पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३६८

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३६४ हो जम्न अपने आप हट कर दात्रको भर्वत्र ममान कर जैसे पानो जहां ज्यादा दाब है, वर्षाम, जरी कम दांव लेता है, परन्तु कठिन पदार्थ के भीतर विभिवग्थलोंमें है. वहाँ जानेको कोशिश करता है, उमी तरह बिजलो विभिन्न मात्रामे टाच दनमै कठिन पढाथ टेढ़ा या नब भो जहाँ उड ति अधिक है. वहमि, जहाँ सहति कम जाता है। जानको नरम बहता ढरकता नहौं । रमा तरह है, वहाँ जानेको चेष्टा करता है। बोच में यदि अपरि अपरिचानक पर ऊपर या भोतर विभिन्न स्थलों में ताड़ित चाम्नकका व्यवधान हो तो मिर्फ चेष्टा मात्र हो कर को विभिन्न मात्राम दाब पड मकता है, उम दाम रह जाती है, बिजलो एक स्थानमे अन्यत्र नहीं जान ताडितका एक जगहमे दूमरी जगह ढकेन देना चारता पातो बीच में मिफ खिंचाव पड़ जाता है । और यदि है। किन्तु नाडित अपरिचानकको भेट कर महजम नहों अपरिचालकका व्यवधान हो तो बिजली महज हो ढरक जा सकता । परिचालक के भीतर ताडितको दाबमें थोड़ो कर जाती है, दोनों जगह उह ति समान हो जातो है, बचत घट बढ़ होनमे ही उमी ममय थोडोगी बिजली विचाव नहीं पड़ता। पानोको तरह ढरक जातो है, परिचालक उममें का भी परिचालक और अपरिचान क का इम म्वाभाविक बाधा नहीं देता। अतण्व परिचालक भीतर ताडित प्रभेदको याद रखनम ताड़ित-घटित प्राय: नमो क्रिया को दाबको कुक कमोबेशो नहीं होतो : मर्वत्र ममान त्रों को एक प्रकारमे ममझा जा मकता है। मान ली, दाब होनेमे न ग्वोचन परतो है और न धक्का हो कि एक पोतनक गोनम धन-ताड़ित मश्चित करके उमको लगता है। डोरमें बाँध कर टॉग दिया गया। उसके चारों ओर ___ पानी के दाबके माथ बिजलोके जो गुणोंको तुलना मिफ अपरिचालक वायु विद्यमान है। पाममें उद्धति की गई है, उमको अब हम उडुति ( potuintil ) अनिक है, जितनी दूर जागोग उडति उतनी ही घटतो शब्दमे व्यवहार करेंगे। कठिन पदार्थ के विभिन्न स्थन्नां जायगो। और एक कोटे गोलेमें धन-तड़ित ले कर उसे पर दाबको कमोबेगो हो मकतो है, तग्नादार्थ के उमके पाम थामनमे वह क्रमशः दूर जाना चाहेगा। विभिन्न स्थानोमाको योडो बहत कमोबेशी हाना क्योकि यह धन-ताडित, जिधर जानसे उह तिघटती है तरम्नपदार्थ हट कर दाबको बराबर कर लेता है । अप. उमो तरफ जाना चाहता है । धन-ताड़ित के माथ ऋगा. रिचालको भोतर ताडितको उद्दति विभिन्न स्थान पर साड़ितके प्रभेद को याद करनेमे को समझ मकत है, कि विभिन्न परिमागमे हो सकती है। परिचालकके अन्दर उम प्रदेशमें ऋगाताड़ितयक्त एक छाट गोला रखनसे तारितको उड़ति मषेत्र ममान होगो ; जरा भी कमो• वह क्रमशः दूरमे पाम अविगा । धन-ताड़ित जहां उद्धति बैशी होने मे साडित कुछ हट कर उड़ तिको समान कर अधिक है, वहाँसे ज का है, 'उमो तरफ जाता है । लेगा। परिचालक और अपरिचालक दोनों का हो स्वभाव ऋग-ताडित जहाँ कम है वहॉमे जहाँ अधिक है, उमा वमा है। दोनों में सारितको जो क्रियाएं देखने में तरफ जाता है। धन-साडिस धन-ताडितको धक्का मारता पाती हैं, वे मभो इम विभिन्न खनावमे उत्पन्न हैं। परि है, ऋण तारित भी ऋण ताडितको ठेल देता है, किन्तु मानक के भीतर उड़ ति मर्वत्र समान होती है. दम धन-ताडित ऋण-ताडितको खींचता है। वारगा परिचालक भौतर हिम्य ताड़ित का कोई ताडता परिमाण । -कटिहीक्षणयन्स ताडितके खिंचाव वा धका प्रकट नहीं होता । अतएव परिचालक अस्तित्व निरूपणार्थ व्यवहत होता है। ताड़ित किस के किमी स्थान पर जरामो बिजलोका मजार करने मात्र जातिका है. इसका भी सहजमें निर्णय किया जा सकता से ममस्त तारित क्वल अपर ही फैल जाता है और है। उपस्थित नाहिलमें जब यन्त्रको दानों पत्तियां अलग वह एम तरह फल जाता है जिसमे परिनाला भरमें अलग हो जाय, तब कांचके ताडितको पास ले जाने पर उसको उति ममान कोतो है, अर्थात् परिचालक गदि पृथकत्व और भी बढ़ जाय को समझना चाहिये कि, भीतर किसी जग खिंचाव वा धका नहीं पाया जाता। उपस्थित तादित धन ताड़ित है। पौर यदि पृथक त्व