पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३३४

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३३. तलमग-तळचेरी यहाँके प्रभावमे पुत्र प्रमव करती है। मचमुच यहांका; वह मट्टोका बना हुआ है। प्रभो रम दर्ग में पुलिस पोर दृश्य देखने योग्य है। तहसीलकी कचहरो है। तलगङ्गा-- १ तनाव के आटक मिलेको एक तरमोन · यह अङ्गारेजके शामनकालमे बहुत दिनों तक इस स्थान अक्षा० ३२३४ और ३३ १२.३० तथा देशा. १४८ में एक सैन्यावाम था। किन्तु १८८२ ई० में वह यहाँमे और ७२ ३२ पु में अवस्थित है। भूपरिमाण ११८८ उठा दिया गया। वर्ग मोन और लोकमख्या प्रायः ८२५८४ है । इमम ८८ शहर में एक स्कूल और एक दातव्य औषधालय है। ग्राम नगत हैं। नवणकै पर्व समे यह तहमीन कहौं तलगू (हिं स्त्री ) तेन्लङ्ग देगका भाषा। कहीं विच्छिन्न हो गई है। मुमलमान, हिन्दू, मि", तनघरा हि पु०) तहग्वाना । ईमाई प्रभृति इम स्थानमें वाम करते हैं। भुमनमानीको तलघाट-मन्द्राज विभाग मालेम जिलेका दक्षिणांग । म मम्बा मबसे अधिक है। पहले यह प्रदेश कोङ्ग देशके अन्तर्गत था । काँगुवंशोय गेहूँ, जौ, बाजरा, ज्वार, शुम्हरो, उरट और कई वा गङ्गाराजगणा चेलराजाओं के पहले हम प्रदेश में शामन यहों के प्रधान उत्पबद्रय है। करते थे। राजस्व एक लाख रुपयेमे अधिक है। इस तहमोन पे ५वों शताब्दो में कोङ्गवशीय राजानि दुर्ग तक एक दोवानो, एक फोजदारो विवागन्नय और २ थाने तथा ८वीं शताब्दोंमें तुङ्गभद्रा नदीतोरस्थ हरिहर तक तालुकादार मब प्रकार के विचारकाय करते हैं। अपना राज्य फैलाया था। ८८४ ई में ये लोग चाल. २ पञ्जाब के आटक जिले के अधीन तलगङ्ग तह वश अधिकारच्य त किये गये। ११वीं शताब्दोके सोलका प्रधान शहर । यह अक्षा० ३२ ५५ उ० पार मध्य चोल राजाओं के प्रधान कई एक सामन्त प्रवल हो देशा ७२२८ प लम नगरमे ८० मोल उत्तर। उठे। इनमें से ज्यशाल वशीय किमो मामन्तने १०८० पशिम कोण में अवस्थित है। दूम शहरम म्य निमणलटो-: ई० सालेम प्रदेश पर अधिकार किया। १३१० ई में का बन्दोवस्त है। लोकसंख्या प्रायः ६७०५ है, जिनमें । यह प्रदेश मुमन्नमानों के हाथ लगा। कुछ काल के बाद ममलमानांका मख्या मबसे अधिक है। । यह विजयनगर राज्यमें मिला लिया गया। १६वों १६२५ ई के प्रारम्भमें किमो अवान सरन यह । शताब्दोके अन्तको इस प्रदेशमें नायकांका आधिपत्य रहा। नगर स्थापन किया, तभोसे इमो शहरमें स्थानीय राज. १७८८ ई में श्रोरङ्गपत्तनक अवरोधके बाद यह प्रदेश काय चलाया जाता है। मिग्वक राजत्वकालमें नया मदाके लिये श्रटिश राज्य के अन्तभुक्त किया गया। सटिश शासनकालमें भी इस म्यानम विचारालयादि तलचेरो-मन्द्राज विभाग के अन्तर्गत मलवार जिले के स्थानान्तरित न हुए। यह शहर एक मालभूभिके अपर कोत्तयम् तालुकका एक गहर ओर बन्दर। यह अक्षा चमा हुआ है। कई एक गुहा हो कर नगरका जन्न ११४५ उ० और देशा० ७५°२८ पू० के मध्य कालिकट निकाम होता है। शहरसे २४ मोन्न और मन्द्राजसे रेल हाग ४५७ मौल तलगङ्गक निकटवर्ती स्थानमें भिन्न भिन्न प्रकारके पर प्रवस्थित है। इम शहरमें म्य निमपानिटिका प्रवन्ध अनाज उत्पन्न होते हैं। यहाँका व्यवसाय बहुत विस्तृत है। रिन्द, मुमतमान, ईसाई प्रभृति भिन्न भिन्न धर्म के है। यहां एक प्रकारका जूता तैयार होता है । जुतमें सुन. लोग इस शहरमें वास करते हैं । हिन्दूको मख्या मबसे हरी अड़ाजका काम किया हुचा .रहता है, जो दूसरे अधिक है। इस नगरको तलिचेरो और तलसेरो भी दूसरे प्रदेशों में भेजे जाते हैं । पञ्जाबको नियां रम जूतको कहते है। काममें लाती है। तसरी मलवार विभागका एक उपविभाग। सिख-पाधिपत्यके ममय सरदार जिस दुर्ग में रहते थे, इस स्थानमें उत्तर मलबार जिलेको प्रदालत, कारागार,