पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२७५

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भाग। तपस्-तपस्या २७१ उत्सादन के लिये प्रात्माको यथेष्ट पीड़ा पहुँचा कर जो । पौर जो शिलोव्छ वृत्ति द्वारा अपनी जीविका निर्वाह तपस्या को जाती है, उसे तामस तप कहते हैं। (गीता) | करते, ओ पोषकालमें अत्यन्त कठोर पञ्चाम्मिसाध्य पातञ्जलदर्श नमें सपस्याको क्रियायोग बसला कर तपस्या करते पोर जो वर्षाकालमें स्वण्डिलथायो, हेमन्त वणित है। और शिशिर कालमें जल में प्रवस्थान कर तपस्या करते शास्त्रान्तरोपदिष्ट चान्द्रायण प्रभृति तपस्यासे चित्तको है वे ही इस लोकके पधिकारो । शुद्धि होतो ओर मनको एकाग्रता उत्पन्न होती है। जो चातुर्मास्य व्रत प्रभृतिके अत्यन्त कठोर नियम ___ तपस्यासे मनुष्य अभीष्ट फल पाते हैं। तपस्वासे पाप पालन करते और रखरमें सदा लोन रहते, वे ही निमंयसे क्षीण होता है और मनुष्य स्वर्ग को जाते और वहाँ यश इम लोकमें वाम करते है। (पद्मपुराण) १४ पग्नि, पाते हैं। इम लोकमें और परलोकमें मनुष्ाका जो कुछ अभिनषित रहता है, वह एक तपस्याम ही प्राप्त | तपम (स.पु.) तप-अमर्छ । १ सय । २ चन्द्रमा । ३ पक्षी। होता है। ___म जगत्म तयाभिन मनुष्योंसे कुछ भी अमाध्य तपसा (हि स्तो०) १ तपसारा, तप । २ तापतो नदीका दूमरा नाम । यह बैतून के पहाड़से निकाल कर खम्भात- नहीं है। मनु के मतानुमार ब्राह्मणों का एकमात्र जान हो को ग्वाडोमें गिरतो है। तप' है। ब्राह्मणों को केवल वही काम करना चाहिये तपमाली (हि.पु.) तपस्खो। जिसमे ज्ञान उपार्ज न हो। रक्षा करनो ही क्षवियाँका तपमो (हिं पु. ) तपमया करने वाला, तपस्यो। तप है । क्षत्रियांका उचित है कि वे ब्राह्मण, वैश्य और तपमो मइलो (Eि स्त्रो० ' बंगाल की खाड़ी में मिलने- शूद्र इन तान वर्णीको विशेष गवसे रक्षा करें। रक्षा हो वाली एक प्रकारको मकन्नी । इसको लम्बाई लगभग एक उनको एकमात्र तपस्या है। वैश्यांकी वार्ता हो । कृषि बालितको होतो है। बडे देने के लिये यह वैगाख वाणिज्य प्रभृति। एकमाव तपस्या है। शूद्रकि लिये या जेठ माममें नदियों में चली जाती है। पहले तीन वर्गको मेवा हो तप है। तपसोराम -हिन्दोके एक कवि। ये जातिके कायस्थ थे। "ब्राह्मणस्य तपोज्ञान' तप: क्षत्रस्य रक्षणम् । मारन जिले के मुबारकपुर ग्राममें इनका घर था। वैश्यस्य तु तपो वार्ता तपः शूदस्य सेवनम् ॥" तपसोमूर्ति (म पु०) बारहवें मन्वन्तरके चौधे सावर्णि के (मनु १११५६) मनषियमिसे एक। ( हरिव श अ.) मत्ययुगमें तपस्या, त्रेतामें ज्ञान, दापरमें यज प्रधानतः तपस्तक्ष (म पु०) तपः तपस्या तक्षति तन करोति तक्ष. कलियुगमें दान हो प्रधान है। (मनु १४६) अण । पन्द्र। ब्राह्मणों के विधिपूर्वक वेदाध्ययन हो तपस्या है। तपस्पति ( स० पु० ) तपसां पतिः, ६-तत् । हरि, विष्णु । ( मनु २११६६ ) तपःसिद्ध ब्राण तपस्या हारा त्रिभुवनः तपसा ( म० पु० ) तास साधुः यत् । १ फाला न मास, का अवलोकन कर मकते हैं। १० माघ मास, माधका फागुनका महीना। २ अनुन, अर्जुनका एक नाम महोना । ११ नियम । १२ धर्म । १३ ज्योतिषोक्त लग्न- | फाल्गुन था, इमोलिये तपमा भो पर्जुनका नाम हुमा स्थानमे मवम स्थान, ज्योतिष में लग्नसे नवाँ मान। १४ ' tato) कन्द पुष्प। ४ तपश्चरण, सयमा । ५ सपोलोक। यह लोक जनलोकसे जपर पौर अत्यन्त तापस मनुके दश पुत्रमिमे एक : (हरिव ४२४) तेजोमय है। . तपस्या (सम्बो०) सपश्चरति तपस-क्वड । कर्मणी रोमन्थ- जो.वासुदेवमें अत्यन्त भतिपरायण है और जो अपना तपोभ्यां वर्तिचरो। पा ३॥११५॥ ततोप, ततः टाप । १ व्रत- ममस्त कर्म परम गुरु श्रीक्षणमें अर्पण करते जो तप. चर्या, तप। दमक महत पर्यायव्रसादान, परिचर्या, स्थासे श्रीक्षणको सन्तुष्ट रखते और जिनकी मव अभि- नियमस्थिति और व्रतवर्या । तपस् देखो। २ फालान- साषा परित्या हो गई। वही सलोव वास करते / मास, फागुनका महीना।