पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३७८

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साहित आदि कुछ नमोन पातुपाका प्रा कार किया था। नपा कर जमोनके रास्ते से भी आ सकता है। भनि- फरागमो मायामा । . . प न ( द क ) नाम पथमें परिचालकता भी अधिक है और खर्च भी कम प्रत्यय वायवीय उधाक दम उप यमे यामिक पदा हैं। इस तरह कलकत्त में बैठकर इच्छानुमार दिसोमें थ मे निकाला है। चुबकका काँटा घुमाया जा सकता है। चुंबक के काँटेको नाटिल-वाहू तुज द्रयको विश्लिष्ट करके धातु घुमानम भी मत हो जाता है। कोलको पाँच तरहसे मागको पृथ' कर मता है, इसलिए आजकल कलईके घुमा कर पांच तरहका मत भेजने के लिए विविध काममें साहिताना व्यवहृत होता है। किमो प्राय कौगल प्रचलित हैं। आज कन इस देशमें टेनिग्राफ पर चांदा, म ना, लावा प्रादि ध तुका वा कोम चढ़ा स्टेशनों में मार्म को पद्धति पर मझेन किये जाते हैं। उम देनका नाम कनई वा गिल्टो है। इन काश्रम धटित में चुम्बकमे म लग्न एक हथोड़ो खर ग्वट करके नाना नागिक प्रदाय को पानोमं ग ना कर उममें ता तपमा प्रकार के शब्द करती है, अथवा एक कागज पर आंक चालान करो। जिम पदा पर कन्नई चानो, “म- बना देता है। उन शब्दांको सुन कर वा प्रॉक देख कर को नम्त में लगे हर तारमं दि-नगा कर उम द्रनमें डबो मत निरूपित होते हैं। टेनिग्राफ विद्या अब एक दी। शोघ्र को उम । दाय पर धातुमय सूक्ष्म पावरण जम प्रकागड़ और स्वतन्त्र विद्या हो गई है। थानाभाव के जायगा किमो पदार्थ पर जरा मोटः आवरण चढ़ः कर कारण म निबन्ध में उमका विशेष विवरण नहीं देना उसमे ढाँचेका काम लिया जा सकता है। चाइते । ताडितवार्तावह शब्दमें विशेष विवाण देखो। (३) जिम तारमे नास्ति प्रवद चल रहा दी. . तार हारा प्रवाह पन्न भरमें बहुत दूर चला जाता है । उसको एक चुम्बकको कोला पर माराल भावमे पवाह कितने भमय में कितनी दूर जाता है, इसका कोई थाम कोन उमो वर करता थ पई निर्दिष्ट रिसाव नहीं है। वस्ततः ताडि.त-प्रवाहमें किमो हनिशा कोशिश कंगो। चुम्वा कांटा स्वभ ।त: तरहका निर्दिष्ट वेग नहीं है। प्राजकन्न महामागरक उमा दक्षिण में रहता है, तारका मा पन (तर- भोतरमे. एक महादेगसे दूमरे महादेगको मङ्गत भेजे दक्षिण ) पकड़नसे टिा घून जाता है. पृथ- का जाते हैं। इन तागेमें प्रतिबन्धकता इतनो ज्यादा है, चोम्बन-बल काँटेको उत्तर-दक्षिणमं सपना चता कि ताडि.त-प्रवाह उपमें अत्यन्त क्षाण हो आता है। है और नाडिननार उमे प्रव पश्चिमसलना इतना क्षोण हो जाता है, कि चुम्बकका कॉटा भो सहजमें चाहता है। तार-वाहित प्रवाह यदि दक्षिा उत्त को नहीं हिल सकता। एक टेशनमें तार कोषसे संलग्न साफ हो और कोटा तारक नाचे हो तो काटेक। उत्तर करने पर तारमै मिर्फ एक ताडितका धक्का लगता है। वह वर्ती मुग्व बाई पोर ( वा पश्चिमको तरफ ! घूम जाता धक्का फिर दूरवर्ती ष्टेशन में पहुँचता है, इसमें भो कुछ है एव दक्षिणवर्ती मुख दाहिने ( पूव को और ) धूम समय लगता है। इस धक के पहुंचने पर मझेत माल म जाता है। एकके उलटनसे सब उन्लट जाते हैं। पडसा है ऐसे स्थल पर सुचारुरूपसे सात पाने के लिए ताड़ित-प्रवाहमें चुम्बक-शम्लाकाको इस प्रकार घुमाने पहले बडा कष्ट उठाना पडता था । ग्लासगोके अध्या- को शक्ति होनसे टेलिग्राफ वा ताड़ित वार्तावहको दृष्टि पक मर विलियम टमसनको प्रतिभाने ममतविन वाधा. हुई है। कलकत में ताडितकोष है और दिलोमें कॉटा। ओंको पराजित कर उनके नामको जगहिख्यात कर कलका के कोषमे तार निकल कर दिनो चला गया दिया । इन्हों टमसनको इस समय लॉर्ड केलविनके पौर वहाँ चुंबकको कोलक पामसे धूम कर कलकत्त को नामसे प्रसिद्ध है। लोट पाया। प्रवाह कलकत से तार के जरिये दिसी साड़ितप्रवाहको नापनेका तरीका ।-प्रति सेकेण्ड में चला गया, वहाँ कोलको घूमा कर फिर कल कने के तारसे कितनो बिजली जातो है, इसका निश्चय कर कोषमें वापस पा गया। लौटते समय तारके रास्ते से। प्रवाहमा परिमाण निर्धारित होता है। दोनों पायोमें