पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३६०

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३५६ ताजिक-सानिया संस्कृत साजिक अन्यमं निम्रलिखित विषयोका वर्णन एकादशभाव, हादशभाव और रवि प्रादि दशाका विषय मिलता है-- विशेषरूपसे वणित है। प्रधान बारह राशियाम मष श्रादि चार चार रागिएँ पौर मी कई एक विषयों का वर्णन है, जिनके नाम यथाक्रममे पित्त, वाय, मम और कफस्वभावो हैं अर्थात् । संस्कृत नहीं जान पड़ते : अरबा वा फारमोमे लिये गये मेष, मिह ार धनः इनका पित्तस्वभाव, मकर, वृष हैं। नोचे उनके नाम दिये जाते हैं- और कन्या इन नानां का वायुस्वभाव है; मिथुन, तुला हहाविवरणा, मन्यानयन, इकबालयोग, इन्थिहायोग, और कुम्भ इन तोनांका समस्वभाव (वायु, वित्त और इत्ययालयोग, गराफ योग, नक्तयोग, जमया योग, कफको ममता) तथा कर्कट, वृश्चिक और मौन देन तान मनून योग, कम्बल योग. गरिकबूनयोग, खलासम्योग, राशियांका कफस्वभाव है। मंषमे लगा कर चार चार राशि क्रमसे क्षत्रियदि . रहायोग, दुकान्निकुत्य योग. दुपात्था दवोत्थयोग, तव्यो. चार वर्ग हैं, अर्थात् म प, मिड ओर धनु ये तान गशिया .. स्थयोग, कुत्थायोग और दरस्थ योग ये षोड़श योग, महम

नाम, महम ५० प्रकार, मरममाधम, सहमदल ओर

क्षत्रियवर्ण; वृष, कन्या मकर ये तोन वेश्यवण : मिथ न, : मुन्याभावफल। तुला और कुम्भ ये तीन शूद्रवर्ग तथा कर्कट, वृश्चिक । नाम ताज़िया ( अ० पु० ) मृत व्यक्ति के लिए विलाप करना म्वरूप और वर्ण जान कर ज्योतिःशास्त्रका गणना तथा शोक प्रकट करना। महरम के ममय मुसनमान करनी चाहिये, इमीलिये पहले राशिका स्वरूप कहा लोग मामान्य उपकर मे हुमेन और हासनको कब बना कर जो बाहर निकना करते हैं, उमोको भारत- गया है। वर्ष में ताजिया कहते हैं। यह बॉसको कर्माचयों पर वर्षका शुभाशुभ फल जानने के लिये वर्षप्रवेश-'म निण'--- जन्म-ममयम रवि जिम रागिक जितने शादिम अव- रङ्ग विरङ्ग कागज, पनो बगैरह चिपका कर बनाया स्थिति करता है. पुनः जिम ममय वह उमो गशिक उतने जाता है और आकार मकबरे (मण्डप) जैसा होता है। फारम देशम महरम दिनाम अनीकिक वण ना. ही शादिम आगमन करता है, वही समय वर्ष प्रवेश युक्त अनेक नाटकादिरच जात हैं, जिनको यहाँक लोग समय है। ताजिया कहते हैं। रविम्फुटका स्थिर करके भो वर्षप्रवेश ममयका निण य किया जा मकता है। बाटम वर्ष प्रवेशम तिथ्यानयन, ___ अमेरिकाम भो ताजि ।। शब्द प्रचलित है। बम देश- से जो मजदा लाग अमेरिका भित्र भित्र स्थान में गये वर्ष प्रवगम योगानयन, वर्ष प्रवेश ग्रहम्फ,टानयन. चन्द्र- ' है, वे वहाँ ताजिया शब्दका व्यवहार किया करते हैं। स्फुटानमन, प्राङ नत और पथावतदगडानयन तथा । लग्नम्व गडा, लग्नकुगडलो और भावकगडलो, पवनमुहरम हो इन मजदूरांका प्रधान एवं है, हिन्द मजदर भी मुकरमको प्रधान पर्व मानने लगे हैं। दोक्कामचक्र, उच्च-नोच कथन, लग्नखगडाचक, बना। निरूपगा, हादशवर्गविवरण, क्षत्रचक्र, होरावक्र. चतुथे 'ग १८८४ ई० में त्रिनिदादक किसी एक शहरके भीतरसे " ताजिया ले कर जानको म मानियत हुई । जिससे चक्र, पश्चमांशचक्र, यष्ठांशचक्र, मशचक्र. अष्टमांशचक्र. नवांशचक्र: दशमांगचक्र, एकादयांशचक्र, ददगांशचक्र आखिर एक भोषणतम घटना हुई थो। भावचिन्ता, वर्षाविधानयन ग्रहका स्वरूप, दृष्टि-प्रकरण, मुहर मके समय बहुतसे मुसलमान ताजिया बनात दृष्टिसाधन, मनोभाव, नक्तयोग, वर्ष प्रवेश, दशानिरूपण, है; बहुतसे फकोर और दूसरे लोग तरह तरहको मासप्रवेशानयन, अन्तर्दशानयन, वर्षरिष्ट, विचाररिष्टमङ्ग, पोशाक पहन पहन कर छातो पर हाथ पोटते पोटते भावविचार, धनभाव, महजभाव, चतुर्थभाव, पक्षमभाव, ताजियाके पीछे पोछे जाया करते हैं। बहुतसे मराठो षष्ठभाव, सलमभाव, अष्टमभाव, नवमभाव, दशमभाव, सरोको ताजिया बनाते देखा गया है परन्त वे