पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२८५

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तमा वर शुत राजाको सो सन्तोषप्रिया मथा माणप्रियाके अधि- म उपविभागका भूपरिमाण ६५३ वर्ग मोल है। कारमें पाया। रानो सतोषप्रिया के दत्तक और क्षण- इसमें १५२२ ग्रान लगते है। १८५१ १.० नवम्बर प्रिया के गर्भ जात पुत्र थे। उन्होंने क्रमगः राज्यकामासमें तमलुक उपविभागमें परिणत हुआ है। यहाँ तथा ॥ पाना अंश पागा। १८.५ ई में ॥ अनिके ६१५ एकड़ जमोन आगोर है। लोकमख्या पायः हिमदार प्रानन्दनारायणगय । न हिदार ५८३२३८ है। शिवनारायणायके विरुड एक दोवानो मुकदमा चला २ उन तमलुक उपविभागका सदर। यह पक्षा. कर उनको सब मम्पत्ति के अधिगे हो गये। प्रानन्द- २२.१८ उ० ओर देशा० ८७°५६ . पर मेदिनीपुर नारायणने अपुत्रक अवस्था में प्राणत्याग किया। उनको जिले के दक्षिण-पूर्व में रूपनारायण नदोके ऊपर दोनों स्त्रोने लक्ष्मीनारायण राय गौर रुद्रनारायणराय अवस्थित है। समलक शहरमें म्य निसपालिटिका अच्छा नाम दो दत्तकपुत्र ग्रहण किये । इन्होंने मारो मम्पत्ति बन्दोवस्त है। यहाँ विभिन्न धर्मावलम्बो लोग वाम पापा में बॉट लो। किन्तु दोनों भाइयों में परस्पर विरोध करते हैं, हिन्दू को संख्या सबसे अधिक है। तमन्न क को जानेमे धोरे धोरे दोनाको सम्पत्ति जाती रही। शहर मेटिनोपुर जिले का प्रधान वाणिज्य केन्द्र है। तमलुक पग्गर्नमें कई एक बाँध है; इमो कारण बाद- आधुनिक इतिहासमें तमलुक बोडोंका एक बन्दर से देश बन नहीं जान गङ्गा और रूपनारायण के निकट कह कर वर्णित हुआ है । ५वौं शताब्दोके पूर्व : तमन्नुक अवस्थित है। इमोसे इम प्रदेश उत्पबद्रय बहुत भागमें प्रसिद्ध चोनपरिव्राजक फाहियान इसो स्थानसे आमानोमे दूमरे दूभरे स्थानों में भेजे जा मकते हैं। मामुद्रिक जहाज पर चढ़ कर मिचल देश गये थे। चावल, नारियन्न, मस्तूत और तरह तरहको माक समोइमके २५० वर्ष पोछे युएनचुयाङ्ग तमलु कमें पाये थे। इम परगने का वाणिज्यद्रव्य है। यहाँ चिरस्थायो बन्दो- : उन्होंने भो तमलुकको बौद्धधर्म का लीलाक्षेत्र के जैसा बस्त प्रचलित है। । उल्लेख किया था। उनका भ्रमण पुस्तक पढ़नेसे मालम तालुककै अनेक अधिवासो पूर्व ममय में नमक तैयार होता है, कि यहाँ बहुतसे बौदमठ और बौद्ध-मन्यासो कर जीविकानिर्वाह करते थे । यहाँका नमकका व्यवः तथा महाराज प्रयोकका बनाया हुआ २५० फुट अचा साय बहुत प्रसिद्ध हो गया था। जबसे यह प्रदेश गव- एक स्तम्भ था। बौद्धधर्मको अवनति के बाद भी यह मंगट के अधीन आया, तबसे यहॉका उक्त व्यवमाय नष्ट स्थान मामुद्रिक वाणिज्यका आगारके जैमा वर्णित है। हो गया है। अभी तमलुकवामो नमक तैयार नहीं का बहुतसे धनी बणिक और जहाजाधिकारो इम बन्दरमें सकते हैं। हम कारण अनेक दरिट्र लोग बहुत कष्ट वाम करते थे। नोन, सहसूत, पथम पोर वा तथा पाते हैं। उड़ीसेकै बहुमूल्य द्रयादि प्राचीन तमलु नगरमे विदेश- तमलुक गङ्गाके महाने के निकट अवस्थित है। योसे को भेजे जाने थे। पहले नगरके पाम हो ममद बहता १२वीं शताब्दो तो विभिन्न देशों से वाणिज्यके जहाज था। ममुद्र के बहुत दूर हट जाने पर भी वापिन्धको पाया करते थे। विशेष क्षति नहीं हुई है। ६३५ में बुएनत्यागने गङ्गाके पश्चिम मुबाने के निकटस्थ तमलुकके अधिः इस नगरके समीप हो ममुद्रको बहते देना था, किन्तु वासियोंको दमला वा समलिल कहते हैं। पभो समुद्र नगरसे ६. मोल दूर हट गया है। गङ्गाके तमलुक अत्यन्त लमृद्धिशालो देश था, यह अनेक मुहाने पर मट्टोका स्तर बढ़ जानसे तमलुक प्रभो गङ्गासे अन्यों में भी लिखा है। रत्नाकर नामक तमलुकका एक दूरमें पड़ता है। वषकगण कूप और पुश्करिसी गोदते शहर था । म नामका अस्तित्व क्रमश: लोप होताजा समय १० से २० फुटके मध्य बहुसको सामुद्रि : मोप रहा है। रखाकर मामसे ही प्राचीन समलुकको धन. यात है। मासिताका यथेष प्ररिचय पाया जाता है। प्राचीन मब रवपके पासनकालमें लाई चोर दृढ़ Vol. IX.71