पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२१०

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सनेना-पाय समिना ( वि.) व. टेढ़ा, तिरका । पर्व यत्र, बहुवा। चावावर पो मासी, श्रावण नना (6.) तनेना देखो। मासको पूर्णिमा। इस तिथि भगवान् वाम नदेवको नर्मला (हि.पु. ) एक प्रकारका छोटा पेड़। इसके यज्ञोपवीत दान देना चाहिये। फल सुगन्धित और सर्फट होते है। रस तिथिमें मचत्र प्रभृति विवश होने पर भी यसोप- सन्ति (# ) तन-कमणि हिच वेदे न दोघ : न वोत दान अवश्य वर्तव्य है। इस पूर्णिमामें महलके लोपाभावम। १ दोघप्रसारिता रज्ज, बहुत लम्बी लिये हाथमें राखो बाँधो जाती है। इसका विषय निर्णय रस्सी। : गौमाता, गौ, गाय । ३ विस्तार, फलाव। सिन्धुमें इस प्रकार लिखा है ;-श्रावणी पूर्णिमाकै दिन तन्तिपान ( म.पु. ) सन्ति गोमातरं पालयति पाम्लि- प्रात:काल विधिपूर्वक खान कर देवता पौर षियों का प्रण । १ गोमालपालक. गोको रक्षा करनेवाला। २ तर्पण करना चाहिये। बाद अपराहसमयमें राखोकी मरदेव, विराटगृहमें महदेव गुप्तावस्थानके समयमें इसी पोटलीको मिसाथ भौर पचत पर्पित कर उसमें सुवर्ण मामसे परिचित हुए थे। ( भारत विराट १० अ° ) मयुक्त कर देना पड़ता है। उसके बाद पुरोहित मिल तन्त ( स० पु.) तन्धत विस्य ते सन्-तुन्। सित निगः लिखित मन्त्र बारा राखी बांधते हैं। मोति । उण ११.०११ सूत्र, सूत, तागा। २ ग्राह। ३ सन्तान, मन्त्र-"येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः । बाल बचे । ४ तास । तांत देखो। ५ विस्तार, फैलाव । तेन स्वामपि वानामि रक्षे मा ले मा चल।" ६ याको परम्परा। ७ वयपरम्परा। ८ मकड़ीका ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र प्रत्येकको उचित जाना। है कि इस तिथिमें यथाशक्ति ब्राह्मणोंको दाम दे कर तन्तुक (#. पु. ) तन्तुरिव कायति के-क वा संज्ञायां राखो हाथमें धारण करें। रक्षाबन्धन देखो। कन्। १ सर्षप, मरसों। २ वनशूकर, अङ्गालो सूपर। तन्तुभ ( स० पु. ) तारिव भाति भा-क। १ सर्षप, सायुरोग। । जसजन्तु । ५ मन्तति । ६ सूत्र, मरमों। २ वत्स, बछड़ा। सूत। ७ मण्डलोस भेद । (स्त्री) ८ नाड़ी। सन्तुमत् ( म० पु. ) सन्तुः विद्यतेऽस्य सन्तु-मतप । सन्तुकाष्ठ (म' की सन्तुसमन्वितं काष्ठं, मध्यपदलो। अग्नि, भाग । मन्तबुलकाह, जुलाहीको एक लकड़ी जिसे तूली सन्तुमती ( स० वि० ) तन्तुमत् स्त्रियां ङीष । मुरारि- __ को माता । सन्तुको (स.सी.) तन्तुक स्त्रियां डीप.। १ माड़ो। तन्तुर (स० को• तन्तु रस्वस्य कुलादित्वात् सन्तुर । गिरा। माडीयाकमेद। ४ राजिका. राई। मृणाल, भसींह, कमलको जड़। सन्तुकोट ( स० पु०) तन्त त्पादकः कोट, मध्यपदलो। तन्तुल (सं० लो०) तन्तु र रस्य ल वा सन्त सच। मशाल, १ कोटविशेष, मकड़ी। २ रेशमका कोड़ा। कमलको जड़। सन्जाल ( स.पु.) नसोका समूह सम्सुवादक ( स. पु. ) तम्बो, बीन पादि सारके बाजे सन्तक ( स० पु.) तन बालकात् तनन् निपातनात् बजानवाला। एवं दन्तानकारान्त इत्ये के। पार। सन्तवान् । संवि• ) बुमनको किया। सन्तुनाग ( स० पु० ) तन्तुर्माग रव। प्राइ, मगर । तन्तवाप ( स० पु० ) तन्तन् वपति वप-प। १ तन्तु तन्तुनाभ (स• पु०) तन्तु भो यस्थ, बहुव्रो०, पच वाय, ताँती। तन्तुपाय देखो । समासान्तः । ल ता, मकड़ी। तन्वाय (सं० पु. ) तन्तन वयति विस्तारयति वै-पए । सन्तुनिर्याम ( पु. ) तन्नुवत् नियासो यस्य, बी०। १ सता, मकड़ी . २ नवशासक पन्तमंत जातिविशेष, तालहन, तासका पेड़ा ताँती । नवशाल देगे। सन्तुपर्वन (स .) सन्तोः यसोपवीतस्लम दामरूप असवयनोपजीवी मनुषमानको तनुवाद (तोती)