पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३४०

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३३६ नपक्षीग-नवायफ तपक्षोरो ( म स्त्री. ) सवत्तोर डोष । गन्धपत्रा, कनक फिर १८१० में सम्राट हितोय शाह अकबर के समय चर । मो जड़मे एक प्रकार का नोखर बनता है। उनका अनुवाद किसी दूसरे पमे उर्दू में हपा था। प्रबोर मी तोख से बनता है। तवाग्वोर ( हिं० पु. ) बंशोचन । तवज्जह (अ. स. . १ ध्यान, करव । २ सपादृष्टि । तागा (स० वि०) तवमा बनेन गोयते गै कमणि क्षिप, तवनी (सिं'स्त्रो०) कोय नवा । पूषो. माधु: । प्रवृड वलयना जि मे खूब ताकत हो। सवर ( म० लो० ) निदष्ट उच्च मख्या, के है दष्ट बन्यो ताज़ा ( अ० बो०) १ पावभगत, आदर, मान । २ राशि ___ अतिथ्य, मेहमानदारी, दावन। तवाक (हिं. पु. ) ममद और नदियों के तट पर हान- तवाना फा० वि०) बनो, मोटा ताजा। वाला एक प्रकारका पेड़। हमें उमन से फन तवाना ' हि कि.) किमो दूमीसे गरम कराना। लगते हैं जिन्हें खानमे गाय भैम इत्यादि कि दूध तवायफ़ (प्र. स्त्रा० ) वेश्या र डो। देतो हैं। तमाफ-वेश्या को एक जाति । गन्धर्व कञ्चन, कश्मोरो, तवराज (म.प्र.) सपच नवः पण मन राजने गज- पतुग्यिा, गमजानो बकरिया, कमबो, भडमा, हरुकिया, अच् । यवामशकरा, तुजबोन । कबतरो मिगमा, मोरशोकार, नायिका, गोनहारिन ब्रज. सवराजोङ्गवग्वगड (म पु० ) तवराजादुद्भवति उत् भू- ____ वाली और नगपात ये मब सवाफ जाति हो अन्तर्गत पच, तवराजोद्भवः यः खगड़ा. कर्मधा । यशरा- हैं। इनममे पात्र, रामजानो और गन्धर्व ये तोनों हिन्दू का खगहु, तर जबीन का ट कहा। दमक मस्कृत स्त्रियाँ हैं। पात्रको उत्पत्तिक विषयमें प्रवाद है, कि कुमा- पर्याय-सधामोदक न, ग्व गल जोशवज, मिरिमोटक, अमृत- यक राजा। यहां दो दामो कन्यायें थों जिनमसे एक तो मारज और मिडवगड है । इसके गुण-दाह, ताण, राजपूत से ब्याहो गई थो और दूमरो पहाड़ो सत्रियमे । तृणा, मोह, मच्छी और खामनाशक इन्द्रियांका नगा- जो पहाड़ी क्षत्रियसे व्याही गई थो, वहो पात्र कहलाई। कारो, शीतल ओर मा मधुररप है। अाजकनको पात्र या पतुरिया उमौके वशका मानी सवर्ग ( म० पु. ) त. थ, द, ध न, ये पॉन तवर्ग हैं। जाती है । महादेव, कल्लू पार ओर मेरा इनके उपास्य तवर्गीय (म० पु.) तवर्ग भवः वर्गान्तत्वात् छ । तवर्ग मे देवता हैं जो लड़कियाँ जन्म लेती हैं, उन्हें बचपन उत्पत्र वण, तवर्गका अक्षर । हो नाचना गाना मिखाग जाता है बाद वे पीपल वृक्षमे तवर्गोवत् ( म०पू० ) शरट । विवाह कर वेश्यावृत्ति अवलम्बन करती हैं। तवम् ( म०वि० ) तु-असुन्। १ वड, बुट्टा। २ महत्, __नागो, मिरासो, गोनहारिन, डोमिन और पाकाश बरा। (लो. ) ३ बल, ताकत । कामनो ये मध मुसलमान स्त्रियां हैं। पात्रके जैसा ये सवस्य । म क्लो) सबसे वनाय हित तवम यत् । बल- लाग भी अपना लड़का का विवाह नहीं करतो। किन्त माधन। इनका लड़का जब विवाह के योग्य होता है, तब वे एक तबखत् ( म० वि०तवोऽन्त्यस्य मतुप मस्य वः सान्त निम्न श्रेणोको हिन्दू वा मुसलमान लड़कीको खरीद त्वात् मत्वर्थे न विसर्गः। वन्नयुक्त, ताकतवर । कर उमोके साथ उसका विवाह कर देतो है। इस सवा (हि पु.) १ रोटो में कनेका एक छिछला, गोल प्रकारमे व्याहो हुई स्त्रियों वेश्या-वृत्ति नहीं करतो लोहेका बरतन । २ खपड़ेका गोल डोकरा । इसे चिनम वर वे विवाहोपलक्षमें तथा और किसी दूसरे त्योहार में पर रख कर तमाख पाते हैं। ३ एक प्रकारको लाल रहस्य के यहां नाच गान कार अपना गुजारा करती है। महो। जब कोई हिन्दूम्रो इस समाजमें पाना चाहता है, सवाल मुन्शी-शाहनामा और गमशेर नोक रच- सब पहले उसे इस्लाम धर्म में दोषित होना पड़ता है। यिता । उता दो किताबें १६५२ में बनाई गई यौं। विशेष कर हिन्दू विधवा वा भगोड़ी सियाही तवायफ