पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२५०

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तन्त्र म्तत्त्व, देवतत्त्व और ध्यानतत्व ये पाँच तत्त्व है। दशकलात्मने नमः" दम मन्त्र के द्वारा पाधारको पूजा मामादि शाधन- करके " अ मण्डलाय दशकलात्मने नमः" इस "वरोह शनि मामादेः शोधन प्रिये । मन्त्रमे कलम और "ॐ मोममण्डलाय षोड़शक नामने पूर्ववत मल वा पूजयेत् मण्डलोरि॥ नमः” एम मन्त्र में पजा करें। तदनन्तर 'फट: इस आधारशांत कुमैच अनन्त: पृथिवीं तथा । मन्त्रमे दम दारा सन्ताड़ित करके "हुँ" रश मन्त्रसे जन्म स्थान माम मन्स्य मुद्रांच पार्वति ॥ अवगुगिठत की। पोछे मूलमन्त्र जोक्षण करें। ह योजेन संमन्त्रप फट कारः प्रोक्षण वरेत् । अनन्तर अब क्षण करके मूलमन्च हाग तोन बार गन्ध चाहणन च धन्दादि दर्शयेत् मासानमः ॥ ग्रहण कर । "ॐ' हम मन्त्रमे कम्भमें पुष्य निक्षेप करें। नतो मायां वधुत्वव धावीज' कमगाजपेत् । "ह मोः'दम मन्त्रमे त्रिकोण अजित की। है मौ: हे.मो: शुद्धिमत्र पठभक्तथा मलमन्त्र गमुच्चरन् । .. नमः" इम मन्त्रमे १ जा करके "द्र को परमस्वामिनि पवित्र कुरु देवेगि मांस मान्य कुलेश्रगि। परमाकागन्यबाहिनि चन्द्रसूर्याग्निभक्षिणि पात्र विग मुद्रां शस्योदभवां दिव्या पूजार्थ कुलनायिके ॥ विग स्वाहा" म मन्त्रमे घट पकड़े ओर दश बार जप तती हफट वारुण न तस्योपरि जपेत् प्रिये । कर। " हो को आनन्द खगय विद्महे सुधादेव्ये मूलमत्रच तन्मये दशधा जपनश्चरेत् ॥' धोमह । तन्नोऽड नागेश्वरः प्रचोदयात्" इम मन्त्र को पात्रक मांसादिका शोधन करना हो, तो पहले की तरह ऊपर जपें। इममे शापविमोचन होता है। मण्डन्न बना कर उम पर आधारशक्ति, कूम, अनन्त और अन्य शापविमोचनमन्त्र - पृथिवीको प जा करें तथा उम मगडलके बीच मत्स्य, , "अन्यच्च शृणु देवेशि यथा पानादिकर्मणि । माम और मुद्रा स्थापित करें। पीछे 'र' दम वाज. दोषो न जायते देवि तान् वै मत्रान् शृणुष्व मे ॥ मन्त्रको ममन्त्रित करके 'फट' एम मन्त्र द्वारा प्रोक्षण । एकमेव परं ब्रह्म स्थूलसूक्ष्ममयं ध्रुवम् । करें तथा धन प्रादि मुद्रा दिवावें | उनके बाद माया : कचोद्भवां ब्रह्महत्यां तेन ते नाशयाम्यहम् ॥ वोज, वधूवाज और श्रोबाजका क्रमशः जप कर। पाई मर्यमण्डलसम्भूतं वरुणालयसम्भवे । मूलमन्त्र उच्चारण करके भक्ति व क 'पवित्र कुरु अमाबीजमये देवि शुकशापाद्विमुच्यताम् ॥ देवेशि" इस शुभमन्त्रको पढ़ और 'फट' यह मन्त्र पूर्वोक्त तीन मन्त्रां हाग सुराको अभिमन्त्रित करके उसके ऊपर और. मूलमन्त्र उसके भीतर जपें। इस : कालिकाको प्रदान करें उसके बाद स्यय भोजन करें। प्रकारमे मत्स्य, मुद्रा और मांस शोधित होता है। देवो का घट याम कर इम मन्त्र को तीन बार जप-"ॐ मद्यादि शोधन - . वॉ वी व बैं वो वः ब्रह्मशाप-विमोचितायै सुधादेव्य अपने बाई तरफ षट्कोणान्तर्गत त्रिकोण बिन्दु . नमः।' एमके जपनमे ब्रह्मशाप विमोचित होता है। लिग्व कर वृत्तचतुरस्र विधानपूर्वक मामान्याोदक शुक्रगाप-विमोचन- हारा अभ्य क्षित करके उR पर "प्राधारशक्तिभ्यो नमः" "ॐ शाशों शौँ शा शुक्र शापाहिमोचि. इम मन्त्रकै हारा पूजा करें। तार्य सुधादेव्यं नमः" इस मन्त्रको दश बार जपनेमे शुक्र- "नमः" इम मन्त्रक हाग प्राधारपात्रको प्रक्षालित करके उसे मण्डनक अपर रक्खें और "महिमगडलाय का शाप विमोचित होता है। दशकलात्मने नमः" इम मन्त्र के बारा पूजा करके "फट" वष्णशाप-विमोचन-- इम मन्त्रके हारा कन्नम प्रक्षालित करें। रतवम्ब और "एँ ह्रीं श्रीं क्रॉ क्रों के कौँ : माणगाप माल्यादिसे विभूषित कर आधारके ऊपर देवी मान कर विमोचय अमृत श्रावय श्रावय स्वाहा" इस मन्त्रको उसको मापित करें। उसके बाद 'मवझिमण्डलाय । दश बार अपने कृष्णशाप विमोचित होता है।