कालेजको शिक्षा उनी मनको पाकर्षित न कर सको खोज कर रहे थे। सो अवमर पर उन्हें फगसोमो थो, सनीलिए उन्हें वहां व्यर्थ काम होना पड़ा था। उपन्यास लेखक डूमा और य जिनसू उपन्याम पढ़ कर टनमय मो शहरों से मफरत हो गई पोर वे अपने बड़ा आनन्द होता था। परन्तु इतने आनन्दमें भी उनके ' गांवमें नोट पाये। उन्हें प्राशा थो कि 'गाँव के किसानों मनमें शान्ति न थो... उन्हें जोवनक गभीरतम ममम्या- के माथ मिल कर, उनमें शिक्षा और मय-संस्कारका ओंको चिन्ता करनका अभ्याम बाल्यापस्थ से हो प? गया प्रमार करेंगे। टलम्य कजानके किमानों की दुर्दशा था । इमो समयको स्म ति पर टलस्टयन Bot hind का विवरण बहुत सुन चुके थे--इसी लिए उनके दुःख और Youth नामक दो जोवन-मृतियां निगे थीं। दूर करने के लिए उन्होंने कमर कस ली। १८४७ में टलस्टय के जीवन पर फरासो विप्लवकै अन्यतम सृष्टिकर्ता दुर्भिक्ष हा । प्रर्थक जिले के प्रादमियों ने प्रमाज कसोका प्रभाव पड़ चुका था-रूसोको ये देवताको पाने को उम्मे दमे जारके पास प्रार्थना-पत्र भेजे। टमा- तरह भक्ति करते थे। स्टयने देखा, कि यह में कड़ों हजारों मनुष्य के जोवन- ___टलमयको इस बातकी हमेगा चिन्ता रहतो थो, मरण का प्रश्न है, अब कार्य करने का अवसर आया है। कि किम तरह मावारणकी दृष्टि पाकषित की जाय। छ मास तक उन्हों ने मकारके लिए नाना प्रकारके इतो उद्देश्यमे व प्राच्यभाषा शिक्षाके विद्यालयमें प्रविष्ट प्रयत्न किये । परन्तु अन्तमें विशेष कुछ नतोजा न निकम्म हए । किन्तु पहली बार वे 'पास' न हुए : दूमा वार नेसे मेगट-पिटस वगं लौट पाये पौर “Lundloni's अरबो और तुर्की भाषा में पारदशिताके माथ उत्तीण morning" नामक उपन्यास लिख कर उनहों में उम हुए । परन्तु इम अधायनमे उन्हें हप्ति न हुई और इमो युगको अभिज्ञता प्रदर्शित की। इसके बाद फिर आमोद- लिए १८४४ ई में कानूनो विद्यालयमें वे भरती हो गये। प्रमोदमें फम कर ये कर्जदार हो गये। आखिर १८५१ यहां भी विशेष लाभ न हुआ। छात्रों को शिक्षाकं लिए ईमें वे ककामम पहुँचे, जहां उनके भाई निकोलम वहां कोई सुव्यवस्था न श्री-जमनदेशोय अध्यापकगण फौजमें काम करते थे। यहां पर्वतके नीचे एक झोपड़ी छात्रों को शिक्षा पर विशेष ध्यान न रखते थे। अन्तमें भाई पर ले कर रहने लगे और महीने में मिफ बारह विश्वविद्यालयको उपाधि पनि लिए, टलमय इतिहाम, शिलिङ् मात्र खर्च करने लगे। कान न और धर्म वन्धो पुम्त पढ़ने लग। धम डमके बाद भाई तथा उच्चपदस्थ अात्मा स्वज कि विषयमें इनका मत परिवर्तित हो गया। बाल्यका नमें अनगेधसे टलमय फौजमै भरतो हो गये । मन. विभाग- वंशानगतिक धर्म विश्वाममें जा बालक बनोयान था, को परीक्षा उत्तीर्ण हो, वे वदस्त । मनिक का काम वही अब पद-लिख कर एक तरहका नास्तिक हां करने लगे । परन्तु उनके मन को गति दूसरा ओर थो; गया : टलमय इतिहासको व्यर्थ ज्ञान समझते थे । वं उन्होंने एक अच्छी पुस्तक लिखो और उसे रूमिधाक एक कहा करते थे, “हजार वर्ष पहले क्या हुआ था, उनके प्रसिद्ध मासिकपत्रमें छाने के लिए भेज दिया । मम्या. जाननेसे क्या लाभ!" इसलिए टलमय इतिहामको दकने उसकी बहुत प्रथमा को और अपने पत्र में स्थान वता सुनने नहीं जाते थे-कालेज में अनुपस्थित रहते दिया । इम नमय टनस्टय अपने घर जाने के लिए बड़े थे पोर इसके लिए एक बार वे काले जमे बन्दो भो सञ्चन्त हो पड़े थे । परन्तु क्रिमियाम युद्ध छिड़ जानेमे किये गये थे। आखिरकार किमो सरह ये परीक्षामें उन्हें तुरकोमे युद्ध करने के लिए क्रिमिया जाना पड़ा। उत्तो हो गये । १८४७ ई० में नाना कारणों से इनका . युद्ध के बोचमें लगातार मृत्यु भोका दृश्य देख कर