पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३०९

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तरबून-वरवाली है। पोष और माघ मास में इसको खेती होती है था तेा बनता है। यह जलाने के काममें पाता है। कही ग्रोमकाल के प्रारम्भमें ही यह उत्पन्न होता है। असमयमें कहों के लोग रस सेलसे खानेको चोज भो बनाते हैं। वृष्टि अथवा ओले पड़तसे इनको फम न मागे जातो है। शौत्य सम्पादक पोषध बनाने के लिए तरबूज के बोजो. युत्ता प्रदेशमें कालिन्द नामक एकता वा तरबूज मिलता का प्रयोग किया जाता है। तरबूज के घोज विक्रयार्थ है, जो जेठ महीने ईख के खेतों व या जाता और तैयार रहते हैं तया इमको खपत्र भो काको होतो है । कति कमें पकता है। ग्रेट-विग्नमें तावूनको खेता ख व दमके गुग -मूवोत्पादक, शोतलकारक ओर बनकर कम होता है पर वो मानांको घर पिय हित है। बम्बई-भिागानोमा अधिक प्रचलन है। तरबूज- दक्षिण अफ्रीकाका तरबूज साधारण तरबूज कुछ का जल बोने से टणा और मस्तिक-स्वर पचन निवा. निराला होत है। अफरोक में यह मत्रपया जाता रहता है। डापतनाने दुको व्यवस्था देकर है। चीनदेशमें भो तरबूज होता है। चम लाग उम यथेष्ट फल पाया था। साबूज को ज्यादा खान हैं. जिमझा मध्यांग लाल हो । तरबूज के बोज वे हुए और चपटे होते है. पर य, योय, म्ये नाय, इम्प रियन योर कंगन्निना लोग मनको प्राकृति एगे नहीं होती। बोजां को सुखा कर तरबूजका सर्वाक्कट फन कहते हैं । वगा पार ज्येष्ठ ___रखनसे उनको मिगी खाई जा सकती है। माममें अङ्गदेगा हर एक बाजार वा हाटमें अमख्य तर प्रदेग विगेषत: अयोध्याको बहुतसो जमोनों में बुज बिका मारते हैं। तरबूज उत्पन्न होते है। बोकानरमें स्वभावतः बिना बोये ___ निनियमका कहना है कि ताबूज इटनो देश बहुत तरचूज पैदा होते हैं। यहाँ तरबूजको मख्या निणांगत पृथिवा अन्यत्र प्रचारित हआ है। किन्तु इतनो ज्यादा है, कि सानमें कई महीने तो यहो मेरिके सतप, यह भारतवर्ष ओर अफरोक का फल लोगां का प्रधान वाद्य हो जाता है। दुर्भिक्ष पड़ने पर है। निमिष्टान : विवरा पढ़नमे सार होता है, कि लोग तरबूज़मे तथा उन जातोय फलके बोजोंसे एक अकरकाको बहुतमो जपान तरबूजाम छा जातो है; तरह का घाटा बना कर जोवन रक्षा करते हैं। युतप्र- वहाँकै असभ्य अधिवासा तया जाना जानवर इसे देगमें जैमा स्वादिष्ट तरबूज होता है, वैमा भारतवर्ष में खाया करते हैं। जिन स्थानों में ग्राम प्रारम्भमें अत्यन्त और कहीं भी नहीं होता । इस तरबूज को सवत्र शोतलता पदक शाक मना नहीं होतो, वहाँ तरबूज मिहि है। गर्मि या में लोग इमका सरबत बना कर पोया आदि फल बहुत होते हैं। बहुत प्राचीनकालसे हो अफ करते हैं। रोका और एशियाम तरवून का प्रचलन चला आ रहा है। पतली विष्ठा तरबूज़ को जमोममें माररूपमें व्यवहत यह किन देशमें मचम पहले उपजा था, इमका निर्णय होता है। करना असम्भव है। भारत के बहुतमे प्रचोन ग्रन्थों में तर- तरबूजिया (हिं. वि. ) जिम का रंग तरबूज के छिलके बुजका उल्लेख मिलता है । ग्रेटवटन, १६वीं शताब्दोसे रंगसा हो, गहरा हरा । पहने तरनज नहों मिलता था और यह भोपाज तकतरमाचो हिंस्त्रो०) तरवाची देखो। निर्णीत नहीं हुआ, कि पह ने पहल किम देशसे इमको तरमाना ( म० पु. ) तर-शानच् । वह चोज जिसके द्वारा प्रामदनो हुई । प्राचीन इजिप्टवासियों के चित्र देखनेसे नदी इत्यादि पार होता हो, नाव इत्यादि । 'मान म होता है, कि तरबूज को खेतो करते थे। तम्मानो (हि. स्त्रो०) वह सरी जो जोतो हुई भूमिमें य रोपवाखाँका कहना है, कि १०वौं शताब्दीसे पहले आती है। चोनदेशमें तम्बज न था। कुछ भी हो, संक्षिपत: उष्ण- सरमालो-पासी जातिको एक श्रेणो। पासोके जैसा ये प्रधान देश हो रसको उत्पत्ति है, इसमें सन्देश नहौं। लोग भो ताड़के पेड़से साड़ी चुपाते हैं। ये केवल पंजा- तरबूज के बीजसे एक प्रकारका प्रएिवर्ण और साफ बादमें ही पाये जाते हैं जहां इनकी संख नितान्त कम है। Vol Ix.77