पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३०८

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३०४ कल्पनासे हम लोगों को पता चलता है, कि एक व्यक्तिक । तरजालिका (स खो०) करपालिका पृषो माधुः । बन्न अनेक उत्तराधिकारी थे ! वन राशियों ने जमीन भेद, एक प्रकारका कटार । खङ्ग देखो। पापममें विभक्त करना। .क्रम, एक एक महा- तरबूज़, तर्बुज (फा• पु०) फनविशेष, एक प्रकारका जमने अनेक अधिकारियांका अंग्वरोद किया। १९६४ - फम्न जो लौकी या कम्हड़े को तरह गोलाकार और में एक एक महाजनका अधिक्कन विभाग उसों के नाम बड़ा होता है। हम फन के भोता पानोकाश अधिक पर तरफरुपमं गिना जाने लगा। तरफको उत्पत्तिके ! है। संस्कृत पर्याय -तरम्ब ज, कालिन्दक, कणबोज विषयमें तोमरा मत भी प्रचलित है । १७६४ ई. में और फलवतुल । हिन्दो में इसे कलौंदा करते हैं । गुण- बन्दोचम्तकमचारियों को कार्य में पारदर्शिता के कारण गौतन, मनरोधक, मधुरम्म, मधुर पाक, गुरु, विधि, पुरस्कारस्वरूप बहतमो जमीन मिनो था। उप जमीन- अभिष्यन्दकारक तथा दृष्टि गति, शुक्र और पित्तनाशक । को मन्होंने एक एक महालक अन्तगत कर लिया । यो पके फल के गुण-पित्तवृद्धिकर, उष्ण, सार तथा कफ महाल अन्तम तरफ नामसे प्रसिद्ध हो गया है, चट्टग्राममें और वायुनाशक । इसके पत्त तिक्त और रतस्थापक हैं। कान नगो नामके अनेक तरफ हैं। ( पथ्यापथ्यवि. ) ज्येष्ठ मासकी पूणिमाको भई रात्रिक कन्नेकरो हिमाबमे चट्टग्राम में ३३०८ मख्यक ममय महाकाली सृष्णातुरा हो कर पिथकाननमें भ्रमण तरफ देखे जाते हैं। जिन्ने । मध्यभागम की तरफ को करती हैं, ऐमा ममझ कर ब्राह्मण जो उनके उई श्यमे मख्या अधिक है। उत्तरांशाण फटिक चरो यानाके प्रधान माबूज चढ़ाते हैं, उमसे हरप्रिया महाकानो परिटश हो इमको मख्या कुछ कम है। कर वर देतो हैं तथा चढ़ानेवाम्ना चिरायुः होता है। तरफदार ( अ० वि० ) पक्षपातो. समर्थक निमायतो। इसलिए ज्येष्ठ मामकी पूर्णिमाके दिन पाधोरातके तरफदारी (प. स्त्रो०) पक्षपात। ममय महाकालीको तरबूज चढ़ाना उचित है। तरफराना (हि.क्रि.) तरफदाना देगे। (उत्तरकामाख्यातन्त्र ) तरब (हिं० पु. ) मारणों सार। ये तांत के नोचे एक प्राचीन महाहोपके प्रायः मभी देशों में सरबूज पाया विशेष ढङ्गमे लगे रहते हैं। जाता है। उष्णप्रधान देशों में ही इमको ज्यादा उपज तरबगल-युक्त प्रदेश गोगड़ा जिलेको एक तहमाल । है। गुजरातो रसको तरबूच, तरबूच और तरमूज और यह पक्षा० २६४६ और २०१० उ० तथा देगा० ८१ संस्कृत में तरम्ब ज कहते हैं। फारमोमें इसको दिन- ३३ और ८११८०पू०में अवस्थित है। सपरिमाण ६२७ पमन्द और कचरेहन तथा अंग्रेजी में वाटर-मेलन कहते वर्ग मोल तथा लोकसंख्या ३६४८८३ है। यहाँ हिन्दू हैं। ( Citrullus incurbita. ) मुमनमान, ईमाई प्रभात वाम करते हैं हिन्दूको तरबजके पत्ते गोल और बीच में कुछ गहरे में होते मख्या सबसे अधिक है। नवाबगञ्ज, दिगमिर, महादेव ' हैं। फल गोल और बड़ा होता है। इसका छिलका गुमारि ये चार पागने तमगन तरमोन के अत्तगत हैं। चिकना, धोर मन और चित्रितवत् होता है। पके तर इममें ५४६ ग्राम मथा नवाबगञ्ज, कोलोनलगञ्ज नामके बजका खाद्यांश पौत, पाटल अथवा रतवर्ण है पौर शहर लगते हैं। इन मिसागको वाषिक प्राय प्रायः काका मध्यभाग मफेद। सब तरबूज के बोज एकसे ४६०००० है । १८८५ ई-का दम तरसोनमै १ दीवानो, नहीं होते ; किमोके लाल पौर किसीके काले नोले : २ फौजदारी अदालत, ४ याने. ८० पु लम कम चारो आदि होते है। तरबूज फटको जातिका है, पर इसमें बौकीदार थे। जन बहुत ज्यादा होता है। तर बतर ( फा० वि० ) पाद्र, भोगा हुआ। भारतमें प्राय: मर्वव हो तरबूजको खेतो होती है। तरबहना ( हिं• पु० ) ठाकुरका को मन करानेका एक | उत्तरांशमें यह कुछ अधिक उत्पन होता है। स्थानीय बरतन जो सबि या पीतलका होता है। पधिवासी और य रोपीय लोग इवे पर पक्षदरते