पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३२५

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ताण-पान २९१ इसके बीज तैयार रजोनिमा और सोचक उदरा- तकुम (हि.पु.) १ ताड़का पेड़ । २ ताड़का फल । मयनायक. अधिक रजोनावनिवारक और लोरादि- तलासक ( स० पु०) सकु लासयति सम-णिच-गखा । धामकारक है। बहसमे हिन्द्र ग्वजनी. फुसी पादिम सकुचालकायन्स, चरखा ।. इमको मनदम ब कर लगाते हैं। पञ्चाबमें इसके तपशाण (4. पु.) तो शापः, ६-तत् । मानक, वर बोज बट कर मैदा माथ उमे ग्वाज पर लगाते हैं। छोटा पत्थर जिममे तकने को फिर को पर मान चढ़ाई मराठों का विश्वास है कि इसके बोजको टेवत हो जाती है। बिच्छ काटने का दर्द जाता रहता है। ढाके में बहुतपे तक्यं ! म. वि. ) विचाय', जिन पर कुछ मोच-विचार लोग मसाजे पत्तोंको बट कर १ छटाक तक खाते हैं करना पावश्यक हो । जिममे उनका कमिरोग प्रछा हो जाता है । जयन्ती देखा । तई (म पु० ) तरतुः पृषो• माधुः । साधु, तेंदुपा या , गणिकारिका, गनियारका पैड़। (भावप्र०) । चोता। गणिकारेका देखो। देवताडवत, रामबास । ४ अग्नि- तत्त्वं ( स० पु. ) वृक्ष यत् बाहुलकात् गुणः। यवक्षार, मन्य, पानोका पे।। ५ खुदाग्निमन्थ. गनियारका पेड। जवाखार नमक। ६ जीमून, नागरमोथा । ७ शिशपावृक्ष गोशमका पेड़।। ८ वनकटी, बमककड़ो।। सर्खान-प्राचोन तुरको भाषाको एक सम्नममचक नकिण 'म' ५. ) चक्र मद स. नकवड, पंवार । उपाधि । तर्खान कहनसे उनका बोध होता है, जो उच्च- तकित म त्रि. तक क । १ विचारित, मोचा हुआ। वंशोत्पत्र हैं और जिन को किसी तरहका विशेष कर न २ पामोचित, विचार किया हआ । ३ मम्भावित, प्रा. टेना पड़ता हो। प्राचीन तुरष्कभाषा, लिपित बहुतसे मान किया हुआ । अनुमित, विचारा हुअा, अंदाजा दस्तावेजों में तुर्ख शब्द का उल्लेख देखने में पाता है। इसका पथ पायलिपि पीर सम्भ्रान्तवनापक लिपि। तर्किन् ( म० त्रि० ) तक यति तर्क-णिनि। तकारक . तूरानों के अभिधाममें इसका अर्थ 'उच्च पदवी' लिखा मोमामा करनेवाला। है। नरपग्वि पोर तबरि लोग तर्खान को जगह तर्खन सर्किल (स.पु.) तक इनन् । तर्किण देखो। लिम्वते हैं किसी विशेष व्यक्तिका बोध कराने के लिए वे सर्कोव (हि. स्त्रो० ) तरकीब देखो। इस शब्दका प्रयोग करीस जखौको मारने के लिए तक (म स्त्रो.) कत- निपातमात माधः सवनिर्माण- प्रेष्टार जन्नै जो इन्तजाम किया था. बट और कमलकको यन्त्र तकना, टेकपा। इसके पर्याय-कपासनालिका, मान म होते ही उन्होंने चङ्ग जसे कह दिया। उनके सकुटो और सूत्रला है। ( हारावली ) परामर्श से जीवनको रक्षा होनेसे चङ्गजने दोनोंको तकुक ( म क्लो० ) तक स्वार्थे कन् । तर्क देखो। तर्वानको उपाधि प्रदान की। इनको मन्तानसन्तति भो (मको तयति सोपाटया गोभने तर्खान-उपाधिसे विभूषित है। खुरासान और तुर्कि- त-उटन् । कत्र्तन, कातना । स्तानमें इनका वाम है। तकुंटो (म' स्त्री० ) तर्कुट स्त्रिया गौरा० डोष । तक, भारतवर्ष में सिन्धुदेशको तरफ तीनवय देखने में मकला, टेकुमा। पाता है। कहा आता है, कि तैमूरने यह उपाधि दो सकुपिण्ड ( स० पु. ) तस्थितः पिगडः, मध्यपदलो। थो। तुक्तमिशखान् जब तैमूर पर पाक्रमण करने के तकलेको फिरको। इसके पर्याय-वत्ति नो, तर्क पीठो, लिए अग्रसर हुए थे, उम समय प्रर्पनखाँके प्रपौत्र एक वत्त ला । . तैमुग्ने भीमपराक्रमसे उनको गति रोक कर युद्धक्षेत्र में तकुपोठो (म. सी.) तखिता पोठी। तापिगड, प्राणत्याग दिये । तैमूर अपनी पाणीसे उनके वौरवको तकलेको पिरकी। देख कर पतोव विस्मित हुए। उनीने एकुतैमरके Vol. Ix. 81 क