पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२०७

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स प्रदेशका क्षेत्रफल लगभग २.४ वर्ग मोल तथा ८ कोमल, नाजुक। योगमासीक पतित पादि जनसंख्या प्रायः ३१६२२ है । इसके उत्तर में क्षण पर्वत, केश। "अविषाक्षेत्रमुत्तरेव प्रभुप्ततमुविच्छिमोदारामा" पश्चिममें मिन्ध नद, दक्षिणम हरिपुर तथा प्रबोटावाद (पातजल. साधन.) सासोल और पूर्व में हजार जिलाका मानमर-तहसील पविया से समस्त दुखोंका मूत, पनामा अवस्थित है। इस प्रदेशका थोड़ा भाग चम्बाके शामन पात्माभिमानका नाम ही पवित्रा है। एक पविद्यासे कर्ता नवाब मर महम्मद अकरम खाँ, के. सी. एम. ही पस्मिताटि चतुर्विधयोंको उम्पत्ति होतो है। ये पाई महोदयके और थोड़ा भाग फुलगके खॉ भाता पस्मितादि केश चार प्रकारके -प्रसुल, तनु, विहिन महम्मद खाँके अधीन है। ये दोनों हिन्दवाल संप्रदाय के पोर उदार । जो कश चित्तभूमिमें रह कर भो पपने तनावली है। महम्मद अकरम खाने १८६८ ईस्वोमे सहकारी उहोधक के बिना पपना कार्य कर नहीं सकता, नवाबकी उपाधि पाई थी। सिपाही विद्रोहके ममयमै उनको प्रसन्न कहा जा सकता है। जैसे बाल्यावस्खामें उनके पिताने अंग्रेजों का यथेष्ट उपकार किया था और बालकोंका चित्त बासनारूपमें प्रवखिन हो कर भी सह- इन्होंने भी १८६८ ई में हजाराधिकारके समय अत्यन्त कागे उहोधक के प्रभावके कारण उसको व्यता नहीं कर साहम तथा प्रगाढ़ भतिका परिचय दिया था। एसो. सकता। जो कोश अपनी प्रसिपनीको चिन्ताक बाग लिये अंग्रेजोंने इन्हें नवाबको उपाधि दी। इन्हें खकार्यशक्षिके शिथिल होने पर वासनाखरूप चित्तमें १८७१ ई० में मी० एस० आई० और १८८८ ईमें के. रहता है, किन्तु प्रभूत कार्यारम्भक सामग्री के प्रभावसे मो० एस० पाईको उपाधि मिली इन्होंने हजार जिला स्वकार्य प्रारम्भ करने में असमर्थ होता है, उसको मनु अन्तर्गत हरिपुर तहमोलका ८००० को जागीर उपभोग करते हैं। जैसे योगियों के चित्त में बासना रहतो अवश्य है, पर वह उपयुक्त सामग्रोके प्रभावसे किसी तरहका सनिक (हिं० वि०) १ थोड़ा, कम । २ छोटा । कार्य करके नहीं दिखा सकती। जो कश पाय प्रबल तनिका ( स० स्त्री० ) सन्यते धातनामनेकार्थत्वात वध्यते- केशक आक्रमणसे पगभूत होता है, उसको विडिव ऽनया करणे इन् सज्ञायां कन् कापि अत इत्व । बन्धन- कहते हैं। जो केश सहकारीका सविधानमात्र अपना रज, कोई चोज बाँधो जानकी रस्मो । कार्य सम्पादन करना है, उमको उदार कहते है। सनिमन् ( स० पु० ) तनोर्भावः तनु-मनिच । १ ननुत्व, (स्त्री०) १० ज्योतिषोत सम्मका स्थान । ( जातकाल'कार ) कशता, दुर्वलता, दुबलापन। २ यतत्, उदररोग तनुक (स क्लो. ) मनु स्वाथै कन् । १ शरीर, देश। २ सोहा। धातकीपुष्प, धवका फूल। ३ विभोसकस, सिनियका सनिया (हि.सी.) १ लंगोट, लंगोटी। २ ककनी, पेड़। ४ त्वर, दारचीनी। जांघिया। ३ चोलो। सनुकूप (म पु०) रोमकूप । तनिष्ठ (सं० वि०) प्रयमनयो रतिथयेन तनुः वा अय. तनुशोर (म. पु. ) मनु बल्यं को निर्यासो यस्ख, मेषामतिशयेन तनुः तनु-इष्ठन् । जुद्र, जो बहुत दुबला बहुव्री। पाम्बातकवच, पामड़े का पेड़। पतला छोटा या कमजोर हो। सनुग्रह ( स० को० ) ज्योतिषोत पाभेद, ज्योतिषके सनी (खिो०) बन्धन, बन्द । अनुसार एक प्रकारका घर । मनोयम (सं.सो.) बहना मध्योऽयमतिमयेन । पल्प, तनुच्छद (स.पु०) तमु देशदयति छादेः स्वर । बादेषऽवम्युपसर्गस्य । पा ९६ । कवच, बखतर। तनु (स• स्त्री०) तन-छ। १शरीर, दे। २ स्वच, तनुशाय (म'• पु०) सन्बी शया यस्य, बबी० । १ जाल. चमड़ा शो, औरत। ४ कंचुला। (नि.) ५ सय, वरक इच, बास बबूलका पेड़। (स्त्री को०) २ शरीर दुबलापतमा ।। पल्प, घोड़ा. ७ विरल, सन्दर, बढिया। छाया, शरीरको परवाही। (वि.) ३ पल्पशया- कोटा।