पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३०७

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परदेस - रहेषम् (सं० पु० ) गत्र के पानमन्धकारी, इन्द्र। जरोचक अनुसार ही १९९० को तरफ दशमाला तरनतार (हिं. पु. ) निस्तार, मोक्ष, मुक्ति । बन्दोबस्त हुपा और बाद १७६१ मे यहो दशसाला तरनतारन (हिं० पु. १ मोक्ष, उच्चार । २ वह जो भव बन्दोवस्त चिरस्थायी बन्दोबस्त में परिणात हो गया। सागरसे पार करता हो। १७६४ में जिस जमीनका बन्दोबस्त हुषा था केवल तरमा (हिं० कि०) १ पार करना। २ मुक्त होना, उमो जमीनका खजाना स्वत्व गवण्डने छोड़ दिया। किन्तु सहति प्राप्त करना। तरफदारगण उस बन्दोबस्त के अलावा बहुतमी जमीन सरनाग (हि.पु.) एक पक्षीका नाम । अपने अधिकार में करने लगे। चयाममें गवर्मेण्टपनीय सरनाल (हि.पु.) पालको लोडेको धरनमें बाँधनका चन्दोवस्तकारी रिकेटम मायने दम अधिकारको योगो रम्मा । अधिकारके जैमा वर्णन किया है। तानि (हिं. स्त्रो०) तरणि देखो। रिकेटम माहव अरोध धारा बहुतसी जमोन निकाम्न .तरनिजा (हि स्त्रो०) तरणिजा देखो। कर उमर्क जपर कर निर्धारित किया। १७० में सरनो (हि स्त्री० ) १ नोका, नाव । २ मिठाई का थाल महालको संख्या २३८१ श्रो किन्तु १८४८०के बन्दो. या खींचा रखनका छोटा मोढ़ा। बस्त के बाद समको संख्या ३३२० तथा १८१५ ई. में तरन्त ( म० पु० ) तरतोति त झन् । तृभून हिवमीति । उण ३३७० हो गई। उस समय ४४३,१३७, २० राजस्व १।१२८ ११ समुद्र । २ लव. बेड़ा। २ भेक, मेढ़क। यमुल होने देखा गया है। किन्तु बहुत जमोन नदो के ४ राक्षस । ५ पक्षिविशेष, एक चिडियाका नाम। किनारे रहने अथवा और दमर दूसरे कारणांसे राजख सरन्ती (स स्त्री० ) तरन्त गौरा. डोष । नौका, नाव। कम गया है। तरम्सुक ( को०) कुरुक्षेत्रस्य स्थानों द, कुरुक्षेत्र के तरफका भायतन छोटा है। यह एक थामाझे अन्तगत एक स्थानका नाम । अधीन भित्र भित्र मौज अथवा एक हो मौजेके विभिव तरपण्य (स' को०) तृ-भावे पप नरम्तरण तस्य पण्य। स्थानौम छोटे छोटे शामें विभक्त है। सरफको ऐसो पातर, उतराई, नदी पार जानेका महमल। अवस्थिति और प्राकृतिक विषयमें बहुतोंको भिर भित्र तरपत (हिं. पु० ) १ सुविधा, सुबीता । २ पाराम, चैन, धारणा है। कोई कोई कहते हैं, कि हुमायूं पोर मेर- शाहक बगवर आक्रमण के कारण गौड़अधिवासोगण तरपन (हिं. पु. ) तर्पण देखो। श्रीहोर चट्टग्राम जङ्गलमय प्रदेशमें पा कर वास तरपना ( हि क्रि० ) तडपना देखो। करने लगे। वनदेशके सूबेदार अथवा उनके करद जमों- तरपर (हि.क्रि.) १ नीचे अपर । २ क्रमानुगत, एक दारोंको प्रधानता खाकार न करके ये पहले खुसवाम पोछे दूसरा। अवस्थामें रहते थे। ये हो खमवासगण चाग्राममें तरफ. तरपू(हि.पु.) मलवार और पश्चिमघाटके पहाड़ों में दार नामसे परिचित हैं। गौड़ अधिधामो भित्र भित्र मिलनेवाला एक प्रकारका पेड़। दलमें चट्टग्राम पाये थे। यहाँ विस्तर जमीन देख कर तरफ (प. खो०) १ दिया, भोर। २ पाख, किनारा, वे अपने इच्छानुसार एक एक स्थानमें वाम करने लगे। बगल। ३ पच, पासदारो। प्रत्येक अधिनायकने अपने वशीभूत लोगों के लिये कितनो तरफ-बालके चाग्राम विभागका एक प्रधानं जमीन- जमीन मो अधिकार कर लो। बचा खुचा भूभाग चग्राम विभाग । इस विभागसे अधिक राजस्व वसूल होता है। कौंसिलको घोषणाके अनुमार १५६५ से १७६० के १७६४०में गवण कोमिलने इस विभागके जमीं- अन्दर बहुत से विदेशियों के अधिकारमें पा गया। जरो- दागेका स्वत्व सिर कर दिया। जमींदागेका अधिळात बके समय जो सब जमीन अधिनायकके पधीन थी, गव. मशन माप करके बन्दोबस्त किया गया। १७५४वो मण्टने उसकी गिनती तरफ कर ली। किसो दूसगै