पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३१८

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३१४ तराज-तरेंदा तरुगज ( म० पु. ) तरूणां गजा. ६-तत् अन्यच्चत्वात् वृक्ष के बदले उन स्थान पर इदको अधिष्ठावदेवो तागेवा ममामे टच । १ नालन, तडका पेड़। २ पारिजात देवोको प्रतिमूति देखो गई । दूसरा प्रवाद यह भी है, पश्यन, कन्यतन । यह त नर नोक में पजित रता है कि पहने यात्रो लोग काय के अन्तमें अपनी नाव दमें रव और देवन्ना में पाया जाता है । त्रि०) ३ तरु पोष्ठ-मात्र, कर जाते थे। कालक्रमसे कोई दुष्ट मनुषा नावको उन तत्र सबसे ब । जगह न रग्ब कर अपने माथ ले गया। किन्तु वह नाव तारूग । म बोतरो गेनति का कटाय । उमो ममय अदृश्य हो गई: उमी दिनमे भाव उम इदमें १ कि. धोंदा। (वि.)२ तनरोदिमाव । नहीं मिन्नो। ( म० स्त्रो०) बन्द'क बांदा। इम इदमें ढोलको नाई शब्द मना जाता है। वृद्ध ..! म स्त्रो० ) तरुषु वनीव। जत्कालता, मनष्यों का कहना है कि ज्वार भाटा ममय हमें स्वर्ण - न शोभित एक मन्दिर देखा जाता है । सत्र --मध्यप्रदेश के चॉटा जिक। एक इट। मेगांवमे तकविटप म पु० ) तरूणां विटपः, तत् । वृतणावा, १४ मोल पमें चिमुर पगड़मे यह ह्रद निकन्ना है। पेटको डालो। हमको गहराई बहत है। तविलामिनो ( म स्त्रो०) गेविनामिनोवा न. __ान - पनाभिन्न षिणो स्त्रियां दस हुट निकट प्रा मलिका, चमेली। कर अचनादि करते हैं। पीड़ित मनष्य भो आरोग्यता तका ( स त्रि. ) तकः अस्त्यत्र तक श । तमयुक्त, इनमे लाभ करने को प्राशा यरों भान हैं। . घिग हा। मध्यप्रदेशोय लोगों का विश्वाम है. कि देवताओं को तागायो (म त्रि० ) तरो तरकोटरे शाग्वायां वा शेते उच्छा मे यह हद उत्पन्न हुआ है। शो णिनि । १ पक्षो, चिडिया। इम हुक एक ओर एक कृत्रिम बाँध है- तरुष, (म० क्लो० ) तरुषाति हिनस्त्यत्र नमष आधारे प्रवाद:, कि बहत वष प ले गौनो नगर और किप, । युद्ध, लड़ाई । ना को लेकर बहुत समारोह के साथ चिमूर पहाड़ हो तरुष · म. वि. ) -उषन् । तारक, उद्धार करनेवाला । र ना रहे थे ग-मं उनमें बहतों की प्याम लगो, तरुषगडा ( म० पु.) वृक्षणो , वृक्षको कतार । fन्तु जल कहों न मिला। हठात् एक अम्लो वर्ष में तकम् ( म त्रि.) -उमि । तारक । अधिक उमबाला वृह मनुषा उन लोगों के मामन पा तामार ( म० पु०) तगे: सारः, ६-तत्। १ कपूर. पचा। उनके जन्न कष्टका विवरण सनाने पर बढ़ने कपूर । २ वृक्षमा मार, गोंद । न दिया, कि वर और कन्या के जमानखोदन पर एक तास्थ ( स० त्रि.) तरौ तिष्ठति तरु-स्था का वृत्तस्थित. झानको उत्पत्ति होगो और उमो झरद के जनमे वे जो पेड़ पर टिका हो। अपनो प्याम निवृत्त कर मकते हैं । वडा उपदेशानमार तरुस्था ( सं स्त्री० ) तरुस्थ-टाप । बन्दाक, बाँदा। वा और बधुन ज्यां हो नमोन कोदो, त्यां ही एक मोता तरूट ( म० पु० ) तरो: उट इव। पनमूल, कमलको निकल कर द झोल ) के रूप में परिणत हो गया । इम जड़, मुरार. भमोड़। इदक किनार एक ताड़का पेड़ उत्पन्न हुआ। वह पेड़ प्रति तरूपक - तरुण क देखो। दिन दन समय ऊपर उठता, किन्तु सन्ध्यार्क ममय महो- तरूषम ( म त्रि.) ढ-उषस । १ तरण कुशन, जो के नोचे चला जाता था। एक दिन बहुत सबेरे कोई यात्री पानोर तैरना जानता हो । २ आपदुद्धारक, जो विपत्ति- उस पेड़ पर बैठा था। वह हठात् वृक्षक साथ आकाश से बचाता हो। का चला गया और वह सूर्य-किरणसे दग्ध हो गया, सरदा (हि. पु.) १ पानो में तैरता हुमा काठ, बेड़ा। तथा वृक्ष भो उमो समय चूर चर हो धूलमें मिल गया। २२ रनेवाली वस्तु ।