पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२८८

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२६४ समले समसा बहुतमे गत्रो, पहले जहाँ विण मन्दिर अवस्थित था वामनपुराणके मतानुमार शोन, नर्मदा. सुरमा, मसो स्थान पर वारुणो पत्र में स्नान करते है। मन्दाकिनो, तपमा. करतोया प्रभृति नटियाँ अत्यन्त ताम्रन्निनके सबम प्राचीन राजा क्षत्रिय तथा मयूर वेगवतो है और ये विध्यपव तसे निकली हैं। वंशोय थे। उनका ऐति"मिक लिसिलेवार विवरण (वामनपु० १६ अ.) नहीं मिलता है। किन्तु वहाँ धान पाँच राजाओंक इस नौका जल अत्यन्त पवित्र, पापविनाशक है विषयमें बहुतमो बात सुनो जाती है। मयरवंशक शेष तथा देवता और पैववादि कार्यमें लाने से यह प्रमोम फल- राजाका नाम निःशङ्गानारायण था। उन्होंने नि:मन्तान प्रद है। यह नदो जगत्को माटस्वरूपा और महा. अवस्था प्राणत्याग किया। इनकी मृत्य के बाद काल मागरको पत्नी है। ( वामनपु० ) भ या नामक किसो माग्ने तामलिसका मिहामन मार्कण्डेय पुराण में इसकी उत्पत्ति दूसरे प्रकारसे हो अधिकार किया। ये कालु भुया ताम्रलिपक कैवत लिखी है । ( मार्क० ५२१२२-५२ ) इसका वत्त मान नाम गजवके आदिपुरुष हैं। पाश्चात्य लेखकों का विश्वाम तोनस है। है, कि कैवत्तं गण आदिम निवामो मैंख्याको मन्तति है तममा-युक्तप्रदेश के गड़वाल गज्य और देहरादून जिनेको और उन्होंने परवत्ति कालमें हिन्दूधर्म ग्रहण किया है। एक नदी । यर अक्षा० ३१५ उ. और देशा० ७४.. वृटिश गवर्मेण्ट के अधीन हम शहरमें फोजदागे मोर पू• पर यमुना नदो उत्पत्तिस्थान के निकटवर्ती यमुना- दोवानो अदालत स्थापित हुई हैं। यहाँ एक थाना, एक के उत्तरी अंगमं अवस्थित है। प्रमुद्रतनसे १२७८४ फुट दातव्य औषधालय और एक अंगरेजी विद्यालय है। 'चे स्थानसे यह नदी गिरती है। उत्पत्तिस्थानसे कक लोकसंख्या प्रायः ८०८५ है। ताम्रलिप्त, मेदिनीपुर और दूर तक इसको चोड़ाई २१ फुटसे अधिक नहीं है और भयनागढ़ प्रभृति शब्द देखो। गहराई भी घटन तक है। ३० मोल तक यह पश्चिमको तमलेट (हि. पु०) १ एक प्रकारका टोन या लोका और बहता है । कहीं कनों इसमें कई एक सोते भी है। बरतन । २ फोजी मितियोंका लोटा । ३० मोल जान के बाद य रूपो नदासे मिल गई है। उस तमम ( लो. ) साम्यत्यनेन तम-असुन । सर्वधातुभ्यो जगह इसको चोड़ाई १२० फुट है फिर १८ मौल : बाद ऽसन् । उण ४/१८८ । १ प्रकतिका एक गुण । २ अन्धः यह पावर नदीके माथ मिलता है। उम स्थानसे उता कार अंधेरा।३ अज्ञानका अन्धकार। मिली हुई नदियों जोनसर बबार तथा जुब्बल ओर शिर तमस (B'. १०) सम-अमच। अन्यविच मतमीति । मुर राज्य के सीमाक्ष्य में प्रवाहित हैं। इस जगह तमसा लण ११११७४१ कूप, कुत्रां। ३ चन्धकार, अधेिशको नदी बहुतसे अचे. मय गहरके मध्य हो ३ नगर । ४ अज्ञानका अन्धकार । ५पाप तमसा कर प्रायः ठःक दक्षिण का पार चली गई है। कहतर नदो। भागे बढ़ कर यह गलवा नदो माथ मिलता है, बाद सममा (स स्त्री०) तम इव जलमस्त्यस्याः तमम अचः अक्षा० ३०३ उ० और दशा० ७७०५३ पू के मध्य टाप। नदोविशेष, एक नदोका नाम। यह एक तोथे- यमुमाम जा गिरो है। स्थान माना गया है। जिसका नाम स्मरगा करनसे समस्त तममाको लम्बाई प्रायः १.० मील होगी। यमुना के पाप नाश होते है । उसोका नाम तममा है। साथ मङ्गमस्थान पर यह यमुनासे कुछ बड़ो दोख पड़तो "यस्याः म णात् ताम्यति पापं सा तामसा।" (जयम गल) है। सुतरा यहो प्रधान रूपमें गिनो जा सकता है। - थोरामचन्द्र जान वन आर्त समय सो नदी के किनारे उत्पत्तिस्थानसे यह नदो २६ माल दूर बायें किनारे प्रथम रात्रि व्यतीत की थी। सुमन्त्रन रामचन्द्रजीको रमी होतो हुई जब्बलपुरसे इलाहाबाद के रास्ते तक चलो गई नदी किनारे तक पहुंचा दिया था बाद दूसरे दिन है। इलाहाबादसे मिर्जापुर जाते ममय तमसाके मुहाने १.वैरै व अयोध्याको लोट पाए। (रामा० २१४५ ०.) से १२ मोख.दरमें इस नदीको पार करना पड़ता है।