पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३५४

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३५० तागना-ताज मागमा ( नि.) सुई में तागा डाल कर सिलाई सर हरबट) उन्हें तारका शामक बना दिया साथ करना। साथ पूगे स्वाधीनता भी दे दो। किन्तु ऐसो खिति मदा सागपानो (हि. स्त्रो० ) एक पतलो लकड़ो। इसका एकसो न रहो । यहाँको जनसंख्या लगभग ४८४६७ है। एक सिरा नोकदार और द्रमग चिपटा होता है। इनमें एक शहर और ७८ ग्राम लगते हैं। तागपाट (हि. पु० ) रेशमकं तागेम मोनके तीन नंतर २ उक्त तहसील का एक शहर । यह अक्षा. ३२.१३ डाल कर बनाया हा एक प्रकारका गहना । यह केवल उ. पोर देशा. ७.३२१० मध्य अवस्थित है। लोक. विवाहमें काम प्राता है। मख्या प्रायः ४४०२ है। यह शहर ताके प्रथम नवाब सागा( हि १०) १ मूत, डोर', धागा।२ प्रतिमनुष्यके कतलखसि बसाया गया है। समचा शहर महोकी हिमावर्म नगर्नवान्ना एक कर। दोबारमे विराहा है । दोवारको ऊँचाई १२ फुट पोर तार--१ युक्त प्रदेश के अन्तर्गत डेरा इस्मारनखों जिलेका चौडाई ७ फुट है। बोच बोचमें दो एक फाटक भी नगे उपविभाग और त सोल । यह प्रक्षा० ३२ र ३२३० हुए हैं, लेकिन वे सब प्रभो भग्नावस्थामें पड़े हैं। उ० तथा देशा० ७०४ और ७०४३ पृमें अवस्थित यो भग्न मट्टोका दुर्ग भी देखने में आता है। शहरसे है।भपरिमाण ५०२ वगमोल है। इसके पविमें वजो. अनाज, कपड, तमाक तथा और दमरो दूसरी चीजोंको रिस्तान पड़ता है। यह तहमाल पहले एक प्रकारको रफतनो होतो है। पञ्जाचक प्रतिनिधि सर हेनरो स्वाधीन थो । यहाँ नवाब दो नत खेल वंश कतिखेल दुरन्दको इसो शहरमें मृत्य, हुई थी। सम्प्रदायभुक्त थे । अन्तिम नवाबका नाम शाह नवाजा ताच्छोलिक (म पु०) तच्छोलार्थे विहित ठ । ताछो- था, जिनको मृत्य १८८२ ई० में हुई। पोछे उना लाय विहित प्रत्यय । लड़के सरवारखाँ नवाब बनं । ये बड़े शूरवीर निकले। ताच्छोन्य ( म'• क्लो० ) तत्गोल यस्य तस्य भावः ष्यत्र । उन्होंने अपना सारा ममय राज्यको सुधारने तथा अपनो तछोलता, किसो कामको लगातार करनेको क्रिया। जातिको उक्त बमाने में लगा दिया था। सिख लोगोंने त.ज (प.पु.)२ राजमुकुट, बादशाहकी टोपो । २ जब डेरा इस्माइलखाँ हस्तगत कर लिया, तब मरबार कलगो, तुर्रा। ३ मोर, मुर्गा प्रादि चिड़ियों के सिर पर खाँको उनको अधीनता स्वीकार करनी पड़) और वे को चोटो, शिखा। ४ दीवारको कंगनो या कन्ना। ५ वार्षिक १२०००, रु. उन्हें देनको राजा हुए। सिखको मकान के मिरे पर शोभाके लिये बनाई जानेको बुर्जी। गोटो अब धोरे धीरे जमने लगो, सब वार्षिक कर बढ़ा ६ गंजोफे के एक रंगका नाम । ७ आगरका ताज. कर ४००००, रु० कर दिया गया। मरवारखाँके मरने महन्न । पर उनके लड़के अलादादग्वाँ राज्याधिकारी हुए। इस ताज-मुमलमान जातिको एक स्त्री कवि । एमके वश, ममः मिखका एक लाख रुपया पावना उनके यहों को स्थान इत्यादिका कोई ठोक पता नहीं लगा । शिवमिह गया था। अन्नादाद खाँमें ऐमौ शक्ति नहीं थी कि उक्त सरोजमें इनका सम्बत् १६५२ कहा गया है और मन्यो रणका परिशोध कर, अतः वे पहाड़ों पर भाग कर मह देवोप्रसादने मम्बत् १७०० के लगभग इनका ममय शूदको शरणमें पहुँचे। अन्तमें यह तहसील सिख सर बतलाया है। इन को सभी कविताएँ सरस और मनोहर दार ननिहालसिहको जागोरक रूपमें दे दो गई। हैं। श्रीक्षणचन्द्रजोको भलिमें भी ये खूब रंगो थौं । कुछ काल तक यह तहसील मालिक फतहखाँ तिवामाके रसका परिचय इनको कवितासे ही भाखवाता है। जान अधीन थो, पीछे सिख मरदार दोवान लखीमल के लड़के पड़ता है, कि ये पञ्चायक तरफाको कमी, क्योंकि इनको दौलत गयने इस पर अपना अधिकार जमाया। १८४५ भाषा पचाबो और खड़ी बोली मिश्रित यौ।, यों तो में बसदादके लड़के शाह नवाजखाने गरेज प्रतिः इनके बनाये हुए पनेक छन्द विद्यमान है पर उदार निधि एडवर्ड की शरण ली । दयापरवश एडवर्डने (पौर रचाई यहा एकही दिया माता-