पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२८३

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समकोही २७ गया ४२ गॉव इस राज्य के है । राजाको उपर्युना २७६ पुत्र वर्तमान राजा इन्द्रजित् प्रताप बहादुरशाही गन्धा गाँवोंकी मालगुजारो १२७७८६) रुपये वार्षिक सर- धिकारो हुए। आप बड़े सविन. उनतिशील, नवयुवक कारमें देनी पड़ती है। इसके अतिरिक्त दरभंगा तथा पुरुष हैं। पापने लखनऊ कालविन तास कदार स्क लमें मुजफ्फरपुरके जिलों में भी ८४ गाँव लगते हैं। इस प्रकार तथा अपने घर पर अनुभवी पण्डितों और गव टके उच्च इस राज्यके कुल गाँवोंको संख्या ४६० है, उक्त ८४ गाँवों कर्मचारियोंमे शिक्षा प्राप्त को है। को वर्तमान राजा माहब के स्वर्गवामो पिताजोने मुज- उक्त राजा माहच उर्दू, हिन्दी, संस्थान तथा पंगेरेजो फ्फरपुर जिलान्तर्गत सुरमण्ड-नरेश राजा रघुनन्दन भाषामें निपुण होते हुए, अश्वारोहण तथा पाखेट प्रादि. सिंहजीसे प्राम किया था। में भो भलो भाँति कुशल है। आप १८११ ई०के दिलो- तमकोही-नरेश भूमिहार ब्राह्मण है। काशी-राज- दरबारमें सम्मिलित थे और उस समय पापको वहाँसे वंशके साथ आपका धनिष्ट मम्बन्ध है। इनके पूर्वज पहले सम्मानास्पद एक रौप्यपदक भी मिला था। दीन तथा बिहार-उड़ीमा प्रदेशान्तगत जिन्ना सारनमें हुमेपुरक प्रमहायों के प्रति आपको दयादृष्टि मर्वदा रहतो है। अधिपति ये । मुगल माम्राज्य में इनके पूर्वज राजा कल्याण- प्रजावात्मला पापम पूर्णरूपमे विद्यमान है । राज्यशामन. शाही मबसे अधिक प्रभावशालो हुए । फलतः तत्का. मगजा माहवको मनोयागिता एवं प्रजाको पार्थिक लोन टिल्लो बादशाहने उन्हें गजाको सपाधि दो और अवस्थाको उबतिम दत्तचित्तता विशेषरूपसे साधनोय माथ ही एक डंका, एक पताका तथा एक मनमबदार है। आपने ग्रहशिल्प के प्रचारार्थ अपने राज्य में कई मत्स्याकति मुकुट ( माहेमगतिब ) भी दिया था। कारखाने खोल रखे हैं। गजा कल्याणशाहो के कठे वंशधर राजा गन्धर्वशाही विगत यगेवाय महायुद्ध में वर्तमान राजा माहबने उपनाम हमोरगाहोने दिलो-अधिपति महम्मदशाहका गवर्म गटको विविध प्रकारम यथेष्ट महायता कर राम- विशेष उपकार किया था। अत: उपर्यन अधिपतिने एन्हें भक्तिका पूर्ण रूपमे परिचय दिया था। फनतः युहरि- पुरस्कारस्वरूप एक उपाधिविशेष एवं मिहाजित पदक षदमे आपको पुरस्कारस्वरूप एक मनद, तथा प्रान्तीय प्रदान किया। गजा हमीरशाहोके तोय वंशधर राजा मरकारमे मम्मानसूचक एक तलवार भी मिलो था। फतहगाहोने अपने कनिष्ठ भ्राता के माथ मनोमालिन्य अइनमभा के आप सदस्य भी हैं। होने के कारण अपनी प्राचीन राजधानो हमेपुरको छ'ड राजा मासबका निवासस्थान तमकोहोंमें है। यहाँ दिया और गोरखपुर जिलान्तर्गत तमकोहो नामक ग्राम- एक प्रकागड़ राजप्रासाद एवं पत् प्रालिकायें, एक में एक नई राजधानो स्थापित को। राजाखड्गबहादर उन मन्दिर. सुरक्षित दग, नया चारों ओर फमोन हैं। शाहोने अपने राजत्वकालमें अटिश गवरम एट से भो अपनो राज प्रामादक ममोप हो दक्षिण और लक्खोवागमें एक वंशपरम्परागत "राजा" उपाधिको सम्मानित कराया। सुमनोहर और सुसज्जित बंगला है जिसमें उच्च कोटि के उन्होंने अपने नाना टिकारी-नरेशसे विशेष स्थावर सम्पत्ति भारतीय और यरोगोय अनिधि निवाम किया करते हैं। प्राप्त कर तमकोहो राज्यको प्राय बढ़ायो थो। तक होमें एक पोष्ट आफिभ, तारघर, मिडिल वर्ना. वर्तमान राजा इन्द्रजित्पताप बहादुर शाही के स्वर्गेय क्य लर स्कू ल जिममें अंगरेजोको भो शिक्षा दो जातो है, पिता राजा शत्र जित्पताप बहादुर शाहीन मुजफ्फरपुर अपर तया लोअर प्राय नरो स्कूल, ज्योतिष और व्याकरण जिलान्तर्गत सुरसगड-अधिपति राजा रघुनन्द नमिहको शिक्षा देने का संस्कृत पाठयाला, एक माधारण पुस्तकालय पौत्रीसे विवाह किया और उनसे प्रचुर स्थावर सम्पत्ति । तथा एक दातव्य चिकित्सालय भो है। उक्त राजा प्राल कर राज्यको पायको और भी बढ़ा दिया। साहबने एक नोल, एवं चोनोका एक तथा दो सन् १८८८०के पकवर मासमें गजा शव जित्- और कृषि विभाग के फार्म खोल कर अपनी प्रमाया- प्रताप बहादुर माझीके स्वर्गवास होनेपर उनके सुयोग्य | का विशेष उपकार किया है। तमकोहीमें प्रति वर्ष