पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३००

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


समाचा-मालिका मौलिए. मब तरह के ग्राहोद्रयामि पल्पानिष्टकर तमाकः । स वृक्षका सार गुरु पोर लष्णवण तथा अपरकी का इतना प्रचार इत्रा है। छान मलिनाम है। पत्ते तेजपत्तको पालतिके होते फिलहान परोक्षा करनमे मान म इपा है, कि हैं। इसको छाया पन्धकारमय और चञ्चल है। इसके तमाक पीनेवालांकि फुस्फमयन्त्र ( फेफड़े ' बहन माघ्र पर्यायवाची नोलताल, कानताल ओर नोलध्वज इन शब्दों टुर्वल हो जाते हैं । काटभुक उद्मिद् देखो। में इसमें नोलवण का नाम्समदृश वृक्षका भ्रम होता है। तमाचा ( फा०प०) थप्पड़, झापड़ । हमके फल भो तालतक जेसा मार है और फल ताड़को समाचागे ( म० ए० ) सक्षम, दैत्य, निशाचर । प्राकृतिके हैं: इमलिए मोलतालको कालताल करते तमादो ( अ० स्त्रो० ) १ अवधि वातोत होना, ममय गुजर हैं। तमालदल पषित नहीं होते। ( योगिनीता) जाना । २ एमे ममय का बोत जाना जिसके अन्दर प्रदा ३ तिलकवृक्ष. तिलकका पेड़। ४ खनभेद, एक लतमें किमो दावेको सुनवाई हो मकतो हो सरहको तलवार । ५ वरुणवृक्ष। ६ कणखदिर, कासे तमाम ! अ० वि०) १ मम्म, ण, पूग. माग, विल्कुल ।' ग्वैरका पेड़ । ७ वंशत्वक. बॉमका छान । ८ एक तरह • ममाम, ग्वतम। का मदाबहार पेड़ जो हिमालय तथा दक्षिण भारत में समामो ( फा० स्त्रो०) एक प्रकारका देगो र शमा कपड़ा। इम पर कलाबत्त को धारियाँ होतो हैं। होता है। इसमें से एक प्रकारका गोट निकलता है जो तमारि (Eि' पु० ) मर्य, दिनकर। घटिया रेवद चोनोको भाँतिका होता है। मको मन्होला और डमवेल भी कहते हैं। इसकी छालमे तमान (म० पु. लो० ) तम्यते कांक्षात तम कालन् । एक प्रकारका उमदा पोला रंग निकलता है। इस वृक्ष. तमिविशि विडीति । उण ११११५॥ १ पत्रक, तेजपान । ( १०) में पोषक महोनिमें एक तरहका फल लगता है, जिसे २ वृक्षविशेष. तमानका पेड़। पर्याय कालम्कन्ध, लोग यों हो अयवा दाल आदिमें रमनीको तरह डाल तापिच्छ, नोलताल, तमालक, नोनध्वज, कालताल, महा- कर बात है। यह प्रोषत्रके काममें भो पाता है। लाग वन्न । ( Yanthontinue pictorins) यह वृक्ष देवने । दमका सिरका बनात तथा सवा कर भो रखते हैं। में बड़ा ही मनोरम है। २०मे २७/२८ फुट पर्यन्त ८ स्थलपन। १० कातिल । ११ खेतसुनिषस्मकथाक । इमको ऊंचाई है। भारत में बहुत जग यह वृक्ष होता १२ त्वक , दारचीनो । है। तमानका फल बडा और मफेद होता है। वंशाव मासमें फ ल लगा करते हैं। तमानका फन भो खून : तमालक ( स० क्लो. ) तमाल-पत्रवत् वर्णन कायति सन्दर है, देखते ही खानको जी चाहता है। इसका। केक। १ सुनिषनशाक, सुसमा माग । समालमेव स्वार्थ आकार कमला-नींबू जमा है , ऊपरो हिम्मा बेरको नरम कन् । २ पत्रक. तेजपात। ३ स्थलपन, जमीनमें होने चिकना और पोग्ला है। किन्तु यह फम्न तीव्र अम्बरम वाला एक प्रकारका कमल। (पु.) ४ तमालवाच । तमाल देखो। ५ बॉसको छाल। युक्त है। समका छिलका सबसे ज्यादा खट्टा है । कोमल अंश ( जहाँ बोज होते है ) कुछ कम ग्वट्टा है। किन्तु तमालका [ को ] ( म स्त्रो०) भूधात्री, मुईभावना। इस अंशको ग्वानमे भो किमो किमोर दोन दो दिन तक तमालच्छद (म क्लो. ) सेजपत्र, तेजपात । खट्टे रहते हैं। इतना खट्टापन होने पर भी तमालफलमै समालपत्र (म लो०) १ तेजपत्र, तेजपात । २ वक, दार एक प्रकारका मुस्वाद है। सावन भादमि यह पकता चोनो। मिलक। तब शृगाल एम फलको बहस खाते है। तमालफल- तमालपत्रचन्दनगन्ध ( स० पु. ) बुबभेद। का पाचार सुखाद्य नहीं है। ___ वैद्यकके अनुसार एमके गुण--मधुर वल्य, वृष्य, त समालिका (सत्रो०) तमालाः सम्बन तमास-ठन् । शैत्य, गुरु, कफ, पित्त, सृष्णा, दाह पौर श्रमशान्तिकर। १ सालिम प्रदेश्य, तमलुक। २ साम्बवनो नामको (राजमि.) लता। ३ भूम्यामलकी, रविक्षा । . .