पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२०५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


तदिनम्न वापर तहिनम् (पया ) १ दिन मध्य, दिम। २ प्रति- तबाापन (स.वि. ) ताजायक, २ नत् । तदवा, दिन, रोजगज। जो उमो पवस्खाम हो, जिसको पहली अवस्खा कुछ मी सहन (म० कि.) तीव महोन ध यय, बदली न हो। बहवो० । १ सपण, म । (को०) तत् धन, कर्मधाम सजिव (स.वि. ) तस्मात् मिया, ५-तत्। तहातिरिक, २ वर धन या दौलत । तस्य धन ६ तत्। ३ उसका . उसके मिवा। तव ( सं अव्य ) तथापि, तोभो । म। सरम (म' वि०) म धर्म यण, बहनो। सथाभ - सद्राज (म.पु.) तस्य राजातत् । उसका रामा। सद (म.वि.) तत् हा कर्मधा। सहय, समान, युक्ता, उमौके ऐसा धर्मात्मा। वसाही सहित ( स. त्रि.) तस्मै हित ४-तत्। १ उसकी टूपता (म स्त्रो०) सादृश्य, समानता। भलाई। पु .)२ याकरणोक प्रत्ययविशेष, याक. तहत् (म' अव्य० ) तेन तुत्य वा तया तुझ्या सावेत. रणमें एक कारका प्रत्यय । दमे मन अन्त में लगा क्रिया इत्यथै वात : १ ततमहश क्रियायुक्त, समोके समान कर शरद बनते हैं। य पत्याच प्रकार शब्द बना. जिसको क्रिया हो। २ सतमश, उसोके जेमा, च्चों का ने काममें पता है। गया-अत्यवाचक, कट वाचक, त्यो । (वि.)सद प्रस्त्यायें मसूप. मस्य वः। सत्त ल्य, भाववाचक, जनवाचक ओर गुगवाचक। अपत्यवाचक उमको नाई। वह है जिसे पपयत या प्रनायित्वका बोध हो। तहत्ता ( सं स्त्रो. ) तहतो भावः सात तल टाप । महि. ममें या तो मजा परनेवाको वृद्धि कर दी जाती शिष्ट, सहशता, समानता । अथवा उसके प्रत्तमें 'ई' प्रचय जोड दिया जाता है। तःश (म त्रि.) तवाम । . कवाचक वह जिममे किमो क्रियाके कता होने का मटा-तदन देखो। बोधगे। इसमें प्रायः जान्ना या बारा प्रत्यय लगाया तहाचक ( स.वि.) तदर्थक । जाता है। भाववाक्क व है जिसमे भाका नोध हो। नहिध । म वि०) मा विधा प्रकागे यस्य, बहनो। fanternm इममें आई, ईव,का, पन पा. वट, र आदि प्रत्यय वा , पन पा. वा . आदि प्रत्यय तथाविध, उसी तरह। नगर्त हैं। अनचक व है जिसमें किमो प्रकारको सदातिरिता (सं.वि.) तम्मात, व्यतिरिताः, ५-सत। न्य नता मान्नघुता आदका बोध हो। हममें मजाक मम मजाक तद्भिव, उमक सिवा अन्त में क,'याअ'द लगाये जात हैं और 'पा' 'ई'में तन (स.पु.)१धनार वंशज, सन्तान। बदल दिया जाता है। गुणवाचक वह है जिससे गुणका तन (दि. १०) १शरोर, नेह। २ सोको मूत्रन्द्रिय, बोध हो। इसमें मजा अन्त में पा, एक, इत, ई, ईला, भग, योनि। एला, लू, वर्त, धान, दायक, कारक आदि प्रत्यय लगाये तनक (सं० पु.) वेतनक । जाति हैं। सनक (हि.पु.) एक रागिणीका नाम। मे कोई २१मो तरी प्रत्यय लगा कर बना हया शब्द। कोई मेघरागको गगिणो मानत। ताल (०५० तस्मिन् लजो एक बल यस्य, बहुव्रो। सनकपुर-पल्मोड़ा जिलेको चम्पावत तासोलका व्यवसाय- बाणविशेष, एक प्रकारका वाण। प्रधान एक पाम। यह पक्षा० २८४७०और देया. तलव (म. पु. ) सस्कृत के शब्दका अपशरूप। जमे ८०.७ पू० पर हिमालयको सलहटीमें सारदा नदौके हस्तका हाथ। निकट बसा इसा है। सोकसंस्था लगभग 400। तनाव (स.पु.) तस्य भाव, तत् । १ उमका प्रमा- यह सिब्बतके व्यापारियोका प्रधान व्यापारस्थान..। धारण धा । यथा घटमें घटत्व, गामें गोरव। तस्मिन् भूटानवामी यहाँ मुहागा पोर जान ला कर बेचते और भावा, ७-तत् । विषयको चिंता। कपडाचीनी सरोद.ले जात। ... ... Vol. IX.51