पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२१

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टलस्टय (लियो) "काउगट टलम्टयका कार्य विशेष श्रद्धाके साथ उन्लेख- ओवन में क्या क्या हो सकता है. उस विषयम कितनो योग्य है। शिक्षा विभागको पोरमे उन्हें महायता की बातें सोच कर उनमें कुछ छोट लेना बड़ा कारन पहचाना उचित है। उनके मम्प ग मतोंसे हमारा काम है।" एक्य नहीं है, तथापि आशा की जा मकती है कि कुछ टलाटय कृषि कार्य और सम्पत्तिको व्यवस्था के लिए विषयों में वे अपना मत परतत न करंगे ।" शेषोत तरह तरह बन्दोवस्त करने लगे। विवाह के बाद वाक्यसे गव गट ने महायता देना तो दूर रहा, उनके उन्होंने इस विषय में एक चिट्ठी लिखो थो, जिममें इस कार्यों में विघ्न डालना शुरू कर दिया । टलम्य भो नाना विषयको अपना अभिज्ञता प्रकट को थी--"मैंने एक कारणों मे कन्त हो गये थे, जिसका प्रधान कारण था । आविष्कार किया है, जो शोघ्र हो तुमसे कहगा। नड़कों को विशेष उन्नति न होना। दो वर्ष चना कर, गुमास्ता, नायब, परिदर्शक आदि मिर्फ कषकार्य में बाद में उन्होंने विद्यालय बन्द कर दिया। वाधा पहुँचात हैं। उन सबको विदा कर दो। खद इसके बाद ये 'माज तन्त्र का प्रचार करने लगे। दिनके दग बजे तक मोते रहो। उठ कर देखना. तुम्हारा दून मतमे जमाधारण हो मनमक हैं-उच्च थेगोके कोई काम बिगड़ा नहीं है।" लोगों को कोई जरूरत नहों । उनका कहना था १८५४ ई में जब ये अपने मित्र फेटके घर थे, तब कि पढ़ने निवनेपे हो मनष्यका चरित्र गठन होता गैनिभ माथ इनका बोरकर विवाद हुपा था - यहां हो, एमा नहीं है। उन्होंने माधारणले विषयमं निग्वा तक कि इन्दयुद्ध की नौबत आ चुकी थी। एमो बीच में था- कि नाधारण लोगामें भी, पन्चथोनी अपना टलटन अपनो माहित्य-मारनामें मन लगाया। इनके अधिकतर बलिष्ठ, खाधोन. न्या पाया, दय ल ओर and Prace' नामक ग्रंथ एक महाकाव्य समझा प्रयोजनोय शक्ति पाये जाते हैं। वे "मारे विद्याय जाता है। उसमें प्रिन्म दगडी चरित्र ग्रन्थकारने मानो श्रा कर शिक्षा ले, यक नगे। हमको चाहिये अपनाही चित्र खींच दिया है। इमो प्रकार AL कि हम उनक पाम जा कर शिक्षा ग्रहण करें। यह बात Karnina में Levm के चरित्रमें भो टनस्टय नजर कमोको ए'मन्नो में प्रचारित वाणी के समान है। आते हैं। ___इन कामकि करनिके कारण टलमयको लेखन-शक्ति इन दिनों टलष्टयने फिर अध्ययन करना शुरू घट गई। किन्त विवाह कोनक बाट उनको स्त्रो, उन्हें किया । ग्रोकभाषाको शिक्षाम हो ये अधिक समय देने निखने में बहुत कुछ महायता पहुचाने लगीं। उन लग । दश नगास्त्रका अध्ययन करते करते ये शोपेनहरके महीयमो महिलाके प्रयत्नमे टलमृयका हृदय पुनः न तन गुणों पर मुग्ध हो गये और उनके ग्रयों का रूसो भाषामें भावामे मन्त्रीवित हुआ। दम नये उद्यममे उन्होंने दो अनवाद कर डाला। १८७३ ई में इनके दो पुत्र और अपूर्व ग्रन्थ लिखे, (१) War and Peace, (२) Amn मोसोका देहान्त हो गया। इम शोकके समय इन्हनि Karenin इन दो ग्रन्यानि हो टनस्टयका नाम हमेशार्क वाइवल पढ़ा था और उससे कुछ मान्त्वना पाई थो। लिए अमर कर दिया है। इनको जीवनी लिखने वाले फिर मूल यहूदीमे वाइवेल पढ़ने के लिए ये हिब्र भाषा रोमो रों लाका कहना है, कि इन दो ग्रन्थोंका प्रभाव मोखने लगे। इन शान्तिके दिनों में इन्होंने दुर्गनिभसे आधुनिक युगके य गेपोय माहित्य के मर्वत्र ही थोड़ाः पुनः मित्रता कर लो। बहुत पाया जाता है। १८६४ ई में टलस्टयने अपने परन्तु इतना लिखने पर भी उन्हें आनन्द प्राप्त न मि फेटको लिखा था-"मैं जिस काम ( उपन्याम हुआ। उन्होंने लिखा है ( Conifessions 1879 )- लिखना ) को पस समय कर रहा है उसमें कितने 'मेरी उमर अब तक पचाम तक नहीं पहचो है-मैं परिचमकी जरूरत है, उसको तुम कल्पना भी नहीं प्रेम करता था मुझ पर भी लोग प्रेम रखते थे । मेरे कर सकते। मैं जिनके चरित्रोको खोंच रहा है, उनके बाल-बच्चे अच्छे है ; मेरी सम्पत्ति भो अको है, सुयश VOL .S