पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३८१

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पादित होता है; नवाविभूत प्रवाह ऐसी दिशा में बहता है. जिससे, लता । वायवीय पदार्थ ताड़ित-स्फुलिङ्ग के चलने से जी वह उस गतिको वाधा पहुँचाता रहता है । इम हिसाब- | तमाशे होते हैं, वे सब हो रस यन्त्रको सहायतामे सुचार को याद रखनेसे, किस तरफ प्रवाह जमेगा, इस वातका | रूपसे दिखाये जा सकते हैं। गासलरके नलको बात पहने सहजमें निश्चय किया जा सकता है। जैमे सहमा घोड़ा कह चुके हैं। उसके भीतर विविध वायवीय पदार्थ पल्प चलनेसे सवार पोछेको झुक जाता है और खड़े होने पर परिमाणमें रहते हैं। उसमें साडितप्रवाह चलनेसे विविध सामने झुक जाता है, यह भो कुछ कुछ वैमा हो है। वर्ण के विचित्र पालोकोका विकाश होता है। क्रम् ताड़ितप्रवाहको सहसा किसो तार पर चलानेसे भोतरसे। माहवन काँचके नलके भोतरसे वायुका प्रायः मम्मू - एक वाधामो पड़ता है। महमा प्रवाहमान स्रोतको रूपसे निकाल कर, कुगडलो हारा ताड़ितप्रवाह चला कर रोकना चाहो तो वह रुकता नहीं बल्कि क्षणभर के लिए नाना प्रकारके पाचयजनक तमाशे दिखाये थे। प्रबलतर हो जाता है, उम में भी यहो कारण है। यह क्र कमकं नलके भीतर वायु करीब करोब होतो ही साधारण नियम है, कि चोम्बक प्रदेशमें एक सारको | नहो, ऐसा भी कहा जा सकता है। कुछ पणु इधर घुमानेसे हो उममें प्रवाहका पाविर्भाव वा मक्रमा उधर दौड़ा करते हैं। ये हो पण ताड़ित वहन करके होगा। चोम्बक प्रदेश में किमो नाकमा चुम्बकका अथवा इतस्ततः दौड़ते हैं। नलके भीतर एक उली खड़ियामिहो तदनुरूप ताडितप्रवाहका प्रभाव विद्यमान है। यह होरका टुकड़ा आदि विविध पदार्थ रखने से ये पण उन. प्रभाव सर्वत्र ममान होता है. रीमा नियम नहीं ; कहों पर धक्का दे कर विचित्र उज्ज्वल आलोकका विकाश करने ज्यादा और कहों कम होता है । अधिक प्रवाह के स्थानमे है । क्र क्म् नलके ये कार्य अत्यन्त सुन्दर पोर मनोहर कम प्रवाहके स्थान पर अथवा कम प्रवाह के स्थानसे | होते हैं। अधिक प्रवाहक स्थान पर किसो भो परिचालकका ले जा ____रूमकर्फ को कुण्डली में जो उग्र ताड़ितप्रवाह उत्पन सकते हैं, उसमें एक तरफ (छोर पर ) ताडितप्रवाह | होता है, वह एक हो तरफको अविच्छेद स्रोतमें नहीं उत्पन्न होगा। प्रवाह जब तक चलता रहेगा, उमको | बहता। रह रह कर और थम थम कर बहता है। १ स्थिति भी तभो तक रहे गो। यदि दोनों जगहका प्रभाव मिनटके अन्दर २०३० बार अथबा २०१४०० बार ठह. ममान हो, तो मम्भव है प्रवाह उत्पन्न न हो। परिचालक रता और बरता है । इन विच्छ दाँको संख्या को यदि जितनी तेजीसे एक स्थानसे अन्य स्थानमें ले जायगा, किमी तरह दहाई प्रोर संकड़े को पार कर लाख पौर उत्पन्न प्रवाह भी उतना हो प्रबल और पुट होगा। वस्तुतः | करोड़में चढ़ाया जाय तथा माथ ही प्रवाहको उग्रता पौर ताँबके तारको कई बार ऐंठ कर अति वेगसे चौम्बक | उहतिको खूब अचे पर चढाया जाय, तो क.कम नलको प्रदेशमें चलाने वा घुमानेमे, अत्यन्त प्रबल ताडितप्रवाह | यन्त्र के माथ संलग्न रखने का भी पावश्यकता नहीं मिल सकता है। व्यवस्थापूर्वक इस प्रकारमे ताडित- | रहतो। यन्त्रक पाख में किमो स्थान पर मलको रखमेसे प्रधाइ उत्पन्न करनेसे उग्रता ओर उद्ध, तिके विषयमें वह | उसका पन्तदंश उज्ज्वल हो उठता है. बोचमें मनुष्यका ताडितयन्त्रोत्पन्न प्रवाह के समान होता है। व्यवधान रहनेमे उग्र ताड़ितप्रवाह उसको भेद कर चला पकसर करके रूम्कफ को कुण्डली (Roomkorff's | जाता है और दूरस्थ ननको उद्दोग करता है। पाश्चर्यका Coil) नामक एक.तरहका यन्त्र व्यवहत होता है, उसः | विषय है, कि जिसका शरीर भेद कर जाता है, उसे कुछ में ताड़ितप्रवाहको उहति इतनी ज्यादा होतो है, कि | भो मान्न म नहीं पड़ता। साधारण रूमकक के यन्त्रका वह प्रवाह अनायास हो अपरिचालक वायुको भेदकर वा साधारण डाकरीका बैटरोका धक्का मनुथशरोर सह चला जाता है। २।१० इञ्च लम्बा ताड़ित-स्फुलिङ्ग एक नहीं सकता, किन्तु इस प्रत्यु प्रताड़ितप्रवाहके धक्के- शेटोसो कुखलोके हारा भो मिल सकता है। बड़े भारी मैकण्डमें मो लाख बार प्रचण्ड उग्रता के साथ-देह भेद कोत्र वा बेटरोसे रखका रुफुलिङ्गा भो नहीं मिक- | करने पर भी कोई व्याघात नहीं होता। तीस वर्ष Vol. I.95