पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२३

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टलेमी (समी) इसलिए थे राजी हो गये। इसके बाद रूसियाकै मत प्रचार किया था, वह अभी तक 'टलेमोका मत' एम साधारण लोगों को जिस मम भेदी दरिद्रताको उन्होंने नामसे प्रसिद्ध है। इनके मतसे, पृथियो ब्रह्मागड़ के मधा अपनी बॉखोसे देखा, उमसे उनका हृदय बिलकुल स्थलमें अवस्थित है तथा सूर्य, चन्द्र ग्रह और नक्षत्र पिघल गया। "हमें क्या करना चाहिए" शौर्षक पुस्तिका ममन्वित ज्योतिष्कमण्डल २४ घण्टे में एक बार पृथिवा के में उन्होंने लोकगणनाके ममयको सम्पूर्ण अभिज्ञता प्रकट चारों तरफ पावर्तन करता है। टलमोन ग्रहोंको गति के कर दो । अन्तमें एक दिन उन्होंने अपनो स्वोको अपने विषय में एक नये मतका तथा चन्द्रका सुनान्तरमस्कार कमरमें बुम्ना कर कहा "धनमम्मत्तिक अधिकारको का ( Evection ) आविष्कार किया था। इनमें मतम मैं पाप ममझता है । इमलिए मैंने अपने व्यक्रिगत अधि. विशेषत्व कुछ नहीं हैं. उसमें सिर्फ ज्योतिष्कों को प्रत्यक्ष कारको छोड़ देने का निथय किया है।" १८८८ ई० में गतिविधिको हो वैज्ञानिक प्रणालीमे प्रमाणित करनको उन्होंने अपनी मम्मति स्त्री और पत्रको दे दी। हममे उन्हें चेष्टा को गई है। इसमें मबसे भारी बस्तु मिष्टोका हो अपनी मम्पत्तिको उन्नतिको चिन्तामे छुट्टी मिल गई। पहले अवस्थान बतलाया गया है : मिट्टी के ऊपर उमय इमके बाद उन्होंने अपनी मम्म ग शक्ति किमानों को कुछ हलका पदाथ जन्न है, उसके बाद वायुगशिर्क स्तर जीवनोन्नति करनमें लगा दो । किमान लोग शराब पीना और वायुराणिक बाद तजोराशि है। तेज वा अग्निक कोड़ दें और राष्ट्र द्वारा उन्हें अधिकार प्राहा हो. इन __ बाद इयर नामक सूक्ष्म पदार्थ अनन्त स्थानमै व्य! विषय के अनेक ग्रन्थ भी लिखे। है । इम इथरके भीतर वा बासर बहमख्यक १८८१-८२ ई०में जो भीषण दुर्भिन हा था, उममें स्वच्छ स्तर मगडल पृथिवीक चारों तरफ बहुत दूर। टलस्टयने म्वयं तथा उनके परिवार के लोगान लगातार पर उपयु परि अवस्थान करते हैं। इन स्तनमें एक काये किया था । एक ज्योतिष्क स्थित हैं जो स्तरक आवतन के कमियाकै प्रतिष्ठित ईमाई चा पर आक्रमण कर माथ पृथिवा के चारों तरफ श्रावतित होने हैं। इन नेके कारण धम सम्प्रदायने उन्हें पृथक कर दिया था स्तरंकि भातर चन्द्रमण्डलक अवस्थान-स्तरमै पृथिवा (१८०१ ई. को २२ फरवरोके आदेशानुसार) १८.१० ई०के मर्यापेक्षा निकटवर्ती है, उनके वध, शुक्र, सूर्य, मङ्गल, २० नवम्बरको निमोनिया रोगमे दूनको मृत्यु हो गई। वहम्पति, शनि और नक्षत्रांक। म्तग्मण्डल यथाक्रम जगत्में टलस्टयने ही सबसे पहल Nomrer 1staiice: दूरवर्ती है। टन्लेमोके परवर्ती ज्योतिर्विदनि कालिपात वा अहिंस अमहयोग नीतिका प्रचार किया था । महात्मा गतिको व्याख्या के लिए पूण्य मान नवम मण्डलको नया मोहमदाम करमचन्द गान्धोके माथ इनका पत्रव्यवहार दिवारात्रिको काम वृद्धि ममझान के लिए दशम मगन्न- होता था । महात्मा गान्धीको ये अडाको दृष्टि से टेरवस थ । को कल्पना को है। यह दशम मण्डल हो २४ घगर्ट में मोहनदास करमचन्द गन्धा देवा। पूर्व में पश्चिमको ओर एक बार आवर्तित होता है तथा टलेमी । टसमो)-ग्रोकक एक प्रसिद्ध ज्योतिर्विद, गणितज अपनो गतिक द्वारा अन्यान्य मण्डलाम गति उत्पन्न करता पौर भौगोलिक पण्डित । इनका असली नाम था क्लडियम् है। इमको प्राइमम मोबिलि (Primum mobile:) टलेमियाम्। ये १३८ ई में मिसरमें प्रादुर्भूत हुए थे अर्थात् गतिका आदिकारण कहते है। किन्तु टनेमा और सम्भवतः १६१ ई में ये जीवित थे। इसके सिवा मतावलम्बा ज्योतिर्वि दोन इन मण्डलोंको कल्पना करके उनको जोवनीके विषयमें विशेष कुछ माल म नहीं हुआ भी प्रत्यक्ष घटनाओं को सूक्ष्म और विशद व्याख्या नहीं है, किन्तु उनके द्वारा रचित ज्योतिष और भूगोलसंबन्धी कर मके हैं। वे सूर्य गतिको काम वृद्धि समझान के लिए अनेक पुस्तकें अब भी मौज द हैं, जो बहुकाल पर्यन्त पृथिवीको सूर्याश्रित मण्डलक केन्द्रकं पाल में अवस्थित समग्र यरोप और परब आदि देशों में बनान्त और सा- बतलात थे। सय पंचामत निकटवर्ती होने पर बाट समझो गई हैं। इन्होंने ब्रह्माज के विषयों जो | इसको गति वृधि और दूरवर्ती होने पर गति हास होतो