पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२१६

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२१५ तेन्तुवाय-तन्त्र साहस नहीं कर मकते है। मुसलमान जोला ताँतो कपड़े बुननेकां येन्य, करधा। निर्योधके शादर्श है। तविग्रह (सं. स्त्रो०) तन्तुभिः निर्मि तो विग्रहो यस्याः, सम्सुवामेिं एक विशेष पार्था है। उत्तरकुल बहुव्रो। कदलोवृक्ष, कलेका पड़। मम्प्रदाये कंवल कपाम के सूनसे वस्त्र प्रस्तुत करते हैं, तन्तुशाला ( स० स्त्रो० ) तन्तु यनाय या पाना। सन्तु मड़यालो ताँतो बंवल तसरका वस्त्र बनातं कभो मूर्तमे वनग्रह, वह स्थान जहाँ कपड़ा बुना जाता है। कपड़ा नहीं बुनते हैं और पाखिना तातो दोनों तरहके तन्तुमन्तत ( म०वि०) तन्तुभिः सन्तत व्यान', ३-तत् । वस्त्र प्रस्तुत करते हैं। स्य तवस्त्र, सिया हुमा कपड़ा । इम के पर्याय -जत. उत __ ढाकाकै तातो पहले जगविख्यात उत्कट कप म और स्य त है। वस्त्र प्रस्तुत कर प्रचुर धन उपाज न करते थे। प्रभो उम तन्मन्तति (म स्त्रो०) तन्त नां सत्तनिः तत । तरहका कपड़ा कौं देखने में नहीं आता है। उनके वयन, बुननेको क्रिया। सौभाग्य के समय जो अच्छे अच्छ वस्त्र बनते थे डाकर तन्तुमार ( स० पु. ) तत्तुः एप सारो यत्र, बहुवा। वारज Dr. Wish ने उनके ५ प्रकारको तालिका दो गुवाकवाक्ष, सुपारोका पेड़। है, यथा, मलमल इममे पहले प्रकारका अर्थात् मबमे तन्त्र ( स० क्लो. ) तनाति तन्वते वा तन्न् वा तन्त्रि पच्छ अववान, तनं च और देगीय कपास के सूत का बना कुटुम्ब धारण घञ्। १ कैद काय, कुटुम्ब भरण और इषा मन्नमल है। दमरे प्रकार का शावनाम. खामा, पाषण पादिका काय । २ वेरको। मन', गङ्गाजन्न और तैरिन्दम है। तोपरे प्रकारका मम मिडान्त, मोमासा, विचार । ४ दृढ़ प्रमाण, पका मबू।। लिम जी सबसे मोटा होता है, इसका माधारमा नाम ५ परिच्छद, वस्त्र, कपः । श्रषिध दवा। ७ झाड़न- वफता है। मन्त्र, झाड़ने फकने का मन्त्र। ८ प्रधन। ८ काय, २। डोरियः-अर्थात् मोटे सूतको लम्बी धारीदार काम । १० कारण। ११ उपाय । ११ राजममभि- मनापन्न, यथा-राजकोट, ढाकान, पादशाहीदार, बृटो व्याहारी लोक, राजकर्म ।। १३ सैन्य, में । १४ दार,.कागजो और खेलापाट । अधिका। १५ राज्य। १६ खराज्यचिन्ता. राज्यका ___३ । चारवाण-चारग्वाना मलमल, यथा-नन्दनः प्रबन्ध । १७ इतिकतव्या , धर्म, फर्ज। १८ सूत्र, शाह, अनारदाश, कबूतरखोयो, शाकुटा, बच्छादार और दूत। १८ तन्तुकाय, तोतो। २० तत्तु, ताँत । २१ कुण्डोदार। पद, कार्य करनेका स्थान। २२ समूह, ढेर। २१ ४। जमदामो-पर्थात् छोटे छोटे बूटेदार मलमल: वम्वयनको सामग्र , कपड़े बुननंको मामग्रो। २४ पहले यूरोपोय वणिक् इसे नयनसुख कहते थे। बूटे के आजाद, प्रमवता, आनन्द । २५ राज्यशासन । २६ प्राकार, लता, फल इत्यादिको प्रतिमूर्ति तथा उस राज्य का समृहिनम्पादन, वह कार्य जिससे राज्यको वर्ग भेदमे जमदानीका नाममंद हुपा है, उनमें से शाह उन्नति हो। १७ र ३, घर । २८ धन, सम्पत्ति, दोलत। वर्णाटि, चोवर, मेल, सेलचा और धुवलो जाल साधा- २८ अधोनता, परवश्यता। ३० चर्मनिर्मित मम रज्ज, ग्गा है। , चमड़े को पतलो रस्सो । ३१ दल संप्रदाय । २२ उद्देश्य । ५। कसौदा या चिकण - मलमलको लाल, माले, ३३ कुल, खानदान । २४ शपथ, कसम | ३५ अंधोन । ३६ हल्दी और गमी रणमें गा कर उसके ऊपर तसर उभयार्थ प्रयोजक । ३७ विधिक अन्तम श्रङ्ग समुदाय । इत्यादिका फल छपा रहता है। इस प्रकारके कपड़े में ३८ शिवोत शास्त्रभेद, एक शाखा, जो शिवके मुंखसे कटा उरमी, नौवाड़ो, यहदो आजिजुला बोर समुद्र कहा गया है। यह शास्त्र प्रधानतः पागम, यामन पोर बार प्रधान है। सन्छन तीन बणियों में विभा। वाराहोतबके तवायदगड (सपर.) तन्तयायस्याटणतना मतस-