पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३१७

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समसार-ताराम घाई स्यादिको रक्षा करनेवाला। २जो गाय घोड़े ।म पर्याय-युवती, तलुनी, युवति, यूनो, हिरो पादिको पालनमें नियुक हो। धनिका पोर धनौका है। छतकुमारो. घोकुपार, ग्वार- तहखगड (स. पू.) तरुणां ममूहः । मिक्षादिभ्योऽ। पाठा । ३ दत्तीवन, जमानगोटा । ४ चौड़ा नामक गधा पा १२११८इति सूत्रस्थ काशिकाय वृक्षाविभ्य: स०डः। द्रव्य । ५ पुष्पविशेष, कूजाका फल, मोलिया। दमके वृक्षसमड, बइसे पेड़ों को सख्या। पर्याय-सेवतो, महा, कुमारी, गन्धाव्या चारकेशरा, नाज ( स० वि०) न जन-ड। १ क्षज, जो पेड़मे भृष्टा , रामसरणो, सुदला, वहपत्रिका और भृङ्गबलमा उत्पबहो! (पु०) २ ख तखदिर, सफेद कत्था । है। गुण-शिशिर, मिध पित्त, दास, ज्वरमुखपाक, तरुजोवन सं• लो०) तगेर्जीवन, ६ तत्। वृक्षमूल, कृष्णा पोर विछर्दिनाशक तथा मधुर है। इसके एक पड़को जड़। फलपे पूजा करने में उतना हो फल होता है जितना कि तरुण (म'• लो . ) त उनन् श्रोच लो बा । उण ३।४। एक हजार प्रशोकके फलसे होता है। ६ स्य लक्षण १ कुल पुष्प, कूजाक फन, मोतिया। २ स्थ नजोरक, जोरक, एक प्रकारका बड़ा काला जोरा। ७ मेघरागको बड़ाजाग। ३ एग्गड्त, रंडका पेड़। (वि.) ४ एक रागियी। युवा, जवान। ५न तन, नया । माणीकटाक्षमाल (म.पु.) तरुणोना कटाक्षाणां माला तरुगक ( म० पु.) तरुग-कन्। १तरुण। २ तरुण यत्र. बहुव्री० । तिलकपुष्प वृक्ष। सरुतलिका (स. स्त्रो०) तस्विना तलिका चित्रशलाका दधि पाँच दिनका दही। इव वा तरौ वृक्षे तोल यति दोम्लयति वा तुल-बल टापि तरुणज्वर (म. Jo ! तरुणचासो ज्वरश्चनि, कम धा। अत त्वं पृषो. माधुः । चमगादर । नवज्वर, वह ज्वर जो सात दिन का हो गया हो। तरुसूलिका ( मं० स्त्रो०) तरुतुलिका देखो। तरूण तरणि : स. पु. ) तरुणसू देखा। वि०) च । प्रसितस्कभिततस्तृतरूतपत्रिति । तरुणदधि ( लो. ) तरुण तरुणलक्षणोक्त दधिः, पाश३८ । इति सूत्रेण निगतनात् सिद्ध । तारक, कर्मधा पाँच दिनका दही यह दहो वहत अहित- उहार करनेवाला। कर है। दहो पाँच दिनसे अधिकका हो जानमे वर तकत्र (म.वि.)त-बाह. उ तारक, सारनेवाले। तरुयादधि कहलाता है। सरदूलिका-तरुतूलिका देखो। तरुणदारु ( स० पु० ) वृहदारकक्ष, विधारका पेड़। तरुनख (म पु०) सरोनेख इव । कण्टक, काँटा । तरुणपोतिका ( स्त्रो०) मनःशिला, मनसिल । तरुनापा (Eि पु०) युवावस्था, जवानो। तरुणप्रभसूरि-ये चन्द्र लोद्भव जिनकपल के शिष्य थे। तरूपङक्ति (मो .) तरूगा पड ति, तत्। वृक्ष इन्होंने जिनकुशलमे हो दोक्षा और प्राचार्य पद प्राप्त किया श्रेणी, पेड़ोंको कतार । था। जिनपन और जिननधिमे इनमे मूरिमन्त्र पाया तरुभूज ( म० पु. ) तरु भुड के भुज-लिप बन्दाक, था । इन्हाने १४११ सम्बत्में श्राकतिक्रमणसूत्र बांदा। वृक्ष पर जन्मनेसे यह उमको शीघ्र ही नष्ट कर विवरण नामक पुस्तकको रचना को थो। डालता है। तरुणसूर्य (संपु०) दोपहर को सूर्य । तरुमालिनो (म स्त्रो० ) भूम्यामलको, भरविला । तरुणाभास स० पु. ) कटो, ककड़ी। तरुमून ( स० लो० ) तरुणां-मून, ६-तत्। चमूल, तरुणास्थि (स. स्त्रो०) पतलो लचौलो हण्डी। पेड़को जड़। तरुणो (स' स्त्री० ) तरुणः गौरादित्वात् ।। युवतो तस्मृग ( स० पु० स्त्री.) तरी तिष्ठन् मृग इव, मध्य- स्त्री, जवान औरत। १५ वर्षसे से कर २२ वर्ष तक- पदलो । शाखामग, वानर । वो खौको सरपीकता तराग (मो .) तरूषां रागो रतिमामा यसमात, तबयो खोके साथ सम्भोग करनेसे मलिकाशास होता बहुबौ । वियसय, नया कोमल पत्ता। . Vol 1x.79