पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२९

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टॉर-गवता CA गवर्नर जनरलने इनके इस कार्य को प्रशमा को है। यद्यपि फिलहाल ऐतिहामिक दृष्टिमे आपके ग्रन्यमें १८१८ ई० में राजाताने के मानन्तगण ब्रिटिश गति में बहुतमी भूने निकल रहो है तथापि आपको नवन- अधीन मित्रतापूर्वक रहनेको गजो हो गये और माथ ही शैलो और उारको धार। इम ग्रन्यको उपादेश धमाय टोड माहब पशिम गजपूतानेके गजनीतिक दूत नियुक्त रकवं गो । १८३८ ई० में अापका "पश्चिम-भारत भ्रमण" हो गये। ये गजातजाति के अत्यन्त विश्वामभाजन हो नामक और एक अन्य नन्द नमें प्रकाशित हुआ है। गये थे। कार्यभार ग्रहण करने के बाद एक वर्ष के भीतर टाड़ स्त्रिो ) एक प्रकार का गहना जो भुजा पर इन्होंने वहां व्यवमायको काफी पवति हो गई थी पहना जाता है, टाँ उ. बहटा। और करीब तीन मो उनाड मात्र फिरमे जम गये थे। टाडर ( त्रिो ) एक पतोमा नाम । १८२५ ई में जिम ममय विगप हिवार गजाताना पनि टागाडा - १ युक्त देश के फैजाबाद जिलेको एक सरसोन । दर्शन करने आये थे, उम ममय उन्होंने सना था कि यह अक्षा० २६८ मे २६४० उ० और देशा• ८२ २७ टांड माहवने राजपूतानाको जमो उन्नति को है, पो से ८३८ पू में अग्थित है। दममा भूपरिमाण ३६५ ओर किमोने भी नहीं को ' टॉड साहच राजपून गजा वग मौन और लोकमख्या प्राय: २४८४१२ है। हम ओं को इतनो ने क नजरसे देवते थे, कि कलकतंको तहमोलमें तान शहर और ७३५ ग्राम लगते हैं। गवर्म गट ममझतो थो कि टांड मात्र गायद घूम लेते । तहमोनको कुछ जमान गोगग ( घर्घरा) नदोके किनारे होंगे। दम प्रकार के हे महोन मन्द किये जाने पर रहने के कारण तर और नीचो है और फमल प्रायः नहीं टॉड माहबन कायं छोड़ दिया। पोके गवर्म गट को लगती है। लेकिन चो जमीन बह उर्वग है भोर माल म हो गया कि टॉड मारव मचमुच हो राजपूतों के काको अनाज उत्पन्न करती है। वहां झोन को अपेक्षा हितैषी बन्ध थे वे घम न लेते थे। कुएं मे जन्न मींचम विशेष सुविधा है। १८२३ ई० में टॉड माहब बम्बईभ गन्ने गड़ लौट २ युकप्रदेशके फैजाबाद जिन को इमो नामको तष्ठ गये। इनके जीवनका शेष भाग राजपूताने में मग मोलका एक शहर । यह अक्षा० २६३४ उ. और देशा. होत ग्रन्यादि प्रकाशित करने में व्यय हुआ था। रागन ८२४. पू मध्य गोगरा नदी किनारे अवस्थित है। एसियाटिक मोमाइटोंमें इन्होंने राजपूताने के विषय में कई लोकमख्या प्राय: १९.८५३ है । यह शहर अवध रोहिल. एक निबन्ध पढ़े थे और कुछ दिन उक्त मभा के नाइन खगड रेलवे के अकबरपुर मेशनसे १२ मोल दूर पड़ता रियन नियुक्त थे। है। १८वों शताब्दों के अन्त अवध के नवाब स्वादत अलो १८२७ ई० में इन्होंने सिन्धियाके पुराने फराभोमी खोन इम नगरको बहुन उन्नति को तथा कई एक गज्य- में नापति काउण्ट डो० बयन के साथ मुलाकात की। भवन बनाये। उम ममय यह नगर तरह तरह के कपड़े १८३५ ई० तारीख १७ नवेम्बरको, ५३ वर्षको उमरम बुनर्नका भारतवर्ष में एक प्रधान केन्द्र गिना जाता था। आपने लन्दन के डाकर ल टरबुकको कन्याका पागि- अमेरिकारे भीषण गृहयुद्ध के समयसेहो यहाँका वाणिज्य ग्रहण किया। आपके एक कन्या और दो पुत्र थे। कुछ होन होता आया है। प्राज भी यहां ११००से अधिक टॉड साहबने रॉयल एसियाटिक मोसाइटोकी करधे चलते हैं। जामदानो नामका मलमल कपड़ा पत्रिकामें प्रनतत्त्व-विषयक अनेक निवन्ध प्रकाशित यहाँका प्रमिड है । इस नगरमें केवल तोन विद्यालय हैं। कगये थे । १८३३ ई में भारतको राजनीतिक विषयको ३ (ताड़ा) पूर्वीय बङ्गालके मालदह जिलेका एक पालोचनाके लिए हाउस ऑव कॉमन्समें विचारार्थ जो प्राचीन नगर। यह गोड़ के निकट गङ्गाके दूसरे किनारे बैठक हुई थी, उसमें मि टॉडने पश्चिम भारतको राज. अवस्थित था । गौड़ नगरके ध्वस होने पर कुछ काल तक नोति विषय में एक सुबहत् मन्तव्य पेश किया था। यहां बङ्गालको राजधानो थो। यह नगर कहाँ पर स्थापित पापका नाम केवल "राजस्थान" हो पमर रक्खेगा। एषा थां, इसका पूरा पता नहीं लगता है। शायद यह Vol. Ix.7